ब्रिटेन में मुख्य रेल मार्ग का पुनःराष्ट्रीयकरण

भारत में एक के बाद एक सभी सरकारों ने बड़े ही शातिर और छुप्पे तरीकेसे भारतीय रेल के निजीकरण को आगे बढ़ाया है। हमारे देश की रेल सेवा के निजीकरण को जायज़ ठहराते हुए हमेशा ब्रिटिश रेल का उदहारण सामने रखा जाता है। बिबेक देब्राय समिति ने सिफारिश की कि भारतीय रेलवे को ब्रिटेन के निजीकरण मॉडल का पालन करना चाहिए। यह कहा गया कि, " ब्रिटेन से हमें जो सबक मिलते है वो यह हैं की बुनियादी ढांचा और रेल ट्रैक पर सार्वजनिक एकाधिकार होना चाहिए, जबकि यात्रियों के लिए चलने वाले रोलिंग स्टॉक ऑपरेशन और माल गाड़ियों जैसे क्षेत्रों को निजीकरण के लिए खोलना चाहिए।" इस समिति ने बड़ी आसानी से यह सत्य छुपाए रखा कि ब्रिटिश रेल के निजीकरण ने अपने यात्रियों को किए वादे पुरे नहीं किए हैं। और अब यात्रियों तथा मज़दूरों के दबाव के कारण उन्हें कई मार्गों का पुनः राष्ट्रीयकरण करने पर मजबूर होना पड़ा है।

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16 मई 2018 को, ब्रिटेन के परिवहन मंत्री ने घोषणा की कि पूर्वी तट रेल लाइन को 24 जून 2018 को राज्य नियंत्रण के तहत वापस ले लिया जाएगा। यह एक प्रमुख रेल मार्ग है, लगभग 600 किमी लंबा, लंदन को एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड की राजधानी, से जोड़ने वाला । 12 साल पहले जब पहली बार इस मार्ग का निजीकरण हुआ था तबसे लेकर आज तक यह तीसरी बार होगा जब यह रेल मार्ग राज्य नियंत्रण में वापस आ जाएगा।

1990 के दशक में जबसे ब्रिटिश रेल का निजीकरण शुरू हुआ तबसे ही उसका विरोध ब्रिटैन के लोगों ने किया है। समय के साथ यह विरोध लगातार बढ़ता गया जब लोगों ने रेल सफर के किराए लगातार बढ़ते हुए और निजीकरण के बाद सुरक्षा का स्तर तथा सेवा की गुणवत्ता लगातार गिरती हुई पाई। विरोध इस स्तर तक बढ़ गया है कि हाल के एक राय सर्वेक्षण से पता चला कि 75% लोग ब्रिटिश रेल का पुनर राष्ट्रीयकरण चाहते हैं। उनके तर्क के समर्थन में लोग पूर्वी तट रेल लाइन का उदहारण सामने रखते हैं। 2009 और 2015 के बीच जब ये लाइन सार्वजनिक क्षेत्र के तहत थी तब यह सबसे अच्छा प्रदर्शन नेटवर्क था। ब्रिटिश लोगों ने ब्रिटेन और यूरोप के बड़े पूंजीवादी एकाधिकार के लाभ के लिए होनेवाले निजीकरण की वजहसे भरी कीमतें चुकाई हैं। निजीकरण को जायज़ ठहराते हुए यह दावा किया गया था कि यह सार्वजनिक क्षेत्र में ब्रिटिश रेल को दी गई सब्सिडी को खत्म कर देगा। हकीकत में, निजी एकाधिकार और राज्य के मलिकी वाली रेल नेटवर्क, जो एक साथ ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिक हैं, उन्हें दी जानेवाली सब्सिडी की कीमत अब तक की सबसे ज्यादा है, सालाना 4 बिलियन पाउंड।

 Bring back British Rail

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निजीकृत ब्रिटिश रेल का अनुभव एक बार फिर से यहि दिखाता है कि रेलवे के निजीकरण के पक्ष में दी गई कोई भी दलील सच नहीं होती है। निजीकरण केवल, लोगों की लागत पर, कुछ निजी एकाधिकारों को समृद्ध करने में मदद करता है।

हमारे देश में रेल मज़दूरों और यात्रियों के विरोध ने एनडीए और यूपीए दोनों सरकारों को यह मानने से इनकार करने के लिए मजबूर किया है कि भारतीय रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है। लेकिन हकीकत में वे इसे 'तर्कसंगतता', 'पुनर्गठन' और 'सुधार' के नाम पर आगे ले जा रहे हैं। केवल रेल मज़दूरों तथा रेल यात्रियों के मज़बूत एकजुट विरोध से यह सुनिश्चित होगा कि सार्वजनिक पैसों के साथ निर्मित भारतीय रेलवे का उपयोग सार्वजनिक लाभ के लिए किया जाएगा, न कि निजी लाभ के लिए।

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renationalisation    Jun 16-30 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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