मज़दूर वर्ग की सर्व हिन्द सफल हड़ताल

8-9 जनवरी को मज़दूर वर्ग ने अपनी लंबे समय से उठाई जा रही मांगों को लेकर दो दिवसीय सफल हड़ताल की। इस हड़ताल का आह्वान 28 सितम्बर, 2018 को नई दिल्ली में आयोजित ट्रेड यूनियनों के संयुक्त अधिवेशन ने किया था। इस अधिवेशन में देशभर की विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मज़दूर संगठनों व फेडरेशनों के हजार से अधिक नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

इस हड़ताल को एटक, सी.आई.टी.यू., हिन्द मज़दूर सभा, ए.आई.यू.टी.यू.सी., यू.टी.यू.सी., टी.यू.सी.सी., ए.आई.सी.सी.टी.यू., इंटक, सेवा, एल.पी.एफ. और मज़दूर एकता कमेटी सहित देशभर की तमाम यूनियनों और फेडरेशनों ने अगुवाई दी।

Women workers in Azad Maidan Mumbai Mazdoor Ekta Committee
Odisha KSRTC strike in Bengaluru
Haryana-all-india-strike Bengaluru

देश की कम्युनिस्ट और वामपंथी पार्टियों ने हड़ताल को कामयाब करने के लिए हड़ताल से पूर्व देशभर में कई संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किए।

हड़ताल में बैंक, बीमा, डाक, बंदरगाह, परिवहन, कोयला व खनन उद्योग, ऊर्जा तथा रक्षा क्षेत्र से जुड़े लाखों कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हड़ताल के दौरान इन सभी क्षेत्रों में कामकाज ठप्प रहा। विश्वविद्यालयों, कालेजों और स्कूलों के शिक्षक भी हड़ताल में शामिल हुये। श्रमिकों और छात्रों ने जोश के साथ हड़ताल में भाग लिया। स्वास्थ्य सेवाओं, वन, बिजली, म्युनिसिपल सेवाओं के कर्मी इस दौरान हड़ताल पर रहे। संचार व टेलीफोन, एम.टी.एन.एल., बी.एस.एन.एल. के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में हिस्सा लिया।

South Delhi Bihar
Shimla Srinagar
Bank workers Banner

इस हड़ताल के दौरान तिपहिया, टैक्सी, प्राइवेट बस चालकों और ऑपरेटरों, गैस एजेंसियों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के मज़दूरों ने कामकाज ठप्प रखा।

पूरे देश में करोड़ों मज़दूरों, मेहनतकशों और अनियमित मज़दूरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया और सरकार के प्रति अपना गुस्सा प्रकट किया।

हड़ताल के ज़रिए देश के मज़दूर वर्ग ने, सरकार द्वारा पूंजीपति वर्ग की सेवा में उठाये जा रहे मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी और जन-विरोधी क़दमों का विरोध किया।

मज़दूर वर्ग ने सरकार के सामने मांग रखी कि पूंजीपति वर्ग के हित में किए जा रहे श्रम कानूनों में सुधारों को वापस लिया जाये, निजीकरण और उदारीकरण के कार्यक्रम को रद्द किया जाये, जनता की जेब काटकर पूंजीपतियों की तिजौरियां भरना बंद किया जाये। मज़दूरों ने मांग रखी कि बैंकिंग और व्यापार का राष्ट्रीयकरण और सामाजीकरण किया जाये, महंगाई को ख़त्म किया जाये और एक सर्वव्यापी सार्वजनिक वितरण व्यवस्था स्थापित की जाये।

मज़दूरों ने एक बार फिर अपनी लंबित मांगों को उठाया कि ठेकेदारी को ख़त्म किया जाए, समान काम के लिये समान वेतन और सुविधाओं सहित सामाजिक सुरक्षा दी जाए, न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए दिया जाए, बोनस-ई.पी.एफ. की सीलिंग को ख़त्म किया जाए, ग्रेच्युटी की सीलिंग ख़त्म की जाये, सभी को पेंशन दी जाए, 45 दिनों के अंदर ट्रेड यूनियन को पंजीकृत किया जाए, श्रम कानूनों में मज़दूर-विरोधी बदलावों को रद्द किया जाए, निजीकरण के कार्यक्रम को रोका और वापस लिया जाए, आदि।

हड़ताल में उतरे मज़दूरों ने केन्द्र सरकार व राज्यों की सरकारों की तरफ से जारी की गई चेतावनियों की परवाह नहीं की। इन चेतावनियों में मज़दूरों पर हड़ताल में शामिल होने पर कड़ी कार्यवाही की धमकी दी गई थी। कुछ राज्यों में, काले कानून एस्मा के तहत हड़ताल पर उतरे मज़दूरों को गिरफ्तार किया गया।

देश के महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा चेन्नई के साथ-साथ, सैकड़ों अन्य शहरों तथा कस्बों में कार्यरत हजारों-लाखों श्रमिकों ने पूंजीवादी व्यवस्था और इसकी नीतियों के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरकर, रास्तों को रोका और कई जगहों पर रेलगाड़ियों को भी रोक दिया। जगह-जगह धरने आयोजित किये। उन्होंने मानव श्रृंखलायें बर्नाइं, जुलूस निकाले, प्रदर्शन और नुक्कड़ सभायें कीं।

अलग-अलग राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों में हड़ताल की गई। औद्योगिक श्रमिकों के अलावा, खेतीहर मज़दूरों, आंगनवाड़ी, आशा और मध्याह्न भोजन के कर्मियों और निर्माण मज़दूरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। कई किसान संगठनों ने इस हड़ताल के समर्थन में ग्रामीण इलाके बंद रखे। 

यह देशव्यापी हड़ताल साफ-साफ दिखाती है कि मज़दूर वर्ग और मेहनतकश लोग पूंजीपतियों के बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ और अपने सांझे हितों के लिये आज बढ़-चढ़कर संघर्ष कर रहे हैं। मज़दूर-मेहनतकश कार्यक्षेत्र, इलाका, भाषा, धर्म, जाति, लिंग, आदि के आधारों पर उन्हें बांटने की कोशिशों को नाक़ामयाब करते हुये, एकजुट होकर संघर्ष में उतर रहे हैं।

मज़दूर एकता लहर इस हड़ताल को क़ामयाब करने के लिये देश के मज़दूर वर्ग को इंक़लाबी सलाम करती है।

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मजदूर वर्ग के लिये राज्य सत्ता को अपने हाथ में लेने की जरूरत23-24 दिसम्बर, 2011 को मजदूर वर्ग गोष्ठी में प्रारंभिक दस्तावेज कामरेड लाल सिंह ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से पेश किया। मजदूर वर्ग के लिये राज्य सत्ता को अपने हाथ में लेने की जरूरत शीर्षक के इस दस्तावेज को, गोष्ठी में हुई चर्चा के आधार पर, संपादित किया गया है और केन्द्रीय समिति के फैसले के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।

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