मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों पर पुलिस का बर्बर हमला

20 सितंबर की आधी रात को, मणिपुर पुलिस ने मणिपुर विश्वविद्यालय के परिसर में कई छात्रों के छात्रावासों और शिक्षकों के घरों पर छापे मारे। इस दौरान विश्वविद्यालय के कई छात्र घायल हो गए और परिसर में आतंक का वातावरण बन गया। छापे के दौरान 6 शिक्षकों और 89 छात्रों को गिरफ़्तार किया गया। जबकि अदालत के आदेश पर इनमें से 82 छात्रों को अगले दिन रिहा कर दिया गया, लेकिन 7 छात्रों और सभी 6 शिक्षकों को 15 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। बाद में उप-कुलपति ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि सभी 6 शिक्षकों को उनकी गिरफ़्तारी के बाद निलंबित कर दिया गया है।

31 मई से मणिपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (एम.यू.एस.यू.) के नेतृत्व में मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्र कुलपति के विभिन्न भ्रष्टाचारों के विरोध में हड़ताल पर थे। मणिपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (एम.यू.टी.ए.) और मणिपुर यूनिवर्सिटी स्टाफ एसोसिएशन (एम.यू.एस.ए.) ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया था। विश्वविद्यालय लगभग 85 दिनों तक बंद रहा। आंदोलन के दौरान, पुलिस और अधिकारियों ने हड़ताल में शामिल छात्रों और कर्मचारियों पर बार-बार हमला किया और उन्हें प्रताड़ित किया।

Manipur university agitation

मणिपुर विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। राज्य सरकार और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एम.एच.आर.डी.) के साथ हुये एक समझौते के बाद से 18 अगस्त को हड़ताल को स्थगित कर दिया गया। छात्रों को आश्वासन दिया गया कि कुलपति को एक महीने की छुट्टी पर भेजा जायेगा और उस दौरान उन पर लगाए गए सभी आरोपों की जांच करने के लिए एक आयोग गठित किया जाएगा। लेकिन काम पर वापस लौटते ही कुलपति ने 1 सितम्बर को मणिपुर की उच्च अदालत में 18 अगस्त को किये गये समझौते के खि़लाफ़ याचिका दायर कर दी। एम.यू.एस.यू. ने फिर से हड़ताल शुरू कर दी है, जिसके बाद 17 सितम्बर को एम.एच.आर.डी. ने कुलपति को निलंबित करते हुए उनकी जगह एक उप-कुलपति को विश्वविद्यालय का प्रभारी बनाया है।

बाद में छात्रों और शिक्षकों ने यह आरोप लगाया है कि उप-कुलपति और रजिस्ट्रार उन सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास कर रहे थे जो पूर्व कुलपति को दोषी साबित कर सकते थे। इन सबके बीच जब छात्र अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे तो पुलिस ने छापे मारे, जिससे छात्रों के बीच डर और तनाव पैदा हो गया।

मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों पर पुलिस का हमला, देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्रों और शिक्षकों पर राज्य के बढ़ते ऐसे कई हमलों के सिलसिले का एक हिस्सा है। पूरे देश में छात्र और शिक्षक उच्च शिक्षा का तेज़ी से निजीकरण करने के लिए राज्य के बढ़ते प्रयासों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि निजीकरण के परिणामस्वरूप सीटों की कमी, फीस में बढ़ोतरी तथा उच्च शिक्षा को अधिकतम युवाओं की आर्थिक क्षमता से दूर रखा जा रहा है। वे अधिकारियों के उन प्रयासों का विरोध करते आ रहे हैं जिनके तहत छात्रों को, उनकी मांगों के समर्थन में खड़े होने से तथा राज्य द्वारा लोगों पर किए गए अत्याचारों और अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने से, रोका जा रहा है। विशेष रूप से मणिपुर में, आफ्सपा और अन्य काले कानूनों की आड़ में राज्य तथा सेना द्वारा की गयी क्रूरताओं को बेनकाब करने के लिए छात्रों और शिक्षकों ने हमेशा ही संगठित होकर, इन काले कानूनों की कड़ी निंदा की है। छात्रों और शिक्षकों पर किये गए इन हमलों का लक्ष्य है राज्य के अत्याचारों के ख़िलाफ़ तथा लोगों के अधिकार के लिए उठाए गए आंदोलनों को कुचलना।

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मणिपुर विश्वविद्यालय    पुलिस का बर्बर हमला    Oct 16-31 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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