हनुमानगढ़ जिले में किसान आंदोलन तेज़ हुआ

7 अगस्त, 2018 को रामगढ़ उपतहसील के किसानों ने दिल्ली-गंगानगर हाइवे का चक्का जाम किया। किसान यह क़दम उठाने को इसलिये मजबूर हुये, क्योंकि उनकी जायज़ मांगों को लेकर प्रशासन के साथ चल रही वार्ता संतोषजनक नतीजे पर नहीं पहुंची।

रामगढ़ उपतहसील के आप-पास के गांवों के 1350 किसान लगातार मांग करते आये हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत उनको मिलने वाले मुआवज़े का भुगतान किया जाये, लेकिन सरकार बहाने बनाकर किसानों को भुगतान का लाभ देने से वंचित कर रही है। जबकि किसान अपनी बीमा राशि की प्रीमियम लगातार भारतीय स्टेट बैंक में जमा करते आये हैं। जब किसानों ने बैंक से अपनी फ़सल खराबी के बाद  मुआवजे़ के भुगतान के लिये दावा किया तो बैंक पैसा देने से मुकर गया। भारतीय स्टेट बैंक और निजी बीमा कंपनी की मिली-भगत से किसानों के 8 से 10 करोड़ रुपये के मुआवजे़ के भुगतान को रोका गया है। किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार अपनी ज़िम्मेदारी मानकर तुरंत उनके मुआवजे़ का भुगतान करे।

Dharna front of Bank_9 Aug18 Dharna front of Bank_9 Aug18
Dharna front of Bank Dharna front of Bank
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26 जून को सैकड़ों किसानों ने भारतीय स्टेट बैंक की रामगढ़ शाखा का 24 घंटे के लिये घेराव किया। घेराव के दौरान प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता में प्रशासन ने यह माना कि किसानों की मांग जायज़ है। लिखित समझौता हुआ कि 26 जुलाई तक किसानों को मुआवजे़ का भुगतान कर दिया जायेगा।

27 जुलाई तक जब उन्हें भुगतान नहीं किया गया तो हजारों की संख्या में किसानों ने अखिल भारतीय किसान सभा के झंडे तले भारतीय स्टेट बैंक की रामगढ़ शाखा का अनिश्चितकालीन घेराव शुरू कर दिया। आंदोलन को मजबूत करने के लिये लोक राज संगठन सभी गांवों के किसानों को एक मंच पर लाने के लिये काम कर रहा है। इस घेराव में बड़ी संख्या में महिलायें हिस्सा ले रही हैं।

5 अगस्त को किसानों ने बैंक पर एक दिन के लिये ताला लगा दिया। जैसे-जैसे आंदोलन तेज़ हो रहा है, राजस्थान के अनेक इलाकों से यह ख़बर आ रही है कि वहां भी किसानों को बैंकों द्वारा मुआवजे़ की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। भूकरका में भारतीय स्टेट बैंक ने 500 किसानों को बीमा मुआवजे़ की राशि का भुगतान नहीं किया है। इसी तरह गोरखाना में 900 किसानों और गांधीबाड़ी में 800 किसानों को बीमा के मुआवजे़ से वंचित किया गया हैं।

किसानों ने फैसला किया है कि

9 अगस्त को उपतहसील रामगढ़ में जेलभरो आंदोलन चलायेंगे। अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती तो 13 अगस्त को नोहर में एस.डी.एम. का घेराव करेंगे।

पूरे इलाके में जिस तरह से बीमा राशि के मुआवजे़ का भुगतान न किये जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इससे जाहिर होता है कि निजी बीमा कंपनियों और बैंक की मिलीभगत से एक सोची-समझी साज़िश के तहत किसानों की इस बीमा राशि के मुआवजे़ का डकारा गया है। किसान समझ रहे हैं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सिर्फ निजी बीमा कंपनियों के मुनाफ़ों को बढ़ाने की योजना है न कि किसानों को राहत देने के लिये। जब किसानों को मुआवज़ा देने का वक्त आता है तो ये निजी बीमा कंपनियां कोई न कोई बहाना देकर भुगतान से इंकार कर देती हैं।

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Aug 16-31 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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