बदरपुर थर्मल पावर स्टेशन के ठेका श्रमिकों की रैली

8 नवम्बर, 2018 को बदरपुर थर्मल पावर स्टेशन (बी.टी.पी.एस.) के ठेका श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर मज़दूर एकता कमेटी की अगुवाई में मंडी हाउस से लेकर संसद मार्ग तक रैली की।

इनकी मांग है कि बी.टी.पी.एस. को बंद करने का नोटिस और पर्याप्त मुआवज़ा दिया जाए, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र में वैकल्पिक रोज़गार देकर उनका पुनर्वास किया जाए, सभी देय मज़दूरी और अन्य बकाया राशि का भुगतान तुरंत किया जाए और सभी ठेका कर्मियों को अनुभव प्रमाणपत्र दिया जाए।

BNTPCयह ज्ञात रहे कि बदरपुर थर्मल पावर स्टेशन को दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का कारण बताकर बंद किया जा रहा है।

रैली में ‘बी.टी.पी.एस. श्रमिकों को न्याय दो!’, ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद! का नारा गूंज रहा था। रैली संसद मार्ग पर पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गयी।

सभा को संबोधित करते हुए, बी.टी.पी.एस. से सेवानिवृत्त ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता और एडवोकेट ओपी गुप्ता ने बताया कि बी.टी.पी.एस. को बंद करने से पहले, नियोजित ठेका श्रमिकों को कोई नोटिस नहीं दिया गया है। 400 से ज्यादा ठेका श्रमिक सालों-साल से काम कर रहे हैं। इनमें से कई तकनीकी प्रशिक्षित हैं, आईटीआई प्रशिक्षित है, डिप्लोमाधारी हैं और इंजीनियर ग्रेजुएट हैं। बिना कोई नोटिस, मुआवज़ा और बकाया दिए, प्रबंधन ढाई सौ से ज्यादा श्रमिकों को, अब तक बाहर कर चुका है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के प्रावधान के तहत, कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना इस संस्थान को बंद नहीं किया जा सकता है। इसलिए इसे बंद किया जाना अवैध है और इसके लिये प्रबंधन कानून के अनुसार दंडित होने का उत्तरदायी है।

मज़दूर एकता कमेटी की तरफ से संतोष कुमार ने अपने संबोधन में बताया कि, सरकार उदारीकरण और निजीकरण की नीति के तहत, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बंद कर रही है या उन्हें पूंजीपतियों को सौंप रही है। इन उपक्रमों में स्थायी मज़दूरों के सेवानिवृत्ति और मृत्यु के उपरांत खाली हुए पदों पर स्थायी भर्ती नहीं कर रही है। स्थायी श्रमिकों की संख्या बहुत कम है। खाली पदों पर ठेका श्रमिकों से भरकर काम करवा रही है।

बी.टी.पी.एस. में बारहमासी काम के लिए ठेका श्रमिकों को रखा गया है। न्यूनतम वेतन पर, कोई छुट्टी और सामाजिक लाभ दिए बिना इन श्रमिकों का शोषण ठेकेदार और सरकार, दोनों मिलकर कर रहे हैं।

सभा को दिल्ली एटक के सचिव धीरेन्द्र शर्मा, सी.आई.टी.यू. दिल्ली के सचिव अनुराग सक्सेना ने संबोधित किया। इन्होंने बी.टी.पी.एस. श्रमिकों की मांगों का समर्थन करते हुए, केन्द्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुजारिश की और ठेका श्रमिकों को उचित मुआवज़ा और रोज़गार देकर पुनर्वास करने की मांग को दोहराया।

सभा के अंत में, एक प्रतिनिधिमंडल ने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री, श्री आर.के. सिंह और श्रममंत्री श्री संतोष कुमार गंगवार को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। श्रमिकों ने फैसला किया कि जल्दी ही वे संघर्ष के अगले क़दम को तय करेंगे।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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