विकास - किसके लिए?

संपादक महोदय, आजकल मीडिया में बहुत चर्चा चल रही है कि क्या कांग्रेस की सरकार में सकल घरेलू उत्पाद की गति तेज़ थी या भाजपा के राज में। मेरे ख़याल में यह बहस पूरी तरह से लोगों को भटकाने के लिए चलायी जा रही है। पूंजीवादी विकास चाहे एक-अंक का हो या डबल-अंक का, इससे मज़दूरों और किसानों को कोई फायदा नहीं होता है। 

पूरे देश की दौलत पैदा करने के लिए जो लोग कड़ी मेहनत करते हैं वे गरीब ही रह जाते हैं, और कुछ तो पहले से भी अधिक गरीब और असहाय बन जाते है। पूंजीवादी विकास केवल चंद मुट्ठीभर लोगों की दौलत और खुशहाली को बढ़ाता है और उसका विस्तार करता है, जिनकी अगुवाई टाटा, बिरला, अंबानी और अन्य इजारेदार घराने करते हैं।

12 अगस्त को कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समीति द्वारा जारी बयान “मज़दूरों-किसानों को हिन्दोस्तान का हुक्मरान बनने के लिए संगठित होना होगा!” में यह बताया गया है कि

“जब तक सामाजिक उत्पादन के साधन मुट्ठीभर लालची पूंजीपतियों की निजी संपत्ति बने रहेंगे, तब तक आर्थिक विकास से बहुसंख्य लोगों की ज़रूरतें पूरी नहीं होंगी। पूंजीवादी विकास सभी को रोज़गार नहीं दिला सकता है। पूंजीवाद मज़दूरों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने लायक वेतन नहीं दे सकता है। यह किसानों को रोज़ी-रोटी की सुरक्षा नहीं दे सकता है। आज पूंजीवाद जिस चरण पर खड़ा है, वह बार-बार केवल संकट ही पैदा कर सकता है, जिससे उत्पादक शक्तियों की मौत और बर्बादी होती रहती है।”

कांग्रेस और भाजपा के वक्ताओं के बीच सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में बढ़ोतरी को लेकर जो बहस चल रही है वह न केवल भटकाने वाली बहस है, बल्कि अर्थशास्त्र के सिद्धांत के मायने में भी गलत है। हमारे देश में पूंजीवादी विकास की गति केवल किसी एक पार्टी के सत्ता में होने, या न होने पर निर्भर नहीं होती है। इसके लिए कई कारक है जिसमें विष्व अर्थव्यवस्था की हालत, और हिन्दोस्तान में पूंजी निवेश व उपभोग की वस्तुओं की मांग शामिल हैं।

जहां तक हमारे देश के मज़दूरों, किसानों, और अन्य मेहनतकश लोगों का सवाल है, मसला जी.डी.पी. को अधिकतम बनाने का बिल्कुल भी नहीं है। असली मसला है कि अर्थव्यवस्था को लोगों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में मोड़ना, न कि पूंजीवादी लालच को पूरा करना। असली मसला पूंजीवादी विकास की गति को तेज़ करना नहीं है। असली मसला है कि एक समाजवादी अर्थव्यवस्था की बुनियाद डालना जिसका विकास सभी के लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

आपका

एस. उदयन, गुरुग्राम, हरियाणा

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विकास    पूंजीवादी विकास    Sep 1-15 2018    Letters to Editor    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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