सेलम चेन्नई एक्सप्रेस-वे के विरोध में किसानों का प्रदर्शन

तमिलनाडु के किसान ग्रीन कोरिडोर सेलम चेन्नई एक्सप्रेस-वे का विरोध करते आये हैं। यह 200 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे तमिलनाडु सरकार की परियोजना है। 6 जनवरी को एक बार फिर 500 किसानों ने इसके खि़लाफ़ प्रदर्शन किया। सेलम, धरमपुरी, कृष्णगिरी, थिरुवनामलाई और कांचीपुरम के किसान इसका विरोध करते आये हैं। उन्होंने इसके खि़लाफ़ मद्रास उच्च न्यायालय से अपील की है। 

प्रदर्शनकारियों में थिरुवनामलाई के एक किसान ने बताया कि “इस विरोध प्रदर्शन का मकसद है सरकार को इस परियोजना को छोड़ने के लिए मजबूर करना”। किसानों ने बताया कि इस परियोजना के लिए पहले जितनी ज़मीन चाहिए थी सरकार ने उससे कहीं अधिक ज़मीन का अधिग्रहण कर लिया है।

इससे पहले जुलाई 2018 को किसानों ने इस सड़क परियोजना के खि़लाफ़ प्रदर्शन किया था और कहा था कि इससे उनकी रोज़ी-रोटी और ज़मीन पर विपरीत असर होगा। उन्होंने इस बात की चिंता जताई कि इस ग्रीन कॉरिडोर की वजह से इस इलाके के नाजुक पर्यावरण पर भी विपरीत असर होगा। उस वक़्त सरकार ने प्रदर्शनकारियों में से कई किसानों को गिरफ्तार किया था और बाद में उन्हें सशर्त जमानत पर रिहा कर दिया था। लेकिन इससे किसानों की हौसला नहीं टूटा और उन्होंने अपने इस संघर्ष को उसकी मंज़िल, यानी इस परियोजना के बंद करने तक ले जाने की फैसला लिया।

चेन्नई सेलम ग्रीन कॉरिडोर एक्सप्रेस-वे का मक़सद चेन्नई और सेलम के बीच आवाजाही को बेहतर करना है और इससे सफ़र का समय केवल 3 घंटे हो जायेगा। लेकिन यह रास्ता हजारों एकड़ कृषि भूमि, जंगल, पर्वत, नदियों, तालाबों और 150 गांवों से होकर गुजरेगा। उच्च-न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि वे जबरदस्ती से लोगों की ज़मीन नहीं ले सकते।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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