भारतीय रेल के निजीकरण की दिशा में एक और क़दम

मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार भारतीय रेल के निजीकरण की दिशा में एक और कदम उठाने की योजना बना रही है, जबकि यह दावा करती जा रही है कि इसका निजीकरण कभी नहीं किया जाएगा। निगमीकरण और सार्वजनिक-निजी-साझेदारी का उपयोग हाल ही में भारतीय रेल के निजीकरण की दिशा में किया गया है। निगमीकरण के तहत, मौजूदा गतिविधि या संपत्ति को भारतीय रेल से अलग करके सार्वजनिक क्षेत्र की एक नई कंपनी को सौंपा जा सकता है। और बाद में सार्वजनिक क्षेत्र की नई कंपनी के शेयरों को एक-एक करके हिस्सों के रूप में पूंजीपतियों को बेचा जा सकता है।

भारतीय रेल के पास 25,000 कि.मी. का विद्युतीकृत रेल मार्ग है। विद्युत इंजन रेल मार्ग के साथ चल रहे पावर ट्रांसमिशन लाइनों से बिजली खींचते हैं। अब प्रस्ताव है कि एक अलग कंपनी को पावर ट्रांसमिषन लाइनों के इस पूरे नेटवर्क की मालिकी को स्थानांतरित किया जाए। इन लाइनों की मालिकी के लिए नई कंपनी द्वारा भारतीय रेल को 25000 करोड़ रुपये के संभावित भुगतान किए जाने की उम्मीद है। भारतीय रेल इन विद्युत लाइनों का उपयोग करने के लिए नई कंपनी को वार्षिक शुल्क का भुगतान करेगा।

कुछ समय बाद इस नई कंपनी के शेयर भी हिस्सों में दिए जाएंगे। भारतीय रेल में पहले से ही निगमीकृत शेयरों की बिक्री शुरू हो चुकी है। पिछले महीने ही भारतीय रेल की सलाहकार कंपनी आर.आई.टी.ई.एस. के शेयरों का एक हिस्सा बेचा गया था। इसी तरह, इस वित्तीय वर्ष के दौरान भारतीय रेल वित्त निगम (आई.आर.एफ.सी.) के शेयरों का एक हिस्सा बेचने का प्रस्ताव है। भारतीय रेल के लिए आवष्यक रेल इंजन, यात्रीगाड़ी के डिब्बे और मालगाड़ी के डिब्बे, आई.आर.एफ.सी. द्वारा खरीदे जाते हैं और इन्हें वह भारतीय रेल को उपयोग के लिए किराए पर देती है। 2016-17 के दौरान आई.आर.एफ.सी. ने 608 इंजनों, 2280 यात्रीगाड़ी के डिब्बों और 10,000 मालगाड़ी के डिब्बों की खरीदी की जिनकी क़ीमत 14,281 करोड़ रुपए है। मार्च 2017 के अंत तक, आई.आर.एफ.सी. ने 8,998 इंजनों, 47,825 यात्रीगाड़ी के डिब्बों और 2,14,456 मालगाड़ी के डिब्बों का अधिग्रहण किया जिनकी क़ीमत 1,51,319 करोड़ रुपए है। ये सभी रेल के डिब्बे और इंजन (चल संपत्ति) आई.आर.एफ.सी. की मालिकी में हैं न कि भारतीय रेल की मालिकी में। यदि आई.आर.एफ.सी. का निजीकरण किया जाता है तो ये सभी रेल के डिब्बे और इंजन निजी इकाई के नियंत्रण में होंगे। अब बिजली लाइनों का निगमीकरण करने के बाद, उसका निजीकरण करने का प्रस्ताव है। इसके बाद ट्रेनों को चलाने के लिए बिजली की आपूर्ति भी निजी हाथों में आ जाएगी।

सरकार यह दावा करके लोगों को गुमराह कर रही है कि इसमें केवल एक सार्वजनिक क्षेत्र से दूसरे सार्वजनिक क्षेत्र में कंपनी को स्थानांतरित कर रही है इसलिए निगमीकरण, निजीकरण नहीं है। सरकार इस कदम के पीछे के अपने असली इरादे को छिपा रही है जिसका मकसद भारतीय रेल का चुपचाप एक के बाद एक निजीकरण करना है।

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भारतीय रेल    निजीकरण    सार्वजनिक-निजी-साझेदारी    Aug 1-15 2018    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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