अमरीका में सैनिक परेड को रद्द किया गया : साम्राज्यवादी युद्ध के ख़िलाफ़ लोगों के बढ़ते गुस्से की एक झलक

16 अगस्त, 2018 को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि सेवानिवृत्त अमरीकी सैनिकों का सम्मान करने और प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी को मनाने के लिए जोर-शोर से 10 नवंबर को आयोजित की जाने वाली सेना की परेड को रद्द कर दिया गया है।

End US warsसी.एन.बी.सी. की रिपोर्ट के अनुसार, अमरीकी रक्षा विभाग और व्हाइट हाउस ने प्रस्ताव दिया था कि हजारों कार्यरत अमरीकी सैनिकों के साथ, लगभग आठ टैंक, ब्रैडली फाइटिंग वेहिकल्स और स्ट्राइकर्स जैसी बख्तरबंद गाड़ियां और हवाई सलामी देने वाले विभिन्न विमान इस पेरड में हिस्सा लेंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यात्रा की अनुमानित लागत 9.2 करोड़ डॉलर हो गई है जो व्हाइट हाउस द्वारा पहले बताई गई लागत की तुलना में तीन गुना अधिक है।

ऐसी रिपोर्ट मिली है कि इस ख़बर ने अमरीकी सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके संगठनों में बहुत गुस्सा और नाराजगी पैदा हो गयी थी। बहुत से लोगों ने वाशिंगटन डी.सी. की सड़कों पर प्रदर्शनात्मक परेड के इस भारी खर्चे के ख़िलाफ़ अपना गुस्सा व्यक्त किया है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा है कि अमरीकी प्रशासन इस पैसे को सेवानिवृत्त सैनिकों, कार्यरत सैनिकों और उनके परिवारों को अनिवार्य सेवाएं प्रदान करने पर खर्च करे। सेवानिवृत्त अमरीकी सैनिकों के संगठन के नेशनल कमांडर ऑफ अमेरिकन लीजन ने मीडिया को जारी अपने बयान में कहा कि “जब तक हम अपनी सेना को वापस नहीं ला सकेंगे, तब तक हम सोचते हैं कि परेड में होने खर्च को डिपार्टमेंट ऑफ वेटेरन अफेयर्स (सेवानिवृत्त सैनिकों के मामलों का विभाग) को देना चाहिये ताकि हमारे सैनिकों और उनके परिवारों की सर्वोत्तम देखभाल करने के लिये धन खर्च किया जा सके।”

इसके अलावा, बहुत से लोगों ने इस परेड के ख़िलाफ़ आवाज उठाई है। लगातार चलने वाले युद्धों और भारी सैन्य खर्चों का अमरीकी लोग कड़ा विरोध करना चाहते हैं। प्रस्तावित यात्रा के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर संगठित विपक्ष को बनाने के लिए ‘नो ट्रम्प मिलिट्री परेड‘ गठबंधन (ट्रम्प सैन्य यात्रा के ख़िलाफ़ गठबंधन) नियमित रूप से बैठक कर रहा था। हजारों हस्ताक्षर इकट्ठा करके 10 व 11 नवंबर को विभिन्न प्रदर्शन कार्यों के लिए लोगों के नाम लिखवाकर ‘नो ट्रम्प मिलिट्री परेड‘ आंदोलन की गति बना रहा था।

इस भारी विरोध को देखते हुए, अमरीकी रक्षा विभाग को यात्रा रद्द करने की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पेंटागन के एक प्रवक्ता ने घोषणा की है कि 10 नवंबर, 2018 का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है और इस कार्यक्रम के लिए एक वैकल्पिक तिथि 2019 में ढ़ूंढी जायेगी।

अमरीकी सेवानिवृत्त सैनिकों द्वारा विरोध के सामने सैन्य परेड को रद्द करना अमरीका और दुनिया भर में साम्राज्यवादी युद्ध के ख़िलाफ़ बढ़ती भावना की एक झलक है। यह अमरीकी लोगों का दुनिया भर में अमरीका के वैश्विक साम्राज्यवादी उद्देश्यों के लिए तोप का चारा बनने से इनकार करने का संकेत है। परेड का रद्द कर देना, मज़दूर वर्ग और लोगों के श्रम द्वारा उत्पादित धन और बहुमूल्य संसाधनों को तेज़ी से बड़े इजारेदारों के अधिक मुनाफ़े के हित में और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अमरीकी साम्राज्यवाद की विरासत को स्थापित करने के लिए विनाशकारी युद्धों के लिए इस्तेमाल करने के ख़िलाफ़ लोगों के बीच बढ़ते गुस्से की झलक है।

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सैनिक परेड    प्रथम विश्व युद्ध    Sep 1-15 2018    World/Geopolitics    Rights     War & Peace     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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