हरियाणा रोडवेज़ के निजीकरण के खि़लाफ़ मज़दूरों का संघर्ष

रोडवेज़ कर्मचारी तालमेल एक्शन कमेटी की अगुवाई में, 16 अक्तूबर से चल रही हड़ताल, हरियाणा-चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद, आंशिक तौर पर 2 नवम्बर को ख़त्म हो गया। यह हड़ताल सरकार द्वारा प्रस्तावित निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर की गई थी।

Haryana roadways.1 नवम्बर, 2018 को हरियाणा-चंडीगढ़ उच्च न्यायालय ने हड़ताल का संज्ञान लेकर सुनवाई की। न्यायालय द्वारा गिरफ़्तार नेताओं को रिहा करने व हड़ताल पर उतरे मज़दूरों पर एस्मा के तहत कानूनी कार्यवाही न करने का आश्वासन दिए जाने के बाद, हड़ताल को ख़त्म किया गया। न्यायालय ने रोडवेज़ कर्मचारी तालमेल एक्शन कमेटी और सरकार को 12 नवम्बर को बैठक करके मुद्दों को निपटाने का सुझाव दिया। न्यायालय का यह भी कहना है कि वह रोडवेज़ कर्मचारियों की समस्या को सुनने के लिए तैयार है।

यह हड़ताल 18 दिन तक चली। हरियाणा परिवहन निगम में आज तक की हुई हड़तालों में सबसे लंबी है। 1979 में 11 दिन की हड़ताल हुई थी। 16 अक्तूबर, 2018 से पहले कई बार, यूनियनों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर सांकेतिक हड़ताल करके अपने गुस्से का इजहार किया था। लेकिन सरकार अपने फैसले पर अड़ी रही। चल रही हड़ताल 22 अक्तूबर के बाद से अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील हो गयी। राज्य के अन्य विभागों की मज़दूर यूनियनों ने इस संघर्ष के समर्थन में प्रदर्शन किये और हड़तालें कीं। सरकार के इस जन-विरोधी क़दम के खि़लाफ़ चल रहे संघर्ष को किसानों का भारी समर्थन मिला है।

ज्ञात रहे कि हरियाणा सरकार किलोमीटर स्कीम के तहत, महंगी दर पर 700 प्राइवेट बसें किराये पर चलाने की कोशिश कर रही है। यूनियनों का कहना है कि डिपो में ड्राइवरों की कमी के चलते, लगभग 500 सरकारी बसें खड़ी जंग खा रही हैं। उनका कहना है कि प्राइवेट बसें किराये पर लेने की बजाय, इन 500 बसों को क्यों नहीं चलाया जा रहा है।

हरियाणा सार्वजनिक परिवहन निगम के निजीकरण के खि़लाफ़ यहां की यूनियनें संयुक्त रूप से लंबे समय से डटकर संघर्ष कर रही हैं। इस संघर्ष के चलते, 13 जून, 2017 को सरकार को यूनियन के साथ हुए समझौते में, प्राइवेट परिवहन नीति 2016-17 को वापस लेना पड़ा। इसके अलावा, 27 दिसम्बर, 2017 को सरकार को कर्मचारियों की 16 सूत्रीय मांगों पर समझौता करना पड़ा था। ये मांगें थीं - वर्कषाप में पक्की भर्ती करना, ड्राइवरों की भर्ती करना, सरकारी बसों का बेड़ा बढ़ाना, साल 1979 से 2002 तक भर्ती सभी कर्मचारियों को पक्का करना, सभी श्रेणियों के खाली पदों को पदोन्नति द्वारा भरना, आदि। लेकिन इस समझौते को आज तक लागू नहीं किया गया है।

हर एक राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था लोगों के धन से खड़ी की गई है। राज्य का दायित्व है कि लोगों को कुशल, विश्वसनीय और पर्यावरण के अनुकूल, उचित मूल्य पर आधुनिक परिवहन सेवाएं प्रदान करना। लेकिन राज्य अपने इस दायित्व से इनकार कर रहा है। सरकारें, इन संस्थानों को पूंजीपतियों के हवाले करने की कोशिश कर रही हैं, ताकि पूंजीपति परिवहन सेवाओं के बदले, लोगों से ज्यादा वसूली करके मुनाफ़ा कमा सकें। मज़दूर-किसान इसका विरोध कर रहे हैं।

सार्वजनिक परिवहन निगम का निजीकरण एक जन-विरोधी क़दम है। सरकार द्वारा प्रस्तावित निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर इस लंबे बहादुरना संघर्ष के लिए रोडवेज़ कर्मचारी तालमेल एक्शन कमेटी बधाई की पात्र है।

Tag:   

Share Everywhere

हरियाणा रोडवेज़    निजीकरण    मज़दूरों का संघर्ष    Nov 16-30 2018    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)