मज़दूरों का सर्व हिन्द सम्मेलन : हुक्मरान पूंजीपति वर्ग की जन-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी नीतियों के खि़लाफ़ संघर्ष तेज़ करने का फैसला

28 सितम्बर, 2018 को ट्रेड यूनियनों, अन्य मज़दूर संगठनों और फेडरेशनों की अगुवाई में, नई दिल्ली के मावलंकर हाल में मज़दूरों का सर्व हिन्द सम्मेलन हुआ।

सम्मेलन में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों - रक्षा, बैंक, बीमा, रेलवे, सड़क परिवहन, जल परिवहन, पोर्ट एंड डॉक, तेल, ऊर्जा, टेलीकाम, खनन, स्टील, कोयला, जल परिवहन, बंदरगाह, भारी इंजीनियरिंग आदि - से जुड़ी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने उत्साह से हिस्सा लिया। इसके अलावा सम्मेलन में आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स तथा घरेलू कामगारों की यूनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

All India worker convention

सम्मेलन में एटक, सीटू, हिन्द मज़दूर सभा, ए.आई.यू.टी.यू.सी., इंटक, टी.यू.सी.सी. ए.आई.सी.सी.टी.यू., यू.टी.यू.सी., एल.पी.एफ., सेवा और मज़दूर एकता कमेटी सहित अन्य यूनियनें भी उपस्थित थीं।

मावलंकर हाल परिसर लाल झंडों और मांगों के नारों के बैनरों से सजा हुआ था। सम्मेलन हॉल यूनियनों के प्रतिनिधियों से खचाखच भरा हुआ था।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने पूंजीपति वर्ग के निजीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम की ज़ोरदार निंदा की। उन्होंने कहा कि पूंजीपतियों के इस कार्यक्रम का परिणाम हुआ है कि आज देश में सार्वजनिक बैंकों, सरकारी बीमा कंपनियों, रेलवे, रक्षा सामग्री उत्पादन करखानों के अलावा ऊर्जा, टेलीकाम, धातु, खनन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सड़क, वायु और जल परिवहन, पोर्ट एंड डॉक जैसे उद्योगों की महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण तेज़ी से हो रहा है। निजीकरण के कार्यक्रम के फलस्वरूप पैदा हुए संकटों को हल करने के नाम पर सरकार देश के मज़दूरों और किसानों की रोज़ी-रोटी और अधिकारों पर तेज़ी से हमले कर रही है।

लेकिन मज़दूर वर्ग इन हमलों के खि़लाफ़ बेखौफ खड़ा है और एकजुटता के साथ लड़ रहा है। वह इन मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों के खि़लाफ़ डटकर सड़कों पर संघर्ष कर रहा है। अपने अधिकारों पर बढ़ते हमलों के खि़लाफ़ मज़दूरों ने 9-10-11 नवम्बर, 2017 को दिल्ली में तीन दिन का महापड़ाव आयोजित किया था। स्कीम वर्कर्स ने 17 जनवरी, 2018 को सर्व हिन्द हड़ताल की थी। इन्हीं स्कीम वर्कर्स द्वारा अलग-अलग तिथियों पर 23 जनवरी से 13 फरवरी तक लगभग सभी राज्यों में सत्याग्रह और विरोध प्रदर्शन किए गए। इस संदर्भ में वक्ताओं ने 2 सितम्बर, 2015 व 5 सितम्बर, 2016 को हुई सर्व हिन्द सफल हड़ताल का जिक्र भी किया।

सम्मेलन को संबोधित करने वालों में थे - एटक से अमरजीत कौर, सीटू से तपन सेन, हिन्द मज़दूर सभा से हरभजन सिंह सिद्धू, ए.आई.यू.टी.यू.सी. से सत्यवान, इंटक से डी. संजीवा रेड्डी, टी.यू.सी.सी. से जी. देवराजन, ए.आई.सी.सी.टी.यू. से राजीव डिमरी, यू.टी.यू.सी. से अशोक घोष, एल.पी.एफ. से के. नटराजन, सेवा से सोनिया जार्ज, एन.एफ.आई.आर. से शिव गोपाल मिश्रा आदि।

ठेकेदारी ख़त्म करने, समान काम का समान वेतन और सुविधा देने, न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए देने, बोनस-ईपीएफ पर सीलिंग को ख़त्म करने, ग्रेज्युटी की मात्रा बढ़ाने, सभी को पेंशन देने, 45 दिन के अंदर ट्रेड यूनियन को पंजीकृत करने, आईएलओ के 1987 व 1998 में हुये कनवेंशनों के प्रस्तावों का अनुमोदन करने, श्रम कानूनों में मज़दूर-विरोधी बदलावों को बंद करने, आदि मांगों को लेकर सम्मेलन ने 8-9 जनवरी, 2019 को दो दिन की देशव्यापी हड़ताल करने का एकमत से फैसला किया। इसकी तैयारी के मद्देनज़र निम्नलिखित कार्यक्रम को स्वीकार किया गया।

  • अक्तूबर/नवम्बर 2018 के दरम्यान राज्य, जिला और उद्योग/क्षेत्र के स्तर पर संयुक्त सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा।
  • नवम्बर-दिसम्बर, 2018 के दरम्यान उद्योग-स्तर पर संयुक्त तरीके से सभाओं और रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
  • 17-22 दिसम्बर, 2018 के दरम्यान प्रदर्शन करते हुए हड़ताल का नोटिस दिया जायेगा।
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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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