निजीकरण के ख़िलाफ़ बिजली मज़दूरों का संघर्ष समाज के हित में है

महाराष्ट्र सरकार से जुड़ी सभी चार बिजली कंपनियों के इंजीनियरों और अधिकारियों सहित सभी मज़दूर 7 जनवरी, 2019 से 72 घंटे तक हड़ताल पर रहे। 2005 में महाराष्ट्र सरकार ने अपने सभी मज़दूरों के भारी विरोध के बावजूद महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड (एम.एस.ई.बी.) को 4 कंपनियों में विभाजित कर दिया था। एम.एस.ई.बी. को तोड़ने के असली मकसदों में से एक था, बिजली कर्मचारियों के बीच एक कृत्रिम विभाजन बनाना। लेकिन इस हड़ताल ने एक बार फिर सभी कर्मचारियों को एक साथ ला दिया है। विभिन्न यूनियनों और भांति-भांति की श्रेणियों तथा ग्रेडों की विभिन्न यूनियनों के कर्मचारी एकजुट हुए हैं। यह हड़ताल सम्पूर्ण हिन्दोस्तान के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति द्वारा दिये गये हड़ताल के आह्वान का एक हिस्सा थी।

Electricity workers राष्ट्रीय समन्वय समिति द्वारा उठाई गई मुख्य मांगों में से एक है बिजली (संशोधन) अधिनियम 2018 को लागू करने के लिए आगे की प्रक्रिया को तुरंत रोकना। हालांकि इस अधिनियम से देशभर के मज़दूरों और बिजली उपयोगकर्ताओं के ऊपर काफी बुरा असर पड़ेगा, फिर भी केंद्र सरकार ने बिजली मज़दूरों और उनकी यूनियनों को इस अधिनियम का कोई मसौदा नहीं भेजा और न ही यह नागरिकों को उनकी राय प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किया गया। बिजली मज़दूरों का कहना है कि अगर यूनियनों और नागरिकों को यह ड्राफ्ट प्रस्तुत किया जाएगा तो वे निश्चित रूप से इसके जन-विरोधी और पूंजीवादी प्रकृति का जमकर विरोध करेंगे और यही कारण है कि केंद्र सरकार ने उन्हें इस मामले में शामिल नहीं किया। संशोधित अधिनियम में “बिजली ढुलाई” और “बिजली उपयोग” में वितरण को अलग करने की अनुमति देता है, जो निजी खिलाड़ियों को “बिजली उपयोग” में किसी बुनियादी ढांचे के लिए जोखिमहीन निवेश किए बिना लाभ प्राप्त करने की अनुमति देगा। संशोधन की नीति योजना भी उपयोगकर्ताओं को 2 भागों में विभाजित करती है। पहले भाग में औद्योगिक, रेलवे, अल्ट्रा हाई वॉटेज उपयोगकर्ता शामिल हैं अर्थात ऐसे उपयोगकर्ता जिनसे अधिकतम मुनाफ़ा प्राप्त किया जा सकता है और यह भाग निजी खिलाड़ियों के लिए आरक्षित है, जबकि दूसरे भाग में घरेलू उपयोगकर्ता, कृषि पंप कनेक्शन, स्ट्रीट लाइट, ग्रामीण क्षेत्र आदि शामिल हैं। इन उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति रियायती दरों पर की जाती है और इसलिए इन्हें आम तौर पर गैर-लाभकारी माना जाता है। यही कारण है कि इन उपयोगकर्ताओं को सरकारी कंपनी द्वारा आपूर्ति की जाने की योजना है। अधिनियम में यह भी कहा गया है कि सभी उपयोगकर्ताओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सब्सिडी पूरी तरह से वापस ली जानी चाहिए। निजी कंपनियों के मुनाफ़े की खातिर यह अधिनियम उन्हें उपयोगकर्ताओं से व्हीलिंग शुल्क आदि जैसे विभिन्न खर्चों को वसूल करने तक की अनुमति देता है। यह प्रस्तावित अधिनियम लोगों की बुनियादी ज़रूरतों में से एक पर हमला कर रहा है। इसका न केवल बिजली मज़दूरों द्वारा, बल्कि अन्य सभी कामकाजी लोगों द्वारा भी जमकर विरोध किया जाना चाहिए। बिजली मज़दूरों द्वारा हमारे देश के सभी नागरिकों की ओर से इस काम को हाथ में लेने के लिए मज़दूर एकता लहर उनका पूरा समर्थन करती है।

महाराष्ट्र के बिजली मज़दूर मुंब्रा, कलवा और मालेगांव में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनियों को दिए गए आशय-पत्र को तत्काल रद्द करने की मांग कर रहे हैं। वे यह भी मांग कर रहे हैं कि बिजली उत्पादन से संबंधित प्राकृतिक संसाधनों को लाभ कमाने के लिए निजी कंपनियों को नहीं सौंपा जाना चाहिए और इसके अंतर्गत  माइक्रो हाइड्रो पावर स्टेशनों को भी निजी कंपनियों के हवाले नहीं करना चाहिए। महराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कम्पनी लिमिटेड (महावितरण कंपनी) के “पुनर्गठन” की आड़ में बिजली वितरण में शामिल मज़दूरों में भारी कमी का प्रस्ताव दिया है। महाराष्ट्र के बिजली मज़दूर इसका विरोध कर रहे हैं और वे बताते हैं कि वास्तव में दसियों हजार बिजली मज़दूरों को भर्ती करने की आवश्यकता है ताकि सभी के लिए ज़रूरी बिजली उत्पादन तथा नागरिकों की मूलभूत आवश्यकता को ठीक से सुनिश्चित किया जा सके। वे मांग कर रहे हैं कि हजारों श्रमिक जो महाराष्ट्र बिजली क्षेत्र में कई वर्षों से अनुबंधित तौर पर काम कर रहे हैं, उन्हें स्थायी श्रमिकों के रूप में नौकरी दी जाए।

इस मान्यता से कि बिजली मज़दूरों की लड़ाई समाज के हित में है, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं के अलावा, लोक राज संगठन, सहयोग स्थानिक जन विकास संस्था, कलवा तथा नवक्रांति शेतकरी संस्था, कलवा जैसे संगठनों ने मिलकर निजीकरण के विनाशकारी कार्यक्रम के बारे में नागरिकों को अवगत कराने और साथ ही साथ इस जन-विरोधी, सामाज-विरोधी क़दम का विरोध करने के लिए मज़दूर वर्ग के विभिन्न तबकों और लोगों के बीच एकता बनाने की एक मुहिम चलायी है। इसके अंतर्गत कलवा के विभिन्न भागों में करीब 40 नुक्कड़, मोहल्ला तथा सोसाइटी मीटिंगें आयोजित की गयीं।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की क्षेत्रीय समिति द्वारा जारी बयान की प्रतियां बड़ी संख्या में बांटी गईं। कलवा स्टेशन के बाहर पूर्वी तथा पश्चिमी इलाकों में अलग-अलग दिनों को दो बड़े प्रदर्शन आयोजित किए गए। लोगों ने इस पहल का बहुत उत्साह के साथ स्वागत किया और सरकार बुनियादी सेवा के निजीकरण को वापस ले इस मांग के समर्थन में हजारों ने हस्ताक्षर दिए। इस अभियान ने बिजली मज़दूरों के संघर्ष को मजबूती प्रदान की है।

न्यायोचित मांगों के समर्थन में दो गेट मीटिंगों में सैंकड़ों बिजली मज़दूरों को संबोधित किया गया और इस बात पर बल दिया गया कि हर सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी ने निजीकरण को आगे बढ़ाया है और इसलिए सभी मज़दूरों की तथा उपयोगकर्ताओं की एकता ही इस हमले को हरा सकती है।

मज़दूर एकता लहर सभी श्रमिकों से महाराष्ट्र और पूरे देश के बिजली मज़दूरों की इन मांगों का समर्थन करने का आह्वान करती है। सभी श्रमिकों की बुनियादी ज़रूरतों में से एक - उचित दर पर बिजली प्रदान कराना, इस संघर्ष का उद्देश्य है।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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