अप्रत्याशित बाढ़ ने केरल के लोगों को तबाह कर दिया है

केरल के लोग बेहद कठिन समय से गुजर रहे हैं।

पूरे राज्य में अप्रत्याशित बाढ़ के कारण 21 अगस्त तक 400 से अधिक लोगों की मौत हुई है। 10 लाख से अधिक पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को अपने घर छोड़कर, राज्य में स्थापित लगभग 6000 राहत शिविरों में से नजदीकी के किसी एक  शिविर में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। मानव जीवन और संपत्ति का विनाश बहुत ही विशाल स्तर पर हुआ है। लाखों घर तबाह हो गए हैं, बुरी तरह टूट गए हैं। राज्य में हजारों किलोमीटर की सड़कें और राजमार्ग नष्ट हो गये हैं।

Kerala-floodsराज्य की दर्जनों नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश के कारण अधिकांश बांधो में पानी का स्तर ख़तरे के निशान तक पहुंचा गया था। 42 बांधों में से 34 के जल द्वार (स्लूस गेट) खोले जाने पड़े, जिसके कारण इन नदियों के किनारे भारी बाढ़ आ गई थी। कई नदियों की दिषा बदलने के कारण विनाश का क्षेत्र बहुत अधिक बढ़ गया।

दुख की इस घड़ी में, केरल के लोगों ने अभूतपूर्व वीरता दिखायी है। अपनी जान को जोखिम में डालकर, हर तबके के लोग, सेना और नौसेना कर्मियों और अन्य राज्य अधिकारियों के साथ बचाव और राहत कार्यों में शामिल हो गए। केरल के मछुआरे दिन-रात काम करते रहे हैं, अपनी नावों को बाढ़ के पानी में ले जाकर घरों में फंसे लोगों को बचने के लिए। राहत शिविरों में, स्वैच्छिक राहत कार्यकर्ता प्रभावित लोगों की देखभाल करने के लिए अथक रूप से काम कर रहे हैं।

देश के अन्य क्षेत्रों के लोगों ने भी इस कठिन समय में केरल के लोगों को मदद का हाथ बढ़ाया है। वे पैसा, भोजन, कपड़े, दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं भेज रहे हैं।

अब जब बाढ़ का पानी घटने लगा है, महामारियां फूट पड़ने की बहुत संभावना है। राहत शिविरों में लोगों को पानी से उत्पन्न महामारियों से सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपायों के साथ डॉक्टर आगे आए हैं।

अब समय यह सुनिश्चित करने का है कि लोगों के जीवन को सुरक्षित रखने और उनको राहत पहुंचाने के कार्य पर पूरा ज़ोर दिया जाए। जल्द ही पुनर्वास की बड़ी चुनौती और लोगों के बिखरे हुए जीवन को फिर से सामान्य बनाने में मदद करने के कार्य शुरू करने होंगे। इस प्रश्न पर ध्यान देने की भी तत्काल ज़रूरत है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस तरह की विनाशकारी बाढ़ें क्यों बढ़ रहीं हैं, और उन्हें रोकने के लिए किन क़दमों की आवश्यकता है।

इस वक्त समस्याओं के हल करने के लिये लोगों की एकता को मजबूत करने की आवश्यकता है। कुछ बुरे इरादे रखने वाले लोग जानबूझकर सोशल मीडिया के माध्यम से झूठ और अफवाहें फैला रहे हैं, पीड़ित लोगों के बीच फूट डाल रहे हैं और राहत और पुनर्वास के काम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। इन लोगों का पर्दाफाश करना होगा और इसकी निंदा करनी होगी।

मज़दूर एकता लहर उन लोगों को दिल से सहानुभूति व्यक्त करता है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है, और उन लाखों लोगों को, जिन्होंने सबकुछ खो दिया है और अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में जाने के लिए मजबूर हुए हैं। मज़दूर एकता लहर उन निःस्वार्थ लोगों की प्रशंसा करता है जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए, अपनी सारी शक्ति बचाव और राहत कार्यों में डाल दी है।

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Sep 1-15 2018    Political-Economy    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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