रेल चालकों का अखिल भारतीय अधिवेशन

24-25 सितम्बर, 2018 को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) का 22वां द्विवार्षिक अधिवेशन राजस्थान के जोधुपर में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। सभा के पहले ए.आई.एल.आर.एस.ए. के अध्यक्ष एल. मोनी ने लाल झंडा फहराया। क्रांतिकारी नारे बुलंद किये गये। भारतीय रेल के सभी मंडलों से, महिला रेल चालकों समेत 2000 से ज्यादा रेल चालक और उनके परिवार इस अधिवेशन में शामिल हुये।

सभा के पंडाल को चारों तरफ से ए.आई.एल.आर.एस.ए. के लाल पताकाओं से सजाया गया था। रेल चालकों ने पंडाल के हर तरफ अपने-अपने मंडलों के बैनर लगा रखे थे।

अध्यक्ष मंडल में उपस्थित थे केन्द्रीय अध्यक्ष का. एल. मोनी, का. एन.बी. दत्ता, का. टी. हनुमैया, का. के.ए.एस. मनी और उपाध्यक्ष एम.पी. देव व का. आर.आर. भगत। का. तपन सेन, सीटू के महासचिव, ने सभा का उद्घाटन किया। उन्होंने रेल चालकों से आह्वान किया कि रेल चालक न सिर्फ अपनी मांगों के लिये बल्कि पूरे मज़दूर वर्ग की मांगों के लिये संघर्ष करें।

AILRSA BGM Jothpur AILRSA BGM Jothpur
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प्रारंभिक सार्वजनिक सत्र में का. शिव गोपाल मिश्र, महासचिव, आल इंडिया रेलवेमैंस फेडरेशन; का. एम. राघवैया, महासचिव, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन; का. गिरीराज सिंह, अध्यक्ष नेशनल फेडरेशन ऑफ पोस्टल इंप्लाईज़; का. मेघराज मीणा, महासचिव, डी.एल.सी.ई.यू.; का. सरफराज हुसैन, नेशनल मुवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम; का. ए.के. श्रीवास्तव, पूर्व महासचिव आल इंडिया गाड्र्स काउंसिल; का. बी.आर. सिंह, अध्यक्ष, आल इंडिया गाड्र्स काउंसिल; का. डी.एस. चंद्रात्रैय महासचिव आल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसियेशन; का. अब्दुल हकीम, लॉयर्स यूनियन और का. श्रीमती अनिमा धर ने सभा को संबोधित किया।

महासचिव का. एम.एन. प्रसाद ने अपनी रिपोर्ट पेश की। उन्होंने रेल चालकों के संघर्ष का वर्णन करते हुये बताया कि हमने अपनी मांगों को लेकर कई आंदोलन चलाये हैं। कई बार प्रदर्शन-धरने-भूख हड़ताल किये हैं। रेल मंत्री तथा रेल प्रशासन के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे हैं व प्रतिनिधिमंडल के रूप में अधिकारियों से मुलाकातें की हैं। परन्तु इसके बावजूद, रेल चालकों को न तो वेतन या रनिंग अलाउंस के मामले में इंसाफ मिला है और न ही रेलवे द्वारा रेल चालकों की मांगों को लेकर बिठायी गयी तमाम कमेटियों की सिफारिशों को लागू किया गया है। उन्होंने रेल चालकों से फरवरी 2019 में हड़ताल की तैयारी करने का आह्वान किया।

मंच पर बैठे प्रतिनिधियों ने अधिवेशन को संबोधित करते हुये भारतीय रेल में रेल चालकों की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इस बात की कड़ी निंदा की कि भारतीय रेल को टुकड़े-टुकड़े करके, निजी हाथों में बेचा जा रहा है। इस सिलसिले में उन्होंने बताया कि नये पदों को भरने के बजाय सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा काम पर लगाया जा रहा है जो कि सुरक्षा के लिये ख़तरा हो सकता है। ज्यादा से ज्यादा नौकरियां ठेके पर दी जा रही हैं और साल भर होने वाले कार्यों की आउटसोर्सिंग की जा रही है। रेलवे में शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश (एफ.डी.आई.) की इजाज़त दी गयी है। रेल पटरी, इंजन, कोच, रेलवे टेªनिंग स्कूल, रिहायशी कालोनी, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और भूमि, रेलवे फैक्ट्री आदि सभी को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। यानी राष्ट्र की इस विशाल जन परिवहन व्यवस्था को निजी पूंजीपतियों के मुनाफ़ों का स्रोत बना दिया जा रहा है। रेल कर्मियों पर भी इसका भारी असर पड़ रहा है और हमारे अधिकारों पर जबरदस्त हमला हो रहा है। वक्ताओं ने सभी रेल चालकों और अन्य कर्मियों से आह्वान किया कि वक्त आ गया है कि हम उठें, संगठित हों और देशभर में अपने संयुक्त संघर्षों को तेज़ी से आगे बढ़ायें।

ए.आई.एल.आर.एस.ए. के प्रतिनिधियों ने रेल चालकों की लम्बे समय से उठायी जा रही मांगों को दोहराया, जिनमें मुख्य हैं - बेसिक वेतन और टी.ए. की वृद्धि के अनुसार रनिंग अलाउंस में वृद्धि; 2016 के पूर्व के पेंशन भोगियों के बराबर पेंशन; एन.पी.एस. को रद्द करना, काम के घंटों और आराम की अवधि पर हाई पावर कमेटी की सिफारिशों को लागू करना, आदि। वक्ताओं ने रेलवे के निजीकरण तथा अलग-अलग कार्यों के आउटसोर्सिंग का विरोध किया।

प्रतिनिधिमंडल सत्र में 16 मंडलों के रेल चालकों सहित कोलकाता मेट्रो के चालकों ने हिस्सा लिया। सभी मंडलों से आये प्रतिनिधियों ने अपने काम की सराहना और आलोचना व आत्मआलोचना भी की। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दो सालों में उन्होंने पहले की 40 हजार की सदस्यता में 10 हजार नये सदस्यों का इज़ाफा किया है।

संगठन के नये पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। संगठन की ओर से कई अहम प्रस्ताव अपनाये गये, जिनमें मुख्य हैं - 25 अक्तूबर, 2018 तक रेल चालकों की मांगों पर एक विस्तृत पर्चा तैयार किया जायेगा; प्रधानमंत्री, रेलमंत्री, रेल अधिकारियों और सभी सांसदों को पत्र भेजे जायेंगे; अलग-अलग मंडलों के कर्मचारियों को हड़ताल के लिये लामबंध करने के उद्देश्य से नवम्बर और दिसम्बर में अधिवेशन किये जायेंगे; सभी इलाकों में ट्रेड यूनियनों और जन संगठनों का समर्थन जुटाने के कदम लिये जायेंगे; रनिंग अलाउंस और पेंशन में बराबरी के मुद्दों पर एक प्रतिनिधि मंडल रेल अधिकारियों से मीटिंग करेगा; सी.डब्ल्यू.सी. की अगली बैठक फरवरी 2019 में गाजियाबाद में होगी जिसमें हड़ताल का दिनांक तय किया जायेगा और उसके बाद एक केन्द्रीय रैली होगी।

24 सितम्बर को सभा के अंत में एक विशाल रैली आयोजित की गई, जिसमें रेल चालकों तथा उनके परिजनों ने पूरे जोश के साथ भाग लिया। रैली की आवाज़ पूरे जोधपुर शहर में फैल गयी। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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