छत्तीसगढ़ पुलिस के परिवारों का आंदोलन

काम की बुरी शर्तों और बहुत कम वेतन व सुविधाओं के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ के पुलिस कर्मियों का सुलगता गुस्सा आखिरकार एक आंदोलन में फूट पड़ा। इस आंदोलन में सेवारत पुलिस कर्मियों की पत्नियां आगे आयीं। छत्तीसगढ़ में करीब 50,000 पुलिस कर्मी हैं।

 Chhattisgarh police protest
 Chhattisgarh police protest

पुलिस कर्मियों की पत्नियों ने अलग-अलग जिलों के मुख्यालयों के सामने जून के महीने में अनेक विरोध प्रदर्शन आयोजित किये। 19 जून को सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने राजनांदगांव में प्रदर्शन किया। इसी आंदोलन के तहत 24 जून को राजधानी रायपुर के इदगाह भाटा मैदान में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गयी।

प्रांत के पुलिस कर्मी लंबे समय से अपने कष्टों की शिकायत अपने वरिष्ठ अधिकारियों से करते आये हैं। परन्तु उनके कष्टों का निवारण करने की जगह, उनमें से आवाज़ उठाने वालों को सरकार उत्पीड़ित कर रही है। इस परिस्थिति में, आंदोलनकारी पुलिस कर्मियों ने सोशल मीडिया के ज़रिये अपने कष्टों पर प्रकाश डाला है।

प्रांत की सरकार ने आंदोलनकारी पुलिस कर्मियों और उनके नेताओं के ख़िलाफ़ आतंक का माहौल बना दिया है। सैकड़ों को कारण बताओ नोटिस जारी किये गये हैं। अगुआ कार्यकर्ताओं को निलंबित किया गया है और उन्हें गिरफ्तार किया गया है। नेताओं के फोन और सोशल मीडिया साइटों को खुफिया एजेंसियों की निगरानी में डाल दिया गया है। जो भी पुलिस कर्मी नेताओं से संपर्क करते हैं उन्हें भी निशाना बनाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पुलिस के सर्वोच्च अधिकारी ने आंदोलनकारी महिलाओं को एक सार्वजनिक चेतावनी जारी की है कि उनकी पहचान की जायेगी और उनके पतियों के ख़िलाफ़ कार्यवाई की जायेगी। इस चेतावनी को सोशल मीडिया और न्यूज मीडिया में डाला गया है।

अधिकारियों ने एक फतवा जारी किया है कि 24 जून को सभी पुलिस कर्मियों को अपने स्टेशन पर रिपोर्ट करनी होगी और एक शपथ पत्र पर दस्तख़त करने होंगे कि वे किसी आंदोलन में भाग नहीं लेंगे। इस आतंक की परिस्थिति में ऐसी खबर मिली है कि बहुत से पुलिस कर्मियों ने अपने मोबाइलों को बंद कर दिया है।

24 जून को रायपुर में प्रवेश करने वाली सभी गाड़ियों और रेलगाड़ियों में तलाशी ली गयी यह सुनिश्चित करने के लिये कि कोई भी पुलिस कर्मी की पत्नी प्रस्तावित रैली में भाग न ले। रैली वाले मैदान तक जाने वाली सड़कों को बंद कर दिया गया। ऐसी परिस्थिति के बावजूद, सैकड़ों पुलिस कर्मियों की पत्नियां मैदान में जमा हुईं और हिरासत में ली गयीं।

आंदोलनकारी पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों ने 11 बिन्दुओं का मांगपत्र पेश किया है। उन्होंने मांग की है कि उनके मूल वेतन ग्रेड को बढ़ाकर 2,800 रुपये किया जाये और उनके वर्दी, परिवहन व अन्य भत्तों में वृद्धि की जाये। उनके मांगपत्र में मुफ्त स्वास्थ्य सेवा, बेहतर आवास, साप्ताहिक अवकाश, आठ घंटे का कार्यकाल और ज्यादा काम करने पर ओवरटाइम भत्ते की मांगें शामिल हैं। उन्होंने यह भी मांग की है कि अगर वे ड्यूटी करते हुए मारे जाते हैं तो, पड़ोसी प्रांत मध्य प्रदेश की भांति, उनके परिवार को भरपाई राशि मिलनी चाहिये और परिवार के एक सदस्य की नौकरी सुनिश्चित होनी चाहिये।

पुलिस कर्मियों की बुरी परिस्थिति का अंदाजा आंदोलन के दौरान दिये इन तथ्यों से लगाया जा सकता है। उन्हें पौष्टिक आहार के लिये मासिक 100 रु. का भत्ता मिलता है। वर्दी के रखरखाव के लिये उन्हें मासिक 60 रु. और उपचार के लिये 200 रु. मिलते हैं। ड्यूटी के दौरान उन्हें यातायात के लिये उन्हें 25 से 30 रु. मिलता है। एक पुलिस कर्मी की पत्नी ने बताया कि अंग्रेजों के उपनिवेशवादी काल की सेवा शर्तें आज भी लागू हैं।

अपने देश में अधिकांश पुलिस कर्मी मज़दूरों और किसानों के परिवारों से आते हैं। उनके दिल में मज़दूरों और किसानों के प्रति सहानुभूति होती है। जो सत्ता में हैं, वो पुलिस कर्मियों को मज़दूरों और किसानों के जायज़ संघर्षों को दबाने के लिये इस्तेमाल करते हैं। पुलिस कर्मियों को अपने अधिकारों के लिये संगठित होने से वंचित रखा जाता है। जब वे अपने कष्टों के बारे में शिकायत करने की जुर्रत करते हैं, तब उन्हें दूसरे मेहनतकश लोगों की तरह ही दबाया जाता है।

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छत्तीसगढ़    chhattisgarh    Jul 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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