8-9 जनवरी की सर्व हिन्द मज़दूर हड़ताल को सफल बनाएं!

अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों के मज़दूर 8-9 जनवरी, 2019 को सर्व हिन्द हड़ताल में एकजुट होने जा रहे हैं। इजारेदार पूंजीवादी घरानों की अगुवाई में हुक्मरान पूंजीपति वर्ग के मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी रास्ते के खिलाफ़ मज़दूर वर्ग और सभी मेहनतकशों के सख़्त विरोध को प्रकट करने के लिए इस हड़ताल का आह्वान दिया गया है।

28 सितम्बर, 2018 को नई दिल्ली में हुए, ट्रेड यूनियनों के संयुक्त राष्ट्रीय अधिवेशन के आह्वान पर सर्व हिन्द मज़दूर हड़ताल आयोजित की जा रही है। उस अधिवेशन में देश-भर के विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मज़दूर संगठनों, अलग-अलग उद्योगों और क्षेत्रों के फेडरेशनों के हजार से अधिक नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे। उनमें सभी सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों, उद्योगों, सेवाओं और कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधि थे। केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों व शिक्षकों, डाक, रक्षा, रेलवे, बीमा, बैंक और टेलिकॉम कर्मचारियों के संगठनों के नेताओं ने अधिवेशन में भाग लिया था। तेल, कोयला और बिजली क्षेत्रों के ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय और राजकीय नेता, मेडिकल और सेल्स प्रतिनिधि, सड़क परिवहन मज़दूर यूनियन, घरेलू कामगार मज़दूर, आदि भी उपस्थित थे। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के मज़दूरों और स्कीम कर्मियों के नेताओं ने भी अधिवेशन में भाग लिया था।

8-9 जनवरी की सर्व हिन्द मज़दूर हड़ताल मज़दूर वर्ग की लम्बे समय से उठाई जा रही मांगों के लिए की जा रही है। इनमें शामिल हैं ठेकेदारी ख़त्म करने, समान काम का समान वेतन और सुविधा देने, न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए देने, बोनस-ईपीएफ पर सीलिंग को ख़त्म करने, ग्रेज्युटी की मात्रा बढ़ाने, सभी को पेंशन देने, 45 दिन के अंदर ट्रेड यूनियन को पंजीकृत करने, श्रम कानूनों में मज़दूर-विरोधी बदलावों को रद्द करने, निजीकरण कार्यक्रम को रोकने और वापस लेने, आदि की मांगें।

पूंजीपति वर्ग के निजीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण कार्यक्रम के खिलाफ़ मज़दूर वर्ग बार-बार सड़कों पर उतरता रहा है। ट्रेड यूनियनों में मज़दूरों के संगठित होने के अधिकार पर हमलों और श्रम कानूनों में दूसरे मज़दूर-विरोधी संशोधनों का मज़दूर वर्ग लगातार विरोध करता रहा है। ठेका मज़दूरी, सीमित समय के ठेकों, अपरेंटिस व प्रशिक्षु बतौर मज़दूरी, जैसे रोज़गार की कोई सुरक्षा दिए बिना मज़दूरों के शोषण को बढ़ाने के कदमों के खिलाफ़ मज़दूर वर्ग निरंतर अपनी आवाज़ बुलंद करता रहा है।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी देश भर के सभी ट्रेड यूनियनों और मज़दूर संगठनों से आह्वान करती है कि 8-9 जनवरी की सर्व हिन्द मज़दूर हड़ताल को सफल बनाएं। इस हड़ताल को, हमारी रोजी-रोटी और अधिकारों पर इन बढ़ते हमलों को रोकने के लिए मज़दूर वर्ग के एकजुट और संगठित होने के संकल्प का, एक शानदार प्रदर्शन बनाएं।

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पार्टी के दस्तावेज

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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निजीकरण और उदारीकरण के कार्यक्रम की हरायें!

मजदूरों और किसानों की सत्ता स्थापित करने के उद्देश्य से संघर्ष करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का आवाहन, २३ फरवरी २०१२

अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों - बैंकिंग और बीमा, मशीनरी और यंत्रों का विनिर्माण, रेलवे, बंदरगाह, सड़क परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आदि - के मजदूर यूनियनों के बहुत से संघों ने 28 फरवरी २०१२ को सर्व हिंद आम हड़ताल आयोजित करने का फैसला घोषित किया है। यह हड़ताल मजदूर वर्ग की सांझी तत्कालीन मांगों को आगे रखने के लिये की जा रही है।

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मजदूर वर्ग के लिये राज्य सत्ता को अपने हाथ में लेने की जरूरत23-24 दिसम्बर, 2011 को मजदूर वर्ग गोष्ठी में प्रारंभिक दस्तावेज कामरेड लाल सिंह ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से पेश किया। मजदूर वर्ग के लिये राज्य सत्ता को अपने हाथ में लेने की जरूरत शीर्षक के इस दस्तावेज को, गोष्ठी में हुई चर्चा के आधार पर, संपादित किया गया है और केन्द्रीय समिति के फैसले के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।

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