पीटीआई मज़दूरों के निकाले जाने के खि़लाफ़ प्रदर्शन

29 सितंबर को, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई), हिन्दोस्तान की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी ने पूरे देशभर से 297 मज़दूरों को नौकरी से बर्ख़ास्त कर दिया। इस क़दम को जायज़ ठहराते हुए पीटीआई के प्रबंधन ने अपनी सफाई में यह कहा कि जो मज़दूर नौकरी से निकाले गए हैं, जैसे कि ट्रांसमिशन पर्यवेक्षक, इंजीनियर, सहायक और चपरासी, उन सभी की अब कोई ज़रूरत नहीं है और अब उन्हें काम पर रखना “आर्थिक हित” में नहीं है।

मज़दूरों को जिस तरह बड़ी ही बेरहमी से नौकरी से निकाला गया, उससे स्पष्ट होता है कि यह पहले से सोची-समझी योजना थी। यह बताया गया है कि निष्कासन पत्र मज़दूरों के घर भेज दिये गए थे और उन पत्रों की एक कापी सभी मज़दूरों के काम करने की जगहों पर रखी गई थी। पीटीआई का दावा है कि मज़दूरों की बकाया राशि सीधे उनके व्यक्तिगत बैंक खातों में जमा कर दी गई है।

PTI protest

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया को हिन्दोस्तान की सबसे सर्वोच्च समाचार एजेंसी माना जाता है। यह देश के सर्वोच्च मीडिया घरानों के मालिकों के एक निर्वाचित बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा चलाया जाता है। पीटीआई 500 अख़बारों की एक गैर-लाभकारी कॉपरेटिव संस्था है, जिसे 1947 में स्थापित किया गया था। पीटीआई में तकरीबन 1,000 पत्रकार काम करते हैं और इसका दावा है कि यह देश के समाचार एजेंसी बाज़ार के 90 प्रतिषत से अधिक हिस्से तक फैला है। पीटीआई बोर्ड के नए अध्यक्ष के सेवा में आने के तुरंत बाद उन मज़दूरों को नौकरी से निकालने के निर्णय को घोषित किया गया।

पूरे देश में मीडिया मज़दूरों ने पीटीआई मज़दूरों के निकाले जाने के विरोध में प्रदर्शन किये हैं तथा इसकी निंदा करते हुए बयान जारी किए हैं। पीटीआई के मज़दूरों की यूनियनों और अन्य पत्रकारों के संगठनों ने 1 अक्तूबर को देशभर में पीटीआई केन्द्रों के सामने दिनभर का धरना आयोजित किया। दिल्ली में संसद मार्ग पर स्थित पीटीआई के मुख्यालय पर भी इस बड़े पैमाने पर की गई छंटनी का विरोध किया गया। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आई.एफ.जे.) और उसके सहयोगी नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) और इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (आई.जे.यू.) ने पीटीआई मज़दूरों के निकाले जाने की निंदा करते हुए इस क़दम को “मज़दूर-विरोधी” तथा “मीडिया-विरोधी” बताया है। उन्होंने मांग की है कि छंटनी के निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए और सामूहिक बर्ख़ास्तगी के इस फैसले की विस्तृत जांच की जाये। उन्होंने पीटीआई कर्मचारियों और उनकी यूनियन के साथ प्रबंधन द्वारा बातचीत शुरू करने की मांग की है।

आई.जे.यू. द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि: “जिस तरह से मज़दूरों को निकाल देने के नोटिस को ‘तुरंत लागू’ करके सेवा से बर्खास्त किया गया और मज़दूरों की डेस्क पर छंटनी पत्र रखकर या वेबसाइट पर डालकर, जो तरीका अपनाया गया वह पूरी तरह से अनैतिक, असाधारण और कपटी था। आई.जे.यू. के नेताओं ने चिंता व्यक्त की और बताया कि प्रबंधन द्वारा वेज बोर्ड के तहत आने वाले स्थायी मज़दूरों को निकालने के पीछे दो मकसद हैं। एक तो मीडिया क्षेत्र में ट्रेड यूनियन आंदोलन को कमज़ोर करना और दूसरा स्थायी मज़दूरों की जगह पर ठेका मज़दूरों को रखना ताकि इन ठेका मज़दूरों को जब चाहे ‘रखने व निकलने’ की उनके पास खुली छूट हो तथा कानूनी तौर से प्राप्त रोज़गार सुरक्षा की गारंटी को भी नज़रंदाज़ किया जा सके।”

मीडिया मज़दूरों की आजीविका पर होने वाले हमलों की श्रृंखला में, पीटीआई मज़दूरों की बर्ख़ास्तगी, यह सबसे नया हमला है।

पिछले दो सालों से हिन्दोस्तानी मीडिया घराने बड़े पैमाने पर पत्रकारों की छंटनी करते आ रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स, एनडीटीवी और द टेलीग्राफ (आनंद बाज़ार पत्रिका) जैसे बड़े मीडिया घरानों ने 2000 से अधिक पत्रकारों की छंटनी की है।

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पीटीआई    खि़लाफ़ प्रदर्शन    Oct 16-31 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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