इस्राइली संसद द्वारा राष्ट्रीय-राज्य विधेयक पारित : नस्लभेद पर आधारित एक नीति

19 जुलाई 2018 को इस्राइल की संसद नेस्सेट ने राष्ट्रीय-राज्य या राष्ट्रीयता विधेयक पारित किया। संविधान की ही तरह यह एक बुनियादी कानून बन गया है, जो इस्राइल की कानूनी व्यवस्था का अभिन्न अंग होगा। अन्य साधारण कानूनों की तुलना में इसे बदलना बेहद कठिन होगा। यह कानून इस्राइल राज्य को यहूदी लोगों के लिए राष्ट्रीय-राज्य के रूप में परिभाषित करता है।

Demonstrators in Telaviv against Land Actइस कानून के पारित होने का विरोध न केवल इस्राइल के अरब लोगों और फिलिस्तीनी लोगों ने किया, बल्कि इस्राइल के तमाम तबकों के लोगों और दुनियाभर के लोगों ने किया है। तेल अविव में हजारों लाखों यहूदी, ईसाई, मुसलमान और ड्रूज़ समुदाय के लोगों ने सड़कों पर आकर इस कानून के प्रति अपना विरोध जाहिर किया।

प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर लिखा था “यदि हम भाई-भाई हैं, तो हम एक बराबर हैं” और “हमारी एकता ही हमारी ताक़त है - राष्ट्रीय-राज्य कानून हमारे बीच भेदभाव करता है”। उन्होंने बताया कि यह कानून बेहद ख़तरनाक तथा नस्लवादी है। यह नस्ल-भेद को एक कानूनी जामा पहनाता है। इस कानून के द्वारा इस्राइल में बसे अरब लोगों के साथ की जा रही गुनहगारी कार्यवाहियों को जायज़ करार दिया जा रहा है। इस कानून के आधार पर पश्चिमी तट पर गैरकानूनी कब्ज़े को भी जायज़़ बताया जायेगा। यह फिलिस्तीन व इस्राइल के दो राज्यों के सह-अस्तित्व पर चल रही चर्चा को हमेशा के लिए ख़त्म कर देगा।

इस कानून में खास तौर से तीन ऐसे बयान है जिनके चलते इस्राइल की अरब आबादी के ख़िलाफ़ भेदभाव को जायज़ बताया जा सकता है। यह कानून यहूदी बस्तियों के विस्तार और पश्चिमी तट पर अतिक्रमण को जायज़ करार देता है।

पहला बयान कहता है कि “इस्राइल में राष्ट्रीय आत्मनिर्धारण का अधिकार... केवल यहूदी लोगों पर ही लागू होता है।” दूसरा बयान, हीब्रू को इस्राइल की आधिकारिक भाषा का दर्ज़ा देता है और अरब इस्राइली लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा को केवल “विशेष दर्जे” की भाषा के निचले स्तर पर लाकर खड़ा करता है।

तीसरा बयान “यहूदी बस्तियों को राष्ट्रीय मूल्य” करार देता है और यह आदेश देता है कि राज्य “इनके निर्माण और विकास के लिए प्रोत्साहन देने की कोशिश करेगा”। इस बयान में येरूसलम को पूरी तरह से इस्राइल की राजधानी भी घोषित किया गया है।

जिस सांसद ने इस्राइली नेस्सेट में इस विधेयक का प्रस्ताव रखा उन्होंने बताया कि “हम इस विधेयक को अपने बुनियादी कानून में इसलिए शामिल कर रहे हैं ताकि कोई इसकी कल्पना भी न कर सके कि इस्राइल सभी नागरिकों का देश होगा और ऐसी कोशिश करना तो बहुत दूर की बात होगी।” इस बुनियादी कानून पर उठाये गए सवालों का उत्तर देते हुए उन्होंने इस्राइल के अरब लोगों से कहा “आप इस देश में ज्यादा से ज्यादा एक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक की तरह जी सकते हैं, जिनको बराबर के व्यक्तिगत अधिकार होंगे, लेकिन एक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक बतौर आपको बराबर के अधिकार हरगिज़ नहीं मिल सकते।”

फिलिस्तीनी लोगों और दुनियाभर के इंसाफ-पसंद लोगों ने फिलिस्तीनी लोगों की जन्मभूमि पर इस्राइली राज्य द्वारा गैरकानूनी कब्ज़े को, उनको जबरदस्ती से अपनी ज़मीन से बेदख़ल किये जाने को, और उन पर चलाये गए वहशी आतंक को कभी भी स्वीकार नहीं किया है। इस जाउनवादी यहूदी राज्य का निर्माण हथियारबंद हमले, कत्लेआम, नस्लवादी सफाया और 7,50,000 से अधिक फिलिस्तीनी लोगों को बड़े ही बर्बर तरीके से अपनी जन्मभूमि से जबरदस्ती बेदख़ल किये जाने के आधार पर किया गया है। यह राज्य आज भी फिलिस्तीन-विरोधी अरब-विरोधी नीति पर चलता आ रहा है। वह फिलिस्तीनी लोगों को उनकी जन्मभूमि से वंचित कर रहा है। अलग-अलग तरीकों से यह सुनिश्चित कर रहा है कि फिलिस्तीनी लोगों को उनके राष्ट्रीय अधिकारों से वंचित रखा जाये।

इस्राइल के तमाम लोग - अरब और यहूदी, अपनी जिंदगी में शांति और सुरक्षा के लिए तड़प रहे हैं। यह नया कानून एक प्रतिगामी कदम है जो लोगों के बीच बंटवारा करने और एक दूसरे के साथ आपसी हित में सहयोग के साथ मिलकर जीने की तमाम संभावनाओं को ख़त्म करने के मकसद से बनाया गया है।

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राष्ट्रीय-राज्य विधेयक    नस्लभेद    Sep 1-15 2018    World/Geopolitics    Rights     War & Peace     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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