हिन्दोस्तान-अमरीका 2-प्लस-2 समझौता देश-विरोधी है

संपादक महोदय,

हिन्दोस्तान-अमरीका 2-प्लस-2 समझौते पर जारी किये गये पार्टी के बयान को मैंने मज़दूर एकता लहर में पढ़ा। यह बयान बहुत साफ तरीके से लिखा गया है। बहुत ही आसानी से यह आम लोगों को भी समझ में आ जायेगा। सरकार द्वारा आम तौर पर यह झूठा प्रचार किया जाता है कि अमरीका एक अच्छा देश है जिसके साथ दोस्ती करनी चाहिये। लेकिन यह बयान अमरीकी साम्राज्यवाद के असली उद्देश्य को उजागर करता है और सरकारी प्रचार का पर्दाफ़ाश भी करता है। इसमें उदाहरणों के साथ समझाया गया है कि जिन देशों ने अमरीका के साथ सांझेदारी की, जैसे कि मिश्र और पाकिस्तान, उनको अमरीका ने बर्बाद कर दिया। उसने अपनी दादागिरी हर जगह जमाई हुई है और वह इसे और भी बढ़ा रहा है। जो भी देश उसकी दादागिरी को चुनौती देता है उसको वह बर्बादी का निशाना बनाता है।

लेमोआ जैसा समझौता अमरीकी सेना को हिन्दोस्तान में आने का मौका देता है। एक दूसरे समझौते के अनुसार ख़ुफिया एजेंसियों के साथ भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है। यह अपने देश के लोगों के लिये बहुत ख़तरनाक है क्योंकि ये सभी समझौते अमरीका को हमारे देश में दखलंदाज़ी बढ़ाने का मौका देते हैं। जब भी हिन्दोस्तानी सरकार अमरीका के मुताबिक चलने से इनकार करेगी तो अमरीका हमारे देश में अपनी एजेंसियों और उनके द्वारा पाले-पोसे गये हिन्दोस्तानी गुटों के ज़रिये अराजकता बढ़ा सकता है। हमारे शासक इस ख़तरे को नज़र अंदाज कर रहे हैं।

एशिया क्षेत्र में अमरीका अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहता है और इसीलिये वह हिन्दोस्तान के साथ सांठगांठ कर रहा है। हिन्दोस्तानी सरमायदार भी इस क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाना चाहते हैं और अपने साम्राज्यवादी मंसूबों को पूरा करना चाहते हैं। यह समझने की ज़रूरत है कि जब हिन्दोस्तान के सरमायदार दुनिया में अपना दबदबा बढ़ाते हैं तो दूसरे देशों के मज़दूरों के शोषण के ज़रिये अपने मुनाफ़े और बढ़ाते हैं। परन्तु इससे हिन्दोस्तानी मज़दूरों, किसानों और अन्य मेहनतकश लोगों के जीवन स्तर में कोई उन्नति नहीं होती है। बयान साफ़-साफ़ समझाता है कि यह अपने और इस क्षेत्र के लोगों के हितों के विपरीत है।

हम मज़दूरों और किसानों को मिलकर अपने संघर्ष को और तेज़ करना होगा तभी इजारेदार पूंजीपतियों के साथ-साथ साम्राज्यवाद भी हराया जा सकता है।

आपका पाठक

रोशन सिंह, बलिया, उत्तर प्रदेश

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2-प्लस-2 समझौते    Sep 16-30 2018    Letters to Editor    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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