किसानों ने अपनी मांगों के लिये आंदोलन जारी रखा

देशभर के किसान, लंबे समय से उठाई जीविका की सुरक्षा की अपनी मांग के लिये आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं लाभकारी मुल्यों पर फसलों की खरीद और उनके कर्ज़ों की एक बार माफी। उनकी ये दोनों मांगें जायज हैं और समाज के आम हित में हैं। परन्तु केन्द्र और प्रांतों की सरकारें किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेना चाहती हैं क्योंकि इससे कृषि व्यापार पर हावी इज़ारेदार कंपनियों के मुनाफों पर चोट पहुंचेगी।

farmers agitation on 1-June in MP

मध्य प्रदेश के किसान 1 जून को प्रदर्शन करते हुए

age farmers throw vegies in Bagha Purana in Moga Punjab

पंजाब के मोघा जिले के किसान अपनी सब्ज़ियां सड़क पर फैंकते हुए

Farmers of Hanumangarh holding protest on 10 June 2018

10 जून को राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में किसानों का धरना

Farmers shavasan on the road

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) को किसान शवासन करके रास्ता रोकते हए

सरकारों की बेरुख़ी को देखते हुए, विभिन्न किसान संगठनों ने 1 से 10 जून 2018 के दस दिनों में विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई थी। किसानांे ने फैसला लिया कि वे इस अवधि में अपने उत्पादों को शहरो में नहीं भेजेगें और कुछ प्रमुख स्थानों पर धरने प्रदर्शन करेंगे। यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश के मंदसौर में निहत्थे किसानों पर 6 जून 2017 को की गयी पुलिस गोलीबारी की पहली बरसी पर आयोजित किया गया था।

मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के छः प्रांतों के किसानों ने इस दस-दिवसीय कार्यक्रम की शुरुवात अपने दूध व सब्ज़ियों को सड़कों पर फैंक कर किया। इससे उन्होंने लोगों का ध्यान इस बात पर आकर्षित करने की कोशिश की कि मंडियों में उन्हें अपने उत्पादों का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल रहा है। इन प्रांतों में आगे आने वाले किसान संगठनों में, किसान एकता मंच, राष्ट्रीय किसान महा संघ, भारतीय किसान यूनियन, आम किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान मज़दूर महासंघ शामिल थे। 172 किसान संगठनों की समन्वय समिति ने पिछले महीने अपनी सभा में इस कार्यक्रम का अंतिम स्वरूप तय किया था। आॅल इंडिया किसान सभा ने महाराष्ट्र के 23 जिलों में विरोध प्रदर्शनों को आयोजन किया था।

अपने दस दिन के आंदोलन के समापन के लिये 10 जून को किसान संगठनों ने भारत बंद का आयोजन किया। इस दिन गुजरात में सौराष्ट्र, मध्य और उत्तरी गुजरात के किसानों ने सड़कों पर दूध और सब्ज़ियों को फैंका। जूनागढ़ जिले के केशोड़ शहर में दिनभर का बंद किया गया। इस दिन उत्तर प्रदेश के अमरोहा में किसानों ने सड़कों पर अपनी टमाटरों की फसल फैंकी और माल यातायात में बाधा डाली। देश के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में बाजार दोपहर 2 बजे तक बंद रहे। इसी दिन हनुमानगढ़ जिले में नेतराणा, दिपलाना, मुंसारी और भादरा के किसानों ने नहर के पानी को सिंचाई के लिये उपलब्ध कराने की मांग पर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया।

जबकि कृषि संकट से किसान बर्बाद हो रहे हैं, शासक पूंजीपति वर्ग, जिसका प्रतिनिधित्व सत्ताधारी पार्टियां करती हैं, उनको इसकी कोई चिंता नहीं है। यह केन्द्रीय कृषिमंत्री राधा मोहन सिंह के बयान में साफ नज़र आता है। उसने 2 जून को किसानों के आंदोलन को सिर्फ मीडिया का ध्यान आकर्षित करने का नाटक बता कर बदनाम करने की कोशिश की। उसने तो यहां तक कह डाला कि किसान मीडिया में सामने आने के लिये आत्महत्याएं कर रहे हैं! मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यह मानने से तो इनकार किया कि किसान गुस्साए हुए हैं और आंदोलन कर रहे हैं। परन्तु इसी दौरान, किसानों को दबाने के लिये बड़ी संख्या में पुलिस और विशेष सशस्त्र बलों के दस्ते तैनात करने से वह नहीं चूका। मंदसौर में उसने विशेष सशस्त्र बलों की पांच कंपनियां तैनात कीं।

शासकों की उदासीनता के सामने किसानों ने अपने दस-दिवसीय आंदोलन के बाद भी संघर्ष जारी रखा है। 15 जून के दिन किसानों ने महामार्गों में चक्का जाम करने का संयुक्त कार्यक्रम बनाया। खबरों के मुताबिक, महामार्गों के चक्का जाम को अंजाम देने के लिये किसानों की 62 यूनियनों ने हिस्सा लिया। किसानों की दो मुख्य मांगों के लिये मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में तीन घंटों के लिये महामार्ग बंद रहे। हरियाणा में चंडीगढ़ से 45 किलो मीटर पर अंबाला अनाज मंडी के करीब किसानों ने महामार्ग 1 को रोक दिया। उन्होंने अपने ट्रैक्टर महामार्ग पर खड़े कर दिये और चिलचिलाती धूप के बावजूद धरना दिया। हरियाणा सरकार ने अंबाला, कुरुक्षेत्र, सोनीपत और जिंद में बड़ी संख्या में पुलिस और सी.आर.पी.एफ. तैनात की। पंजाब में किसानों ने चंडीगढ़ से करीब 130 किलो मीटर दूर जलंधर के पास फगवाड़ा के औद्योगिक शहर में यातायात को रोका। मध्य प्रदेश में भोपाल से खबर मिली है कि वहां 12 बजे से 3 बजे तक रास्ता रोका गया। परन्तु वहां एम्ब्यूलेंसों को नहीं रोका गया था।

21 जून को भी संयुक्त कार्यवाइयां की गयी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) को हजारों की संख्या में देशभर में किसानों महामार्गों पर लेट कर शवासन किया। ऐसे कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड में सुबह 9 बजे से 12 बजे तक किये गये।

किसानों का आंदोलन साफ तरीके से दिखा रहा है कि देशभर में भयंकर कृषि संकट है। किसानों की जायज मांगों पर ध्यान देने की जगह, हिन्दोस्तान के शासक सिर्फ वैसी ही नीतियों पर चल रहे हैं जो मुट्ठीभर इज़ारेदार कार्पोरेशनों के लिये फायदेमंद हैं और किसानों और हिन्दोस्तान के अधिकांश मेहनतकश लोगों के हित के विरुद्ध हैं। आंदोलन कर रहे संगठनों ने अपनी संयुक्त कार्यवाइयों को अगस्त में भी जारी रखने की योजना बनाई है।

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Jul 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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