मुंबई महानगरीय रेल के चालकों और गार्डों ने हड़ताल की

मुंबई मध्य उपनगरीय रेल के चालकों की हड़ताल

10 अगस्त, 2018 को सुबह तड़के से मध्य रेल के सैकड़ों रेल चालकों ने निर्धारित समय सीमा से अधिक काम करने से इंकार कर दिया। इस हड़ताल का नेतृत्व रेल चालकों की संयुक्त यूनियन ने किया। हड़ताल की वजह से पूरे दिन सैकड़ों ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। सेंट्रल रेलवे मज़दूर संघ के द्वारा इस हड़ताल की अगुवाई की गयी, और जॉइंट एक्शन फोरम और अन्य सभी मोटर मेन ने इसका समर्थन किया। जॉइंट एक्शन फोरम में ए.आई.एल.आर.एस.ए, आर.के.एस, आल इंडिया एस.सी./एस.टी एसोसिएशन और ऑल इंडिया ओ.बी.सी. एसोसिएशन शामिल हैं।

AIGS guards convention-puriसभी रेल चालक अपने साथी-चालक को बर्ख़ास्त किये जाने का विरोध कर रहे थे, जिसने गलती से गाड़ी को सिग्नल से आगे रोका था। इस स्थिति को एस.पी.ए.डी.- सिग्नल पासिंग एट डेंजर, कहा जाता है। रेल चालकों ने बताया कि कुल 898 चालकों में से 227 चालकों की जगह रिक्त है जिनपर सरकार भर्ती करने से इंकार कर रही है और इस वजह से पूरे काम का बोझ 671 चालकों पर आ रहा है। जबकि मौजूदा चालक अधिक समय काम करते हुए इस अतिरिक्त बोझ को बर्दाश्त कर रहे हैं, फिर भी हर रोज 8 से 10 गाड़ियों को रद्द करना पड़ता है। एक गाड़ी के रद्द किये जाने से अगली गाड़ी पर 4000 अतिरिक्त यात्रियों का बोझ बढ़ जाता है। सामान्य स्थिति में यह वज़न 2000 यात्रियों का होता है। जबकि एक 12 कोच वाली गाड़ी की क्षमता 2000 यात्रियों की होती है, यात्रियों की अधिकता के समय यह गाड़ी 5000 यात्रियों से भरी होती है। इस तरह से यदि एक गाड़ी रद्द हो जाती है तो 2000 यात्रियों की क्षमता की अगली गाड़ी पर 9000 यात्रियों का वजन हो जाता है। उपनगरीय रेल में दुर्घटनाओं का यह सबसे बड़ा कारण है। 2017 में मध्य उपनगरीय रेल में भीड़ की वजह से गिर जाने से 654 यात्रियों की मौत हो गयी और 1434 यात्री घायल हो गए।

चालकों की भर्ती नहीं किये जाने की वजह से चालकों को भारी दबाव में काम करना पड़ रहा है जिससे अक्सर गाड़ी प्लेटफार्म से आगे निकल जाती है या सिग्नल छूट जाता है। यदि कोई चालक सिग्नल से आगे निकल जाता है तो, या तो उसको नौकरी से निकाल दिया जाता है या जबरदस्ती से उसे रिटायर कर दिया जाता है। रेल चालकों की हड़ताल ऐसे ही एक रेल चालक को बर्ख़ास्त किये जाने की वजह से फूट पड़ी है। सिग्नलों की संख्या बढ़ जाने, सिग्नल कम दूरी पर रखे जाने, अलग-अलग तरह के इ.एम.यू. रेक, गाड़ी को समय पर स्टेशन पर पहुंचाने के लिए अधिकारियों के दबाव और लोगों द्वारा रेल लाइन क्रासिंग की वजह से रेल चालकों पर पहले से ही काम का अत्यधिक बोझ है। इन सबकी वजह से कभी-कभी गाड़ी सिग्नल से आगे निकल जाती है। इन सबके अलावा चालकों की संख्या कम होने की वजह से उनको अधिक समय के लिए काम करना पड़ता है ताकि रेल सेवा चलती रहे।

इन सभी कारणों से 10 अगस्त को रेल चालकों ने हड़ताल कर दी। इस हड़ताल की वजह से रेल सेवा में बाधा आई और अधिकारियों को रेल चालक यूनियन से बातचीत करने पर मजबूर होना पड़ा है। अधिकारियों ने आष्वासन दिया कि बर्ख़ास्त किये गए रेल चालक को पुनः बहाल किया जायेगा। इसके अलावा यह आश्वासन भी दिया गया कि एस.पी.ए.डी. की वजह से किसी चालक को तुरंत निकाल नहीं दिया जायेगा। उन्होंने 48 रिक्त पदों को तुरंत भरे जाने का वादा किया और बाकि रिक्त पदों को भी जल्दी भरे जाने का वादा किया। अधिकारियों से मिले आष्वासन के बाद रेल चालकों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली।

मुंबई पश्चिम उपनगरीय रेल के गार्डों की हड़ताल

13 से 14 अगस्त 2018 के बीच मुंबई उपनगरीय पश्चिम रेल के सैकड़ों गार्डों ने समय सीमा से अधिक काम करने से इनकार कर दिया। मध्य रेल के चालकों की हड़ताल की तरह इनकी इस हड़ताल से हर रोज़ 30-40 गाड़ियों को रद्द किया गया। उनकी इस हड़ताल को पश्चिम रेल की सभी यूनियनों के जॉइंट फोरम ने अगुवाई दी। इस फोरम में ए.आई.जी.सी. डब्लू.आर.ई.यू., डब्ल्यू.आर.एम.एस., आर.के.एस., आल इंडिया एस.सी./एस.टी एसोसिएशन और आल इंडिया ओ.बी.सी. एसोसिएशन शामिल थे।

मुंबई उपनगरीय पश्चिम रेल में गार्डों की भारी कमी है। जबकि 500 गार्डों की ज़रूरत है लेकिन केवल 400 गार्डों  की नियुक्ति की गयी है! इसका मतलब 100 गार्ड कम हैं। इस कारण मौजूदा गार्ड पर भारी दबाव होता है, और उनको ज्यादा समय के लिए काम करना पड़ता है। इसकी वजह से उन्हें हड़ताल करनी पड़ी है। गार्ड के सभी यूनियनों की संयुक्त भूमिका को देखते हुए अधिकारी उनके साथ बातचीत करने को मजबूर हो गए और 17 अगस्त को उन्होंने सभी गार्डों की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

मजदूर एकता लहर मध्य और पश्चिम रेल के चालकों और गार्डों के इस संघर्ष को सलाम करती है और भारतीय रेल को बुलावा देती है कि उनकी सभी जायज़ मांगों को पूरा करें।

Tag:   

Share Everywhere

रेल के गार्डों की हड़ताल    Sep 1-15 2018    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

thumb

 

पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)