राजस्थान : हनुमानगढ़ जिले के किसानों की शानदार जीत

फसल बीमा के मुआवज़े के लिये किसानों द्वारा चलाये जा रहे लंबे संघर्ष में 1 सितंबर, 2018 को शानदार जीत मिली। इस पर किसान नेताओं और उपखंड जिला अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तथा बैंक अधिकारियों के बीच वार्ता हुई। जिसमें यह समझौता हुआ कि 10 दिन के भीतर, रामगढ़, गोरखाना और भुकरका के किसानों का फसल बीमा मुआवज़ा और बैंक खातों से काटा गया अतिरिक्त ब्याज उनके खातों में जमा कर दिया जायेगा।

27 जुलाई, 2018 से चल रहा महापड़ाव इस शानदार जीत के बाद, पूरे 36 दिन के लंबे संघर्ष के बाद समाप्त हुआ।

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महापड़ाव समाप्त करने से पहले, किसानों ने बैंक के बाहर सभा करके सभी को संघर्ष में जीत की बधाई दी। सभा को संबोधित करने वालों में शामिल थे - लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष बलावान पुनिया, पूर्व सरपंच उज्जलावास और सरपंच यूनियन के पूर्व अध्यक्ष ओम सहू, मनीराम लकेसर, डा. कृष्ण नोखवाल, मंगेस चैधरी, ओम सांगर, नथवानिया के पूर्व सरपंच साधूराम मेघवाल, भीलकी जाटान के पूर्व सरपंच धनपत राम नेहरा और मांगेराम बैरड़ आदि।

मई महीने से ही मज़दूर एकता लहर में लगातार रिपोर्ट किया जाता रहा है कि बैंकों और निजी बीमा कंपनियां मिलीभगत करके किसानों को फसल बीमा योजना के मुआवजे़ का भुगतान नहीं कर रही थीं। बीमा भुगतान के मुआवजे़ के लिये हनुमानगढ़ जिले की रामगढ़ उपतहसील की स्टेट बैंक शाखा पर यह संघर्ष चल रहा था। इस संघर्ष में तीन गांवों रामगढ़, गोरखाना और भुकरका के हजारों किसान हिस्सा ले रहे थे। केवल इन तीन गांवों के किसानों की ही राशि 15-20 करोड़ रुपये है।

सभा के बाद एक शानदार विजय जुलूस निकाला गया। यह विजय जुलूस 35 किलोमीटर का रास्ता तय करते हुये, गोगामेड़ी और भादरा से होता हुआ पूरे इलाके में घूमा।

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Victory March

यह शानदार जीत एक लंबे संघर्ष और संघर्ष की अनेक गतिविधियों से हुई, जिसकी शुरुआत 26 जून से होती है जब सैकड़ों किसानों ने भारतीय स्टेट बैंक की रामगढ़ शाखा का 24 घंटे के लिये घेराव किया गया। जिसमें बैंक प्रशासन व सरकारी अधिकारियों के बीच यह लिखित समझौता हुआ कि 26 जुलाई तक किसानों को मुआवजे़ का भुगतान कर दिया जायेगा। जब 27 जुलाई तक उन्हें भुगतान नहीं किया गया तो हजारों की संख्या में किसानों ने भारतीय स्टेट बैंक की रामगढ़ शाखा का अनिश्चितकालीन घेराव शुरू कर दिया।

5 अगस्त को किसानों ने बैंक पर एक दिन के लिये ताला लगा दिया। जैसे-जैसे रामगढ़ के किसानों का आंदोलन तेज़ हुआ, इलाके के अन्य गांवों के किसान भी इस आंदोलन में शामिल होने लगे। उनके साथ भी बैंक और बीमा कंपनियों ने मिलकर धोखाधड़ी की थी और बीमा राशि का भुगतान नहीं किया था।

9 अगस्त को जेल भरो आंदोलन चलाया गया। इस दौरान हजारों महिला और पुरुष किसानों ने गिरफ्तारियां दीं। 13 अगस्त को नोहर में एस.डी.एम. कोर्ट का घेराव करके धरना दिया गया। 20 अगस्त को दोपहर 2 बजे तक का समय प्रशासन को देने के बाद गंगानगर-दिल्ली महामार्ग का चक्का जाम किया गया। हजारों की संख्या में महिला और पुरुष किसान कड़ाके की धूप की परवाह किये बिना महामार्ग पर ही बैठ गये। किसानों ने वहीं पर चूल्हे बनाये और आंदोलनकारियों के लिये चाय-नाश्ता व रात का भोजन बनाया।

रामगढ़ उपतहसील के हजारों किसानों के मजबूत इरादे के सामने आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और उनकी मांगों को पूरा करना पड़ा। इस लंबे संघर्ष का प्रभाव पूरे राजस्थान में पड़ा है। हर जिले में किसान इस संघर्ष से प्रेरणा लेकर अपने अधिकारों के लिये एकजुट संघर्ष के रास्ते में आगे बढ़ रहे हैं।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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