ईरान को अलग करने की अमरीकी साम्राज्यवाद की कोशिशों का कड़ा विरोध करना होगा!

8 मई को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ किये गये परमाणु समझौते से अलग होने की एकपक्षीय घोषणा की। आधिकारिक तौर पर इस परमाणु समझौते को जॉइंट काम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ एक्शन (जे.सी.पी.ओ.ए.) कहा जाता है।

जुलाई 2015 में अमरीका ने ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, यूरोपीय संघ, रूस और जर्मनी के साथ मिलकर जे.सी.पी.ओ.ए. का समझौता ईरान के साथ किया था। समझौते के मुताबिक, ईरान को अपने परमाणु हथियारों के विकास के कार्यक्रम को सीमित करना होगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को आई.ए.ई.ए. द्वारा गहन निगरानी के लिए तैयार रखना होगा। समझौते की वचनबद्धताओं का पालन करने के बदले में, ईरान को अमरीका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिलेगी।

2016 में समझौते के अमल में आने की शुरुआत से, अंतर्राष्ट्रीय नियामकों और राष्ट्रीय ख़ुफिया सेवाओं ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान ने इसका अनुपालन किया है। मार्च 2018 में, आई.ए.ई.ए. के निदेशक ने कहा कि आई.ए.ई.ए. ने सत्यापित किया है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू कर रहा है।

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के चुनावी वादे में ईरान के साथ परमाणु समझौते से हटना भी शामिल था। उन्होंने दावा किया है कि यह समझौता अमरीका के हितों के ख़िलाफ़ है। ट्रम्प ने राष्ट्रपति बनने के बाद, जे.सी.पी.ओ.ए. से संबंधित प्रतिबंधों को लगाना तीन बार टाला, यह सुनिश्चित करने के लिए कि अमरीका इस समझौते का अनुपालन कर रहा है। ट्रम्प ने इस समझौते से वापस हटने के अपनी सरकार के इरादे को बार-बार हमलावर तरीके से दोहराया है।

30 अप्रैल, 2018 को अमरीका और इज़राइल ने दावा किया था कि ईरान ने आई.ए.ई.ए. के अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद, उनके सामने अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्से का कथित तौर पर खुलासा नहीं किया था। तत्काल में यह बहाना देते हुए, 8 मई को अमरीका आधिकारिक तौर पर इस सौदे से पीछे हट गया।

परमाणु सौदे से पीछे हटने के बाद, अमरीका द्वारा एक बार फिर से ईरान पर कठोर प्रतिबंधों को लागू करने की संभावना है। इन प्रतिबंधों ने ईरानी लोगों के लिए गंभीर कठिनाइयां पैदा की हैं। ये प्रतिबंध अन्य देशों के साथ ईरान के व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे, क्योंकि इनमें उन प्रतिबंधों को शामिल करने की संभावना है जो अन्य देशों को ईरान के साथ व्यापार करने पर रोक लगाएंगे।

ईरान के साथ परमाणु समझौते से अमरीका का हटना अमरीकी साम्राज्यवादियों के निरंतर प्रयासों में एक नया कदम है। यह कदम ईरान पर विदेशी साम्राज्यवादी हस्तक्षेप से मुक्त, अपने आर्थिक और राजनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ने के संप्रभु अधिकार को छोड़ने का दवाब डालता है। यह कदम ईरान को अलग-थलग करने और उसे शैतान बताने की उनकी नई कोशिश है।

अमरीकी साम्राज्यवादियों और उसके सहयोगियों ने निरंतर प्रचार किया है कि ईरान द्वारा परमाणु ऊर्जा का विकास “विश्व शांति के लिए ख़तरा” है। वे इस वास्तविकता को छुपाते हैं कि परमाणु हथियारों का सबसे बड़ा भंडार अमरीकी साम्राज्यवादियों के हाथों में है। इज़राइली राज्य जिसने फिलिस्तीनी लोगों को अपने देश से विस्थापित कर दिया है और लगातार उन पर सबसे बुरे अत्याचार करता है। अब यह राज्य अमरीकी साम्राज्यवादियों के पूर्ण समर्थन के साथ परमाणु हथियारों से पूरी तरह से लैस है।

ईरान के साथ हुये परमाणु समझौते से अमरीकी साम्राज्यवाद का वापस हटना अपने सहयोगियों इज़राइल और सऊदी अरब को यह स्पष्ट संकेत है कि वे ईरान के ख़िलाफ़ अपने हमलों और उकसावे को बढ़ा सकते हैं। यह सीरिया और लेबनान में सैन्य संघर्ष को तेज़ करने का मार्ग खोलता है और इस क्षेत्र में युद्ध के ख़तरे को बढ़ाता है। इज़राइल ने पहले से ही अपने हमले बढ़ा दिये हैं और सीरिया में ईरानी बलों पर हवाई हमले किए हैं। इसने लेबनान में हमास के बलों पर अपने हमलों और उकसावे को बढ़ा दिया है। सऊदी अरब द्वारा भी यमन में हमलों को तेज़ करने की संभावना है।

अमरीकी साम्राज्यवादियों और उसके सहयोगियों के द्वारा धमकियों और दबावों के ख़िलाफ़ ईरान का दृढ़ प्रतिरोध पश्चिमी एशिया के कई देशों के लोगों के लिये प्रेरणा

का स्रोत है जो साम्राज्यवाद समर्थित सत्ताओं के दमनकारी राज से मुक्त होना चाहते हैं। इन सत्ताओं ने ईरानी क्रांति को नष्ट करने के लिए अमरीकी साम्राज्यवादियों का सहयोग करते हुए बहुत कोशिशें की हैं, लेकिन अब तक ये असफल रही हैं। मई 2017 में, जब ट्रम्प ने पश्चिम एशिया का दौरा किया था, तो उसने ईरान पर “आतंकवादियों को सुरक्षित बंदरगाह प्रदान करने” का आरोप लगाया था। उसने ईरान में सत्ता को बदलने के लिए पश्चिम एशिया में प्रतिक्रियावादी शासकों को अमरीकी नेतृत्व के तहत एक साथ आने के लिए बुलावा दिया था। अपनी सरकार का इरादा घोषित करते हुए ट्रम्प ने खुले तौर पर ईरान को अलग करने, अस्थिर करने, धमकी देने और वहां की सत्ता को बदलने की कोशिशें जारी रखी।

ईरान के साथ परमाणु समझौते से अमरीका की एकपक्षीय वापसी को जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे उसके कुछ प्रमुख सहयोगियों और समझौते में भागीदारों ने समर्थन नहीं दिया है। रूस और चीन के साथ इन ताक़तों ने जे.सी.पी.ओ.ए. को अपनी प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने के अपने इरादे की घोषणा की है। ऐसी संभावना है कि ये देश अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा अन्य देशों को ईरान के साथ व्यापार करने से दंडित करने के लिए प्रतिबंधों को बढ़ाने के अमरीका के प्रयासों का विरोध करेंगे। ज़रूर यह साम्राज्यवादियों के आपस के अंतर्विरोधों को बढ़ाएगा, जिससे युद्ध का ख़तरा बढ़ सकता है।

अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा ईरान को अलग-थलग करने उस पर आक्रमण करने और हस्तक्षेप करने तथा उन देषों में शासन परिवर्तन करने की अमरीकी नीति (जो देश अपने आप को अमरीका के भू-राजनीतिक महत्वकाक्षांओं के साथ जोड़ने से इंकार करते हैं) के प्रयासों का दुनियाभर में आज़ादी प्रिय और शांति प्रिय लोगों को पूरा विरोध करना चाहिए।

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Jun 1-15 2018    World/Geopolitics    Communalism     History    Rights     War & Peace     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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