ट्रेड यूनियनों का संयुक्त अधिवेषन: 20 जुलाई को दिल्ली में हड़ताल

2 जून, 2018 की शाम को दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित, एटक भवन में दिल्ली राज्य की ट्रेड यूनियनों का संयुक्त अधिवेशन हुआ। अधिवेशन में ट्रेड यूनियनों के 140 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। परिवहन, स्वास्थ्य सेवा, दिल्ली नगर निगम आदि से जुड़ी यूनियनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। अधिवेषन का माहौल उत्साहजनक था।

Trade union conference on 2 June 2018

अधिवेशन की अध्यक्षता अनुराग सक्सेना, राजा राम, संतोष राय, ऋषिपाल, राकेश कुमार, मोहन कुमार और का. बिरजू नायक ने की।

अधिवेषन को संबोधित करते हुए, इंटक के ऋषिपाल ने कहा कि केन्द्र और दिल्ली सरकार पूंजीपतियों के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने ठेका मज़दूरों की हालतों पर प्रकाष डाला। उन्होंने न्यूनतम वेतन को लागू न करवा पाने के लिए सरकार की कड़ी निंदा की। उन्होंने, नगर-निगम कर्मियों को समय पर वेतन न दिए जाने के मसले को उठाया।

सीटू के का. तपन सेन ने कहा कि संयुक्त संघर्ष आज वक्त की ज़रूरत है। हम अपने संघर्ष से दिल्ली सरकार को घोषित न्यूनतम वेतन को लागू करने के लिये मजबूर कर सकते हैं। उन्होंने हरियाणा के निगम कर्मियों की 16 दिन की हड़ताल चली, उदाहरण देकर बताया कि उन्हें उनके संघर्ष के कारण जीत मिली। सरकारें, कानूनी रूप से मज़दूरों के अधिकारों को छीन सकती हैं, लेकिन मज़दूर वर्ग को अपने संघर्ष से उन अधिकारों को जीतना पड़ता है। हड़ताल के संदेश को दिल्ली के कोने-कोने में ले जायें, औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ, मजदूर बस्तियों में भी। मैं उम्मीद करता हूं कि, यह हड़ताल एक कामयाब हड़ताल होगी।

हिन्द मजदूर सभा से का. राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियां मज़दूरों और उनके ट्रेड यूनियनों पर हमले हैं। हमें मज़दूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ मज़दूर वर्ग को लामबंध करना होगा।
एटक के का. धीरेन्द्र शर्मा ने कहा कि संविधान में लिविंग वेज लिखी है, जबकि सरकार न्यूनतम वेतन देती है, जबकि वह लागू तक नहीं होता है। समान काम के लिये ही महिला को पुरुष मज़दूरों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है। इस तरह के भेदभाव होते हैं। श्रम विभाग में, मज़दूरों के अनुपात में बहुत ही कम कर्मचारी और अधिकारी हैं। सरकार नियुक्त नहीं करती है। हमें अपने संघर्ष से हालत को बदलना होगा।

ए.आई.सी.सी.टी.यू. से का. अभिषेक ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री घोषणाएं तो बड़ी-बड़ी करते हैं, लेकिन वे घोषणायें ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं होती हैं। सेवा से का. ऊषा ने घरेलू मज़दूरों की हालतों के बारे में बात रखी।
मजदूर एकता कमेटी का. संतोष कुमार ने कहा कि मज़दूर जन्म से मौत तक संघर्ष करता है - पहले भोजन के लिए, षिक्षा के लिए, नौकरी के लिए, नौकरी बचाने के लिए, फिर पेंषन के लिए। आज मज़दूरों के जो कानून हैं, मज़दूर वर्ग के संघर्ष की देन है। उन्हें बनाने के लिए लड़ते हैं। फिर उन्हें बचाने के लिए लड़ते हैं। फिर उन्हें लागू करवाने के लिए लड़ते हैं। यही हमारे देष की व्यवस्था है। इस व्यवस्था के सभी अंग - न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका सभी के सभी, मज़दूर वर्ग के षोषण के लिए ज़िम्मेदार हैं। लाठी आपके हाथ में नहीं है, पूंजीपति वर्ग के पास है तो भैंस के दूध की कल्पना आप नहीं कर सकते हैं, आप भैंस के लिए चारे का इंतजाम करते हैं। कहने का मतलब है, न्याय हमारे संघर्ष पर निर्भर है। हमें देष का मालिक बनना होगा, मज़दूरों और किसानों का राज स्थापित करने का संघर्ष भी साथ-साथ चलाना होगा।
ए.आई.यू.टी.यू.सी से का. रामजी सिंह, यू.टी.यू.सी. से का. शत्रुजीत सिंह, एल.पी.एफ. से श्री जवाहर, और टी.यू.सी.सी. से का. गौरव ने अधिवेषन को संबोधित किया।
अधिवेशन को संबोधित करते हुए सभी वक्ताओं ने एकजुटता के साथ, 20 जुलाई की हड़ताल के प्रस्ताव का जोरदार तरीके से समर्थन किया। उपस्थित प्रतिनिधियों ने हड़ताल को कामयाब करने के लिए अपना हाथ उठाया।
अधिवेशन में सर्वसम्मति से फैसला हुआ कि 20 जुलाई को दिल्ली में हड़ताल और 27 जून को दिल्ली सरकार के खिलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी तैयारी के लिए दिल्ली के अलग-अलग जिलों में संयुक्त अधिवेशन करके की जाएगी।

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Jun 16-30 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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