डूटा ने आन्दोलन फिर से शुरू किया

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने 2 जुलाई को संसद पर एक धरना आयोजित किया। इसके साथ, उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति की नकारात्मक नीति के खिलाफ और उच्च शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ अपने संघर्ष को फिर से जारी किया।

Duta dharna 2 Jul 2018 इससे पहले, दिल्ली विश्वविद्यालय और उससे सम्बंधित कालेजों के शिक्षकों ने 9 मई से 19 जून तक हड़ताल की थी. यह हड़ताल यू.जी.सी. द्वारा 5 मार्च को घोषित, शिक्षकों की नियुक्ति के लिए परिवर्तनों का विरोध करने और गिने-चुने कालेजों को स्वायत्तता देकर उच्च शिक्षा के निजीकरण के द्वार खोलने का विरोध करने के उद्देश्य से की गयी थी। आन्दोलन के दौरान शिक्षकों ने परीक्षा पत्रों को जांचने के काम का बहिष्कार किया था।

18 जून को शिक्षकों ने परीक्षा पत्रों को जांचने के काम का बहिष्कार रोक दिया था, जब उन्हें मानव संसाधन मंत्रालय से यह आश्वासन दिया गया कि आगामी सत्र में एड-होक शिक्षकों का तबादला नहीं किया जायेगा और उनकी दूसरी मांगों पर भी सरकार ध्यान देगी। डूटा ने यह घोषणा की थी कि वे 2 जुलाई को संसद पर एक विरोध प्रदर्शन करके अपना आन्दोलन फिर से जारी करेंगे।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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