निजीकरण मज़दूर-विरोधी और समाज-विरोधी है

माडर्न फूड इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड और भारत अल्यूमिनियम लिमिटेड कंपनियों की जनवरी 2000 में बिक्री के बाद, एक के बाद एक सरकारों ने लगातार  सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को निजी इजारेदार कंपनियों को बेचने का रास्ता तेज़ी से अपनाया है। कांग्रेस पार्टी की सरकार ने अपने दस वर्षों के शासन में (2004-2014), 1,00,000 करोड़ रुपयों से ज्यादा की सार्वजनिक संपत्ति को निजी कंपनियों को बेचा। पिछले चार वर्षों में (2014-18), भाजपा सरकार ने करीब 2,00,000 करोड़ रुपयों की सार्वजनिक संपत्ति को बेचा है।

जब निजीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की गयी थी, तब लोगों को बताया गया था कि सिर्फ घाटे में चल रही इकाइयों को बेचा जा रहा है। सरकार के प्रवक्ताओं ने दावा किया था कि जो कंपनियां ”गैर-रणनैतिक“ क्षेत्र में हैं उन्हीं का निजीकरण किया जायेगा। यह भी घोषणा की गयी थी कि नवरत्न कंपनियों को ”कभी भी नहीं बेचा जायेगा“। ये सभी दावे झूठे साबित हुए हैं। इस झूठे प्रचार का मकसद इसके असली उद्देश्य को छुपाना था, जो है कि - इज़ारेदार पूंजीपतियों की लालच को जनता के धन से पूरा करना।

अब, अधिकांश आर्थिक क्षेत्रों में खुलेआम निजीकरण किया जा रहा है। कच्चे तेल और रक्षा उत्पादन सहित रणनैतिक क्षेत्र की कंपनियों को, पूरे या आंशिक तौर पर, बिक्री के लिये खोला जा रहा है। सरकार ने नवरत्न कंपनियों में से एक, ओ.एन.जी.सी. के 18 प्रतिशत शेयरों को बेचने की घोषणा की है। रक्षा उत्पादन क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बी.ई.एम.एल.) को बेचने के फैसले से शुरू हो गयी है।

भारतीय रेल का गुप्त रूप से और नियमित तौर पर निजीकरण किया जा रहा है। भारतीय रेल के सभी मुनाफ़ा बनाने योग्य उद्यमों को हिन्दोस्तानी और विदेशी कंपनियों को बेचा जा रहा है। सिर्फ पटरी के रख-रखाव का काम सरकार की मालिकी में रह जायेगा।

सरकार अनेक बैंकों और बीमा कंपनियों के अपने शेयर बेच रही है। बैंकों और बीमा कंपनियों को निजी इजारेदार कंपनियों के नियंत्रण में पूरी तरह सौंपने की दिशा में यह एक क़दम है। कोयला, लौह अयस्क व दूसरे खनिजों, कच्चे तेल के खण्डों, नदियों, झीलों और समुद्री तटों जैसे प्राकृतिक संसाधनों को अधिकतम लूट के लिये निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। सार्वजनिक स्कूलों व विश्वविद्यालयों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं को नष्ट किया जा रहा है ताकि इनको निजी मुनाफ़ाख़ोरी के लिये खोला जा सके। लोगों के धन से खोले गये स्कूलों को पी.पी.पी. मॉडल तहत निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है। सरकार ने सभी के लिये मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का अपना दायित्व खुल्लम-खुल्ला त्याग दिया है। मेहनतकश लोगों के बिगड़ती सेहत से अधिकतम मुनाफ़ा बनाने के लिये बीमा कंपनियों और निजी कारपोरेट अस्पतालों के लिये स्थान बनाया जा रहा है। पेयजल सप्लाई और शौच व्यवस्था जैसी नगरीय सेवाओं का निजीकरण किया जा रहा है। ऐसा ही बस यातायात तथा महामार्गों, हवाई अड्डों, गोदी व बंदरगाहों, इत्यादि से टोल टैक्स लेने के प्रबंधन को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।

निजीकरण के हर क़दम के बाद मज़दूरो की छंटनी की जाती है। अपने मुनाफ़ों को अधिकतम बनाने के लिये निजी मालिक मज़दूरों को ठेके पर लेते हैं और उनके सभी अधिकारों को देने से इंकार करते हैं।

निजीकरण सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों के मज़दूरों के लिये ही हानिकारक नहीं होता जिनका निजीकरण किया जा रहा है बल्कि यह पूरे समाज के हित के विपरीत है। जिससे कि करोड़ों ग़रीब लोग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल सप्लाई और बस यातायात जैसी ज़रूरी सेवाओं से वंचित हो जाते हैं। इससे आर्थिक शक्ति कुछ ही हाथों में चली जाती है और उत्पादक शक्तियों व सामाजिक संस्थानों का विनाश होता है।

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निजीकरण    मज़दूर-विरोधी    समाज-विरोधी है    Aug 16-31 2018    Voice of the Party    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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