करतारपुर गलियारे का उद्घाटन समारोह : हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में स्वागतपूर्ण पहल

28 नवंबर, 2018 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने करतारपुर गांव में करतारपुर गलियारे का नींव पत्थर रखा। इस समारोह में भारत सरकार के दो मंत्री - हरसिमरत कौर बादल और हरदीप सिंह पुरी, के साथ-साथ पंजाब राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने हिस्सा लिया। इसके दो दिन पहले भारत के उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब हिन्दोस्तानी इलाके में करतारपुर गलियारे का नींव पत्थर रखा।

यह करतारपुर गलियारा हिन्दोस्तान में डेरा बाबा नानक साहिब के तीर्थस्थान को पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर से जोड़ेगा। 4.7 किलोमीटर लंबे इस गलियारे में रावी नदी का एक पुल भी शामिल है। इस गलियारे से हिन्दोस्तान के तीर्थ यात्री बिना किसी वीज़ा के पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर जा पायेंगे। पाकिस्तान सरकार ने ऐलान किया है कि यह गलियारा हिन्दोस्तान से आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए नवम्बर 2019 से खोला जायेगा, जो कि गुरु नानक देव के जन्म की 550वीं सालगिरह होगी। अगस्त 2018 को इमरान ख़ान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हुए अपनी सरकार के इस फैसले का ऐलान किया था।

गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर सिख धर्म को मानने वाले लोगों के लिए सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। इसी जगह पर गुरु नानक देव ने अपने जीवन के आखिरी 18 साल बिताये थे। इसी जगह पर गुरु नानक देव ने गुरु दा लंगर (मुफ्त्त सामुदायिक रसोई) की परंपरा की शुरुआत की थी। सिख धर्म की स्थापना करने वाले गुरु नानक देव ने सभी लोगों को श्रम और सेवा की इज्ज़त करने का पाठ सिखाया था। उन्होंने लोगों को जाति व्यवस्था के ख़िलाफ़ उठ खड़े होने का बुलावा दिया था और सभी मनुष्यों के बीच, बराबरी का पाठ पढ़ाया था। गुरु नानक देव ने औरत और पुरुष के बीच किसी भी तरह के भेदभाव या विशेषाधिकार को मानने से इंकार किया था। उन्होंने जाति के आधार पर कोई भेदभाव किये बिना सभी लोगों को दीक्षा दी। गुरु नानक देव शोषकों की परजीविता के सख्त ख़िलाफ़ थे। सभी धर्मों और जातियों के लोग उनके अनुयायी बने, जिनमें अधिकतर लोग निचली जाति से, मेहनतकश आबादी से थे। ऐसा माना जाता है कि जब गुरु नानक देव का देहांत हुआ, तब उनके अनुयायियों ने करतारपुर में उनकी समाधि और मजार, दोनों ही बनवाये। आज भी पाकिस्तान के इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग उनके इस तीर्थस्थल पर मत्था टेकने जाते हैं। गुरूनानक देव की ज़िन्दगी और उनकी शिक्षा इस उपमहाद्वीप के सभी लोगों की संपत्ति है।

हिन्दोस्तानी तीर्थयात्री करतारपुर गुरुद्वारा जा सकें, इसके लिए इस वीज़ा मुक्त गलियारे को बनाने का पाकिस्तान सरकार का फैसला हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक स्वागतपूर्ण पहल है। सारे हिन्दोस्तानी जो हमारे दोनों देशों के बीच दुश्मनी को ख़त्म करना चाहते हंै उनको इस पहल का बिना किसी हिचकिचाहट के समर्थन करना चाहिए। 

करतारपुर में हुए समारोह के केवल एक सप्ताह पहले अमृतसर में एक आतंकवादी हमले में तीन लोग मारे गए थे। इस हमले के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं ने इस समारोह का बहिष्कार किया। हिन्दोस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने मीडिया में ख़बरें फैलाईं कि पाकिस्तान की सरकार इस गलियारे का इस्तेमाल हिन्दोस्तान में आतंकवादी कांडों को अंजाम देने के लिए कर सकती है। इस तरह, पाकिस्तान की सरकार की नीयत पर शक पैदा किया जा रहा है।

पिछले दो दशकों के हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच के संबंधों का इतिहास यह दिखाता है कि जब कभी इन दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की दिशा में क़दम उठाये जाते हैं तो हिन्दोस्तान या पाकिस्तान में कोई न कोई आतंकवादी घटना आयोजित की जाती है। इसके बाद दोनों देशों के हुक्मरान इन आतंकवादी हमलों के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं और आपसी बातचीत और संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया को रोक देते हैं। असलियत में इन घटनाओं के पीछे किसका हाथ है, इसका कभी भी पर्दाफाश नहीं किया जाता है। जो राजनीतिक ताक़तें और लोग हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति और दोस्ती चाहते हैं, वे अब इस बात को मानने लगे हैं कि इन आतंकवादी घटनाओं के पीछे अमरीकी राज्य का हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता। अमरीका ने पाकिस्तानी राज्य और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसियों के बीच पूरी तरह से पैठ बना ली है। इस बात को सभी जानते हैं कि अमरीका ने पाकिस्तान में कई हथियारबंद आतंकवादी गुटों को स्थापित किया है, उनको प्रशिक्षण और पैसा दिया है और ये गुट अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सी.आई.ए. के इशारों पर काम करते हैं। इस इलाके में अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद लगातार ऐसी कार्यवाहियां करता आया है, जिससे हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच हमेशा दुश्मनी बनी रहे। पिछले एक दशक से वह हिन्दोस्तान के साथ क़रीबी सैनिकी ख़ुफ़िया रणनीतिक संबंधों को मज़बूत कर रहा है। जैसे-जैसे पाकिस्तान अमरीका के हाथों में एक बंदूक की तरह काम करने से इंकार कर रहा है, अमरीका हिन्दोस्तान को यह भूमिका अदा करने के लिए उकसा रहा है।

हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति और दोस्ती के संबंध स्थापित करना इन दोनों ही देशों के लोगों के हित में है। हिन्दोस्तानी राज्य को पाकिस्तान की सरकार की इस पहल का सकारात्मक जवाब देना चाहिए और सभी विवादों को बातचीत के रास्ते सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। करतारपुर गलियारे को खोलने के पाकिस्तान सरकार की इस पहल का एक सकारात्मक क़दम के रूप में स्वागत किया जाना चाहिए।

Tag:   

Share Everywhere

करतारपुर गलियारे    संबंधों    स्वागतपूर्ण    Dec 16-31 2018    Voice of the Party    Communalism     History    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)