फ्रांसीसी सरकार ने अपनी मज़दूर-विरोधी नीतियां जारी रखीं

9 अक्तूबर, 2018 को फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

9 अक्तूबर, 2018 को फ्रांस भर में लाखों मज़दूरों, छात्रों और सेवानिवृत्त लोगों ने बड़े पैमाने पर 100 से ज्यादा विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया। वे पेरिस, लीयोंस, टूलूज़ और कई अन्य शहरों की सड़कों पर, फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रॉन की सरकार द्वारा मज़दूर अधिकारों पर किये जा रहे बढ़ते हमलों के विरोध में अपना गुस्सा व्यक्त करने के लिए साथ आए। प्रदर्शनकारियों ने वेतन में वृद्धि, पेंशन और निजीकरण के अंत की मांग की।

आयोजकों के अनुसार, मज़दूरों, छात्रों, सेवानिवृत्त मज़दूरों व अन्य सहित 3,00,000 से अधिक लोगों ने देशभर में सौ से अधिक स्थानों पर हुये प्रदर्शनों में भाग लिया। अकेले पेरिस में 50,000 लोगों ने भाग लिया। स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, परिवहन, डाक और संचार व धातु विज्ञान क्षेत्रों के मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

FranceAvignon-Workers

 

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30 अगस्त को छह यूनियनों द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए गए आह्वान ने मैक्रॉन सरकार की मज़दूर-विरोधी, छात्र-विरोधी और सेवानिवृत्त कर्मचारी-विरोधी नीतियों की निंदा की। दरअसल ये नीतियां पूर्व राष्ट्रपति हॉलैंड के शासन से चली आ रही हैं। जैसा कि सभी पूंजीवादी देशों में होता है, मई 2017 में मैक्रॉन ने सत्ता में आने से पहले लोगों के हित में बड़े बदलाव का वादा किया। लेकिन, सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के अंदर, इस सरकार ने देश की मज़दूर संहिता में मज़दूर-विरोधी बदलाव के लिए पांच अध्यादेश पारित किए हैं।

मज़दूर संहिता में इन बदलावों के बाद, मज़दूरों को नौकरियों से बर्ख़ास्त करने में कंपनियों को कोई परेशानी नहीं होगी। 20 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों में कंपनी का मालिक मज़दूरों की यूनियनों को नज़रंदाज़ करके मज़दूरों से सीधा समझौता कर सकता है। इससे अधिकारों के लिये ज़रूरी सामूहिक संघर्ष कमज़ोर हो जायेगा। नौकरी से अनुचित बर्ख़ास्तगी से हुए नुकसान के लिए मज़दूरों को दिए जाने वाले भुगतान पर भी अब सरकार ने एक ऊपरी सीमा लागू करने का प्रस्ताव दिया है।

ऊर्जा और परिवहन के क्षेत्र में निजीकरण के लिए एक व्यापक योजना भी चल रही है। जब हवाई अड्डे के निजीकरण और रेलवे क्षेत्र में इसी तरह के प्रयास किए गए थे तब विमानन और रेल मज़दूरों ने इसके खिलाफ़ व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था।

मैक्रॉन सरकार ने आवास लाभ में बहुत ज्यादा कटौती की, पेंशन पर कर लगाए और विश्वविद्यालय के प्रवेश में प्रतिबंध लगाए। इससे युवक और छात्र बहुत ही ज्यादा गुस्से में हैं। उन्होंने 5 अक्तूबर को एक प्रेस बयान जारी किया, जिसमें शिक्षा के अवसरों तक पहुंचने के सार्वभौमिक अधिकार पर सरकार के हमले की निंदा की।

यह 9 अक्तूबर को हुई आम हड़ताल उस श्रृंखला की एक कड़ी है जिसके तहत 2017 में और भी कई ऐसे प्रदर्शन हुए। इस श्रृंखला का सबसे बड़ा प्रदर्शन सितंबर 2017 में हुआ था। इस प्रदर्शन में फ्रांस के 200 शहरों और कस्बों में 4000 से अधिक हड़ताल और विरोध प्रदर्शन हुए। हाल ही में हुए सभी विरोध प्रदर्शन फ्रांस में सरकार की नीतियों के खि़लाफ़ सामूहिक असंतोष को बयान करते हैं।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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