बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 26वीं बरसी पर : दिल्ली में संयुक्त विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया

दिल्ली, लखनऊ, चेन्नई, हैदराबाद और अनेक शहरों में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 26वीं बरसी के अवसर पर, अनेक जन संगठनों और राजनीतिक पार्टियों ने विरोध सभायें व विरोध प्रदर्शन आयोजित किये।

6 दिसंबर, 2018 को दिल्ली में मंडी हाउस से संसद तक जाने वाली सड़क विरोध प्रदर्शन में लगाये जा रहे नारों से गूंज उठी। विरोध प्रदर्शन में शामिल लोग नारे लगा रहे थे - “बाबरी मस्जिद के विध्वंस के गुनहगारों को सज़ा दो!”, “सांप्रदायिक बंटवारे की राजनीति - नहीं, नहीं! लोगों की एकता और शांति, सही सही!”, “एक पर हमला सब पर हमला!”, “राजकीय आतंकवाद मुर्दाबाद!” हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी सहित लोक राज संगठन और 25 से अधिक संगठनों व पार्टियों के कार्यकर्ताओं, मज़दूरों, महिलाओं और नौजवानों ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह विरोध प्रदर्शन बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 26वीं बरसी के अवसर पर आयोजित किया गया था।

6 Dec rally on Sansad6 Dec rally on Sansad

प्रदर्शनकारियों ने रंग-बिरंगे बैनर और प्लेकार्ड अपने हाथों में उठाये हुये थे जिनपर लोगों की एकता और एकजुटता के समर्थन में और सांप्रदायिक नफ़रत और बंटवारे की राजनीति के ख़िलाफ़ नारे लिखे हुए थे। मंडी हाउस से निकलकर यह जुलूस संसद मार्ग पहुंचा जहां एक जनसभा आयोजित की गई। सभा को विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।

इस जुलूस और जनसभा का आयोजन संयुक्त रूप से लोक राज संगठन, जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया, सी.पी.आई (एम.एल.) न्यू प्रोलेतेरियन, सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया, जन संघर्ष मंच हरियाणा, सिख फोरम, यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट, सिटीज़न फॉर डेमोक्रेसी, युनाईट अगेंस्ट हेट, निर्माण मज़दूर पंचायत संगम, लोक पक्ष, हिन्द मज़दूर सभा (ग़ाज़ियाबाद), मज़दूर एकता कमेटी, मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (दिल्ली), पुरोगामी महिला संगठन, नौजवान भारत सभा, हिन्द नौजवान एकता सभा, एन.सी.एच.आर.ओ., ए.पी.सी.आर., स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजे़शन और पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ (दिल्ली), समेत कई अन्य संगठनों ने किया।

लोक राज संगठन के अध्यक्ष एस. राघवन ने सभा की शुरुआत में इतिहास का हवाला देते हुए समझाया कि किस तरह से, पहले बर्तानवी बस्तीवादियों ने और उनके बाद में वर्तमान हिन्दोस्तानी हुक्मरानों ने बड़े ही सुनियोजित तरीके से बाबरी मस्जिद का मसला खड़ा किया और लोगों के बीच सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने और उनको बांटने के लिए बार-बार उसका इस्तेमाल किया।

अन्य संगठनों के वक्ताओं ने भी सभा को संबोधित किया, जिनमें शामिल हैं - जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के इंतिज़ार नईम, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से प्रकाश राव, सी.पी.आई. (एम.एल.) न्यू प्रोलेतेरियन से शियोमंगल सिद्धान्तकर, वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया से डॉ. सईद कासिम रसूल इल्यास, पुरोगामी महिला संगठन की प्रतिनिधि, मज़दूर एकता कमेटी से संतोष कुमार, सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया से चरण सिंह, लोक पक्ष से के.के. सिंह, निर्माण मज़दूर पंचायत संगम से ईश्वर भाई, मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (दिल्ली) से अब्दुल रशीद आगवान और यूनाइट अगेंस्ट हेट से मौलाना मेहेंदी हसन काज़मी।

सभी वक्ताओं ने बताया कि बड़े ही सुनियोजित, एक सोची-समझी साज़िश के तहत बाबरी मस्जिद को गिराया गया। भाजपा ने खुलेआम देशभर में बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए व्यापक अभियान चलाया। केंद्र में सत्ता में बैठी कांग्रेस पार्टी और उत्तर प्रदेश में सत्ता में बैठी भाजपा ने मिलजुलकर लोगों के बीच सांप्रदायिक उन्माद फैलाने और बाबरी मस्जिद को गिराने और उसके बाद भयानक सांप्रदायिक कत्लेआम आयोजित करने का काम किया। सभी वक्ताओं ने देशभर में सांप्रदायिकता और सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के लिए कांग्रेस और भाजपा, दोनों को एक आवाज़ में ज़िम्मेदार करार दिया।

सभी संगठनों के वक्ताओं ने देशभर में बढ़ती अराजकता और राज्य द्वारा आयोजित हिंसा की निंदा की और साथ ही पूंजीवादी मीडिया और प्रचार तंत्र द्वारा लगातार सांप्रदायिक ज़हर फैलाने की भी निंदा की। उन्होंने सांप्रदायिक आधार पर मुसलमानों को निशाना बनाने, सभी मुसलमानों को “आतंकवादी” और “पाकिस्तान का एजेंट” करार देने, बेगुनाह नौजवानों को पोटा और यू.ए.पी.ए. जैसे काले कानूनों के तहत प्रताड़ित और सालों-साल जेलों में बंद करने के ख़िलाफ़ ज़ोरदार आवाज़ उठाई। “पुलिस मुठभेड़ों” में लोगों का कत्ल करने और “गौरक्षा” के नाम पर बेगुनाह लोगों की भीड़ द्वारा हत्या करवाने की भी उन्होंने निंदा की।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से प्रकाश राव ने कहा कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस इस्लाम धर्म को मानने वाले लोगों का अपमान करने के मकसद के साथ किया गया था। यह हमारे समाज के दिल में एक खंजर की तरह था, जिसका मकसद लोगों की एकता और भाइचारे को चकनाचूर करना था। हमारे देश के हुक्मरानों की करतूतों की वजह से हमारे देश के लोगों की एकता और भाईचारे को जो ख़तरा है उसपर रोशनी डालते हुए उन्होंने बताया कि राजनीति का साम्प्रदायिकीकरण और अपराधीकरण करना और लोगों के ख़िलाफ़ राजकीय आतंकवाद का इस्तेमाल करना हमारे देश के हुक्मरानों का राज करने का सबसे पसंदीदा तरीका बन गया है। भाजपा और कांग्रेस पार्टी जैसी पार्टियों ने यह दिखा दिया है कि सत्ता हासिल करने और सत्ता में बने रहने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकती हैं, जिसमें सांप्रदायिक जनसंहार आयोजित करना शामिल है। बाबरी मस्जिद का विध्वंस केवल ज़मीन-जायदाद का मसला नहीं माना जा सकता है। यह इस बात को साबित करता है कि देश के सभी लोगों के लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने फ़र्ज़ को पूरा करने में यह राज्य पूरी तरह से नाक़ामयाब है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा हिन्दोस्तानी राज्य लोगों की जान की क़ीमत पर सबसे बड़े पूंजीवादी घरानों की तिजोरियां भरने के लिए काम करता है। चुनावी प्रक्रिया इस तरह से बनाई गयी है कि राज चलाने का ज़िम्मा केवल उन्हीं पार्टियों को दिया जाता है जिनके पीछे पूंजीवादी घरानों का समर्थन है। ये पार्टियां बड़े ही गैर-ज़िम्मेदाराना तरीके से लोगों के बीच धर्म, जाति, प्रांत और भाषा के आधार पर उन्माद भड़काती हैं, ताकि लोग एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए न लड़ पाएं। सत्ता में बैठी पार्टी लोगों पर सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंक चलाने के लिए राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल करती है।

उन्होंने आगे बताया कि हमारे हुक्मरान और उनका राज्य न तो हमारे लिए सुख और सुरक्षा देने के क़ाबिल हैं और न ही ऐसा करना चाहते हैं। आज वक़्त की मांग है कि हम मौजूदा शोषणकारी, दमनकारी और सांप्रदायिक राज्य की जगह पर एक नया राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ एकजुट हों, जो राज्य सभी के लिए सुख और सुरक्षा की गारंटी देगा। हमें एक ऐसा नया राज्य नयी बुनियाद पर बनाना होगा, ताकि समाज के सभी सदस्यों के लिए मानव अधिकार सुनिश्चित किये जा सकें और समाज के किसी भी सदस्य के साथ धर्म, भाषा, जाति या राष्ट्रीयता इत्यादि के आधार पर भेदभाव न हो, या किसी को सताया जा सके।

जनसभा को संबोधित करते हुए सभी संगठनों के वक्ताओं ने मांग की कि जिन लोगों ने 26 साल पहले बाबरी मस्जिद का विध्वंस आयोजित किया और सांप्रदायिक कत्लेआम भड़काया था उन सभी के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जाये और उन्हें सज़ा दी जाये। सभी वक्ताओं ने लोगों को इंसाफ के लिए और सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंक का अंत करने के संघर्ष में एकजुट होने का बुलावा दिया।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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