महाराष्ट्र के बिजली वितरण मज़दूरों के न्यायपूर्ण संघर्ष का समर्थन करें! असामाजिक निजीकरण का विरोध करने के लिए एकजुट हों!

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की महाराष्ट्र इलाका कमेटी का बयान

कामगार भाइयों और बहनों!

हम कलवा और मुंब्रा में बिजली वितरण के निजीकरण तथा महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कम्पनी लिमिटेड (महावितरण कंपनी) द्वारा एकतरफा रूप से मज़दूरों पर थोपी जा रही पुनर्गठन योजना को रोकने के लिए आपके न्यायोचित संघर्ष का समर्थन करते हैं।

हम इस बात से अवगत हैं कि पुनर्गठन की योजना, जिसे अधिकारीगण किसी भी क़ीमत पर लागू करना चाहते हैं, वह योजना इंजीनियरों से लेकर लाइनमैन और कार्यालय कर्मचारियों तक, सभी के काम को ख़तरे में डालती है। यह बहुत सकारात्मक बात है कि यूनियन और पार्टी से ऊपर उठकर विभिन्न श्रेणियों के कामगार इस संघर्ष में एक साथ जुड़े हैं। यह एकता बहुत मूल्यवान है। इसे बहुत सावधानी से संरक्षित किया जाना चाहिए क्योंकि अधिकारी इसे तोड़ने का हर प्रयास करेंगे।

भाइयों और बहनों!

आपने महाराष्ट्र राज्य बिजली बोर्ड (एम.एस.ई.बी.) को तीन अलग-अलग संस्थाओं, पावर उत्पादन, पावर ट्रांसमिशन और पावर वितरण में तोड़ने से महाराष्ट्र सरकार को रोकने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। आप समझ गए थे कि सरकार के दो मकसद थे। एक था, बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की एकता को तीन संस्थाओं में विभाजित करके तोड़ना और दूसरा, पावर सेक्टर को पूंजीपतियों के लिए आकर्षक बनाना। यह दावा करके कि राज्य बिजली बोर्ड पर्याप्त बिजली उत्पन्न करने में सक्षम नहीं है उत्पादन सेक्टर को तुरंत ही पूंजीपतियों के लिए खोल दिया गया था। उत्पादन में निवेश करने वाले कई पूंजीपतियों ने पाया कि वे अपेक्षित मुनाफ़ा नहीं कमा पा रहे थे। इसलिए उन्होंने इन कंपनियों को बीमार बना दिया और उनमें से कुछ ने तो सरकार से कम्पनी को अपने हवाले ले लेने की मांग की। पूंजीपति अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लिए गए ऋण को चुकाने से इंकार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि जनता के हजारों करोड़ रुपयों का नुकसान होगा! हमें मिलकर इन कटु तथ्यों से दूसरे क्षेत्रों के कामगारों और नागरिकों को अवगत कराना चाहिए।

पूंजीपतियों की लालची निगाहें विद्युत वितरण पर हैं क्योंकि इस क्षेत्र में लाभ कमाने के अधिकतम अवसर हैं। सरकार यह प्रचार करके कि राज्य बिजली क्षेत्र के कामगार अपना कर्तव्य ठीक से नहीं निभा रहे हैं और जिसके कारण नागरिक परेशान होते हैं, वह नागरिकों को आपके खि़लाफ़ भड़का रही है। वह यह दावा भी करती है कि वितरण का निजीकरण कार्य-कुशलता बढ़ाएगा और नागरिकों को बेहतर सेवा प्रदान करेगा। नागरिकों को साबित करने के लिए आपके पास सभी जानकारी है कि यह सब प्रचार एक बड़ा झूठ है! हमें औरंगाबाद, जलगाँव, नागपुर और भिवंडी में वितरण के निजीकरण के कड़वे अनुभवों के बारे में नागरिकों को बताना चाहिए।

भिवंडी में, जहां टोरेंट कंपनी को बिजली वितरण का तोहफा दिया गया था, बिजली की दरों में बढ़ोतरी हुई, जिससे यह सेवा कई उपयोगकर्ताओं की पहुंच से बाहर हो गयी। बिजली के मीटर बदलने के लिए उपयोगकर्ताओं को मनमाने रूप से उच्च लागत का भुगतान करना पड़ा। वास्तविक खपत की तुलना में बिजली के मीटर अतिरिक्त गति से चलते हैं। परिणामस्वरूप कई लोगों को अकल्पनीय रूप से महंगे बिल मिले हैं, जिनका भुगतान करने में वह असमर्थ हैं। और क्या होता है जब वे भुगतान नहीं कर पाते हैं? उनकी बिजली आपूर्ति काट दी जाती है। शिकायतों पर कभी ध्यान दिया जाता है और अक्सर नहीं भी। यह बताया गया है कि टोरेंट को सरकार द्वारा करोड़ों रुपये (हर व्यक्ति की मेहनत की कमाई) की सहायता दी गई है और अभी तक उसने भिवंडी नगर निगम की बकाया रकम का भुगतान तक नहीं किया है। ऐसा माना जाता है कि जब से टोरेंट ने कुशल काम करने के लिए अप्रशिक्षित कॉन्ट्रेक्ट मज़दूरों को काम पर रखा है, तब से 150 से अधिक कॉन्ट्रेक्ट मज़दूरों की मौत बिजली के झटके से हुई है। इस त्रासदी को चुप्पी तले दबा दिया गया है। हमें नागरिकों को, विशेष रूप से मुंब्रा और कलवा के नागरिकों को, इन तथ्यों से अवगत कराना चाहिए!

भाइयों और बहनों!

हम सबको मिलकर नागरिकों के सामने इस तथ्य को बेनकाब करना होगा कि राज्य सरकार ने जानबूझकर विद्युत क्षेत्र को कैसे बर्बाद किया है। सबसे पहले नये पूंजी निवेश को रोक दिया गया जिससे मौजूदा उपकरणों को अच्छी स्थिति में बरकरार न रखा जा सके। परिणामस्वरूप जनरेटर, ट्रांसफार्मर, कैपेसिटर बैंक आदि जैसे महत्वपूर्ण उपकरण खराब स्थिति में हैं, जिससे बड़ी मात्रा में बिजली का नुकसान होता है। इसी तरह कामगारों की भर्ती भी रोक दी गई। 97,000 कामगारों के स्वीकृत स्थान पर केवल 66,000 काम कर रहे हैं! अप्रशिक्षित मज़दूरों को कॉन्ट्रेक्ट पर भर्ती किया गया जिसके कारण दक्षता और सुरक्षा में और गिरावट आई। इसके साथ-साथ, बड़े औद्योगिक घरानों और राजनेताओं द्वारा चलित व्यवसायों के करोड़ों रुपयों के न चुकाये बिजली बिलों को साफ-साफ अनदेखा कर दिया गया। और अब स्थायी कामगारों को उनकी गलती न होने के बावजूद दोषी ठहराया जा रहा है! पावर सेक्टर को जानबूझकर बर्बाद करने के बाद, सरकार अब दावा करती है कि निजीकरण ही एकमात्र समाधान है।

हमें नागरिकों को आपके सफल कार्यों से अवगत कराना चाहिए, जिनके द्वारा स्वीकृत कामगारों की कमी के बावजूद, मुंब्रा में आपने 2009 के मासिक बिल संग्रह को 2.5 करोड़ से बढ़ाकर 2018 में 20 करोड़ से अधिक कर दिया है। आपने यह सब बड़ा जोखिम उठाकर बड़े व्यापारियों और गुंडों से बचकर अपने जीवन को ख़तरे में डालकर किया है।

मुंब्रा, कलवा और ठाणे के अन्य उद्योगों तथा संगठनों के अनेक कामगार और नागरिकों के संगठनों के कार्यकर्ता पहले से ही बिजली वितरण के निजीकरण का विरोध करने की योजना बना रहे हैं। आइए, हम सब हाथ मिलाएं और एक बड़ा अभियान संचालित करें!

भाइयों और बहनों!

अन्य सार्वजनिक सेवाओं के कामगारों द्वारा निजीकरण के खि़लाफ़ लड़ाई के साथ अपने संघर्ष को जोड़ना महत्वपूर्ण है। सार्वजनिक क्षेत्र का निर्माण सार्वजनिक धन और लाखों मज़दूरों के पसीने से किया गया है। इसे एक सार्वजनिक सेवा क्षेत्र के रूप में काम करना चाहिए! किसी भी सरकार को इसे निजी लाभ के लिए सौंपने का अधिकार नहीं है। हमें इस सिद्धांत

के आधार पर निजीकरण के खि़लाफ़ अपनी लड़ाई लड़नी होगी। हमारे देश के साथ-साथ पूरी दुनिया के अनुभवों से पता चलता है कि यदि कामगार और उपयोगकर्ता एक संयुक्त संघर्ष करें तो निजीकरण को रोका जा सकता है और उसे वापस लेने पर मजबूर भी किया जा सकता है। आज जब आपकी यूनियनें अपनी लड़ाई कर रही हैं, आइए हम अन्य कामगारों और अन्य लोगों, जिन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है, उन्हें इन सभी समस्याओं के बारे में बताकर अपनी शक्ति को और मजबूत करें। आइए, हम ऐसा करने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करें। हमें विश्वास है कि अगर हम ऐसा करते हैं, तो हम इस तात्कालिक लड़ाई को अवश्य जीतेंगे!

लेकिन, हम यहां नहीं रुक सकते। आइए, हम भारतीय और विदेशी पूंजीपतियों के निजीकरण और उदारीकरण के माध्यम से वैश्वीकरण की रणनीति के खि़लाफ़ बड़े संघर्ष का भाग बनें। वर्तमान व्यवस्था बड़े पूंजीपतियों के हितों में चलती है। यही कारण है कि वे समृद्ध हो रहे हैं, जबकि करोड़ों मज़दूरों, किसानों और अन्य मेहनतकश लोगों का जीवित रहना मुश्किल हो रहा है। सरकारें हमारे हितों के खि़लाफ़ काम करती हैं क्योंकि वास्तव में वे शासक पूंजीपति वर्ग की प्रबंधक हैं। उनका काम लोगों को बेवकूफ बनाना है, एक गुट के लोगों को दूसरे के खि़लाफ़ भड़काना है, लोगों को विभाजित करना है ताकि बड़े पूंजीपति शासन कर सकें। पूंजीपतियों की वर्तमान व्यवस्था और शासन मज़दूरों तथा किसानों के कल्याण के लिए नहीं है और इसे बदलना होगा। अंततः हमें लड़ाई अपने देश में मज़दूरों और किसानों के शासन की स्थापना के लिए करनी होगी। यह क़दम ही उन सभी लोगों की सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा जो समाज में सभी प्रकार के धन का सृजन करते हैं।

भाइयों और बहनों!

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी आपकी न्यायोचित लड़ाई के समर्थन में आपके साथ खड़ी है और आपकी एकता का समर्थन करती है। आइए, हम सरकार की निजीकरण योजनाओं को हराने के लिए कामगारों और उपयोगकर्ताओं की एकता की दिशा में काम करें। आइए, हम इस बात पर जोर दें कि सार्वजनिक धन से निर्मित किसी भी क्षेत्र का निजीकरण स्वीकार्य नहीं है। आइए, हम अपनी अर्थव्यवस्था को पुनर्दिशित करने के लिए काम करें ताकि निजी संपत्ति को अधिकतम करने के बजाय, वह सभी को “सुख” और “सुरक्षा” प्रदान करे!

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महाराष्ट्र के बिजली वितरण    असामाजिक    निजीकरण    विरोध    Jan 16-31 2019    Statements    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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