किसान मज़दूर एकता सम्मेलन ने संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प

10 जून, 2018 को राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के भादरा उपखंड के गांव नेठराना में चारों नहरों की पानी चोरी पर रोक लगाने तथा अमर सिंह ब्रांच के 30 मोघों को ठीक कराने की मांग को लेकर, किसान-मज़दूर एकता सम्मेलन आयोजित किया गया। यह पूर्व सरपंच, दिवंगत मास्टर हनुमान प्रसाद वर्मा की 81वीं जयंती समारोह के अवसर पर किया गया।

A view of the audience

किसान मज़दूर व्यापारी संयुक्त संघर्ष समिति का सम्मलेन, 10 जून 2018

Rajasthan kisan Sabha

किसान मज़दूर व्यापारी संयुक्त संघर्ष समिति के सम्मलेन का अध्यक्ष मंडल

इस अवसर पर, इलाके के किसानों और मज़दूरों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसमें नेठराना, दिपलाना, मुंसरी, भादरा, के नहर सिंचित क्षेत्र से किसानों, मज़दूरों, दस्तकारों, दुकानदारों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, नौजवानों, कर्मचारियों, डाक्टरों, अधिवक्ताओं और पेंशनधारियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में नेठराना, दीपलाना, मुंसरी, भादरा की चारों नहरों के चुने गए अध्यक्षों व सदस्यों तथा वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। सम्मेलन की अध्यक्षता गांव के वयोवृद्ध किसान चुन्नीलाल मेघवाल ने की। मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता लोक राज संगठन के सर्व हिंद परिषद के उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा थे।

सम्मेलन का संचालन प्रदीप शर्मा, विनोद सिंगाठिया और भगतसिंह बाना ने किया। वहां उपस्थित लोगों ने मास्टर हनुमान प्रसाद वर्मा को पुष्प भेंट करके श्रद्धांजलि दी।

वक्ताओं ने स्वर्गीय मास्टर हनुमान प्रसाद वर्मा के जीवन और संघर्षों पर विचार रखे और उनकी मानवतावादी समतामूलक विचारधारा तथा आम लोगों के संघर्षों में अग्रणी भूमिका पर विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने उनके द्वारा शुरू किये गये संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता, लोक राज संगठन की सर्व हिंद परिषद के उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि हमारे देश के लोकतंत्र को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताया जा रहा है, परंतु यह मज़दूरों और किसानों के लिए लोकतंत्र नहीं है। यह कारपोरेट घरानों, देशी और विदेशी कंपनियों के लिए लोकतंत्र है।

हमें यह साफ तरीके से समझना होगा कि देश को न तो कांग्रेस पार्टी के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने चलाया और न ही आज नरेंद्र मोदी चला रहे हैं। वास्तव में इस देश को चलाने वाले 150 इजारेदार पूंजीवादी घराने हैं। वे मेहनतकश वर्ग का शोषण करने के लिए कभी एक पार्टी को तो कभी दूसरी पार्टी को सत्ता में लेकर आते हैं।

हम देखते हैं कि नीरव मोदी, ललित मोदी और विजय माल्या जैसे लोग बैंकों में जमा हमारी मेहनत की कमाई को लेकर भाग गए हैं और विदेशों में मौज कर रहे हैं। ये सारे पूंजीवादी घराने मिलकर करीब 8 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ा वापस नहीं कर रहे हैं। बैंकों की सेहत सुधारने के नाम से हमारी मेहनत की कमाई की बचत से लाखों-करोड़ों के पैकेज देकर, इन्हें फिर से हमारी बचत को लूटने का मौका दिया जा रहा है।

किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मज़दूर का जीना दूभर हो रहा है। आज पूरी व्यवस्था पर इन 150 घरानों का कब्ज़ा है। इसलिए हमें अपनी तात्कालिक मांगों के साथ-साथ राजनीतिक व्यवस्था को अपने हाथों में लेने के लिये संघर्ष करना है। ताकि शोषण पर आधारित शासन व्यवस्था को बदलकर राजनीतिक सत्ता मेहनतकश वर्ग के हाथों में लाई जाये। इसके लिये हमें लोगों के बीच में वर्ग चेतना और राजनीतिक चेतना पैदा करनी होगी और संघर्ष को तेज़ करना होगा। इसके बिना न तो तात्कालिक समस्याओं का हल होगा और न ही लोगों का शोषण बंद होगा।

सम्मेलन को संबोधित करने वाले सभी वक्ताओं ने चारों नहरों में लगे 30 मोघों को ठीक करवाने, नहरों में पूरा पानी देने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने सहित अनेक मांगों पर संघर्ष करने के लिए वर्तमान संघर्ष समिति का विस्तार करने पर जोर दिया। जिसके बाद समिति में चारों नहरों के सभी अध्यक्षों और सदस्यों तथा पंचों और सरपंचों को शामिल करके संघर्ष समिति का विस्तार किया गया। इसके साथ ही अपने संघर्ष को तेज़ करने का संकल्प लिया गया।

Com.Guru Hanuman Prasad Com. Om Sahu
लोक राज संगठन उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा पूर्व सरपंच ओम सहु

सम्मेलन को संबोधित करने वाले वक्ताओं में शामिल थे - पूर्व संसदीय सचिव जयदीप डूडी, प्रेम सिंह पूनिया, भूतपूर्व लोकपाल पी.पी. सिंह डूडी, पूर्व सरपंच कामरेड ओम प्रकाश सहू, कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष सतपाल नेहरा, शेर सिंह बेनीवाल, जुगल खाती, शिवनाथ सिंह लांबा, मांगे राम बेरड़, शेरसिंह गोस्वामी, विक्रम सिंह राठौड़, राजीव कसवा, जगदीश ढाका, रणजीत सिंह दुहारिया, रामस्वरूप कसवा, मंगाराम स्वामी, रामजीलाल मान, झंडू राम घिंटाला, अमित छापोला, कामरेड गौरी शंकर शिधमुख, गुलाब स्वामी, सुभाष, राजेंद्र बेनीवाल एडवोकेट, बेगराज भाम्बू, शैलेंद्र, प्रदीप शर्मा, विनोद सिंगाठिया, भगत सिंह आदि।

पूर्व संसदीय सचिव जयदीप डूडी व विधानसभा चुनाव के सभी संभावित उम्मीदवारों ने नेठराना, दीपलाना मुंसरी, भादरा, इन चारों इलाकों के किसानों की मांगों को जायज़ बताते हुए, अमरसिंह ब्रांच के 30 मोगों को ठीक कराने के लिए संघर्ष में साथ रहने का वादा किया। पानी चोरों का साथ देने वाले नेताओं की आलोचना की गई। इस मौके पर 25 पंचायतों के लोगों ने एकजुट होकर, पानी चोरों का साथ देने वालों को विधानसभा चुनाव में सबक सिखाने का संकल्प लिया।

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Jun 16-30 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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