तमिलनाडु के शिक्षकों की हड़ताल

22 जनवरी, 2019 से तमिलनाडु की ज्वाइंट एक्शन कमेटी आॅफ टीचर्स आर्गनाइजेशन - गवरमेंट एम्प्लाइज़ आर्गनाइजेशन (जे..सी.टी..-जी...) के सदस्य अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राज्य सरकार द्वारा दी गई तमाम तरह की धमकियों कि काम नहीं, तो वेतन नहींकी घोषणा के बावजूद तमिलनाडु के शिक्षक और सरकारी कर्मचारी अपनी हड़ताल को जारी रखे हुए हैं। इस हड़ताल से पूरे राज्य के सरकारी स्कूल प्रभावित हुए हैं।

JACTO strike
 
JACTO strike

हड़ताल का ऐलान करते हुए जे..सी.टी..-जी... ने कहा कि राज्यभर की 175 यूनियनों में संगठित उनके 10 लाख से अधिक सदस्य इस हड़ताल में हिस्सा लेंगे। उनकी मांग में शामिल है, पुरानी पेंशन को फिर से बहाल करना, वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार उनके बकाया रुपयों का भुगतान करना, और तमिलनाडु में माध्यमिक शिक्षकों के वेतन को केंद्र स्तर पर शिक्षकों को मिलने वाले वेतन के बराबर करना (बॉक्स देखिये)

25 जनवरी को राज्य सरकार ने हड़ताल पर बैठे शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों पर कार्यवाही करते हुए 450 कर्मचारियों को नौकरी से निलंबित कर दिया। ख़बरों से पता चलता है कि सरकार ने जे..सी.टी..-जी... के कई प्रमुख नेताओं को चर्चा के बहाने सथूवाचारी जिला पुलिस कार्यालय में बुलाकर उनको गिरफ़्तार कर लिया और उसी रात नौ अन्य प्रमुख नेताओं को पुलिस ने थिरुमलाई में गिरफ़्तार कर लिया। हड़ताल के दौरान प्रदर्शन कर रहे कई शिक्षकों को भी गिरफ़्तार किया गया है। इसके साथ-साथ सरकार, सरकारी स्कूलों में अस्थायी शिक्षकों को नियुक्त करने की योजना बना रही है।

यह कोई पहला वाकया नहीं है जब तमिलनाडु के शिक्षक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर गए हैं। इससे पहले उन्होंने अक्तूबर 2018 और उसके बाद दिसम्बर 2018 में भी हड़ताल की थी।

जे..सी.टी..-जी... की मांगें

योगदान पेंशन योजना को ख़त्म करना और 1 अप्रैल, 2003 के बाद नौकरी पर लगने वाले सभी को पुरानी पेंशन योजना के तहत शामिल करना, क्योंकि नई पेंशन योजना में योगदान भी देना होता है और पेंशन सुनिश्चित नहीं होती।

तमिलनाडु में माध्यमिक शिक्षकों के वेतन को केंद्र स्तर पर शिक्षकों को मिलने वाले वेतन के बराबर करना

सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन में अंतर को ख़त्म करना और उसे स्वीकृति देना।

विशेष अवधि के वेतन स्तर और संविदा वेतन स्तर को ख़त्म करना।

सभी अंश-कालीक कर्मचारियों और शिक्षकों को नियमित करना।

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार 21 महीने का बकाया वेतन अदा करना

5000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की योजना को ख़ारिज करना

3500 प्राथमिक स्कूलों और माध्यमिक स्कूलों के विलयन को रोकना और 3500 मध्याह्न भोजन केन्द्रों को बंद किये जाने से रोकना।

राज्य के मुख्य सचिव ने कहा है कि हड़ताल में हिस्सा लेना और सरकार के सामान्य कामकाज में बाधा डालना तमिलनाडु गवरमेंट सर्वेन्ट्स कंडक्ट रूल्स (तमिलनाडु सरकार कर्मचारी आचार नियमों) का उल्लंघन है और इसे गैर-कानूनी माना जायेगा और जितने दिन शिक्षक और कर्मचारी काम पर नहीं आते हैं उतने दिनों के वेतन को काट लिया जायेगा। उन्होंने आगे ऐलान किया है कि जो कर्मचारी देहाड़ी पर काम करते हैं या जिनको एकमुश्त वेतन मिलता है, अगर ऐसे कर्मचारी हड़ताल करते हैं तो उनको तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर दिया जायेगा। लेकिन मुख्य सचिव और सरकार इस बात को नज़रंदाज़ नहीं कर सकते कि कर्मचरियों को उनके बकाया वेतन से वंचित रखना भी अपने फर्ज़ से गद्दारी करने जैसा है।

शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की मांगें पूरी करने और इस मसले को हल करने की दिशा में सरकार कोई भी कोशिश नहीं कर रही है। इसके ठीक उल्टा सरकार शिक्षकों की एकता को तोड़ने के लिए तमाम पैंतरे अपना रही है। तमिलनाडु सरकार के एक मंत्री ने कहा कि शिक्षक और सरकारी कर्मचारी सरकार के सामने ऐसी मांग न उठायें जिसको सरकार पूरा नहीं कर सकती। सरकार यह दावा कर रही है कि यदि सरकार पुरानी पेंशन योजना की मांग को लागू करती है तो सरकार कंगाल हो जाएगी। एक विशेषज्ञ समितिकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार यह दवा कर रही है कि पेंशन योजना को लागू करने के लिए सरकार को कर्ज़ उठाना पड़ेगा और फिर सरकार के पास कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए कोई पैसा नहीं बचेगा।

सरकार का यह दवा कि सरकार कर्मचारियों के लिए जीने-लायक वेतन और वाजिब पेंशन मुहैया नहीं करा सकती, इस बात को मेहनतकश लोग स्वीकार नहीं कर सकते। जब कभी मेहनतकश लोग अपने लिए जीने-लायक वेतन की मांग करते हैं तो सरकार यही बहाना देती है। ऐसी सरकारें लोगों के कल्याण के बारे में बिलकुल भी चिंतित नहीं हैं और चुनाव के समय वोट बटोरने के लिए लुभावने वादे करती हैं। तमिलनाडु हो या कोई अन्य राज्य मौजूदा व्यवस्था में अर्थव्यवस्था की दिशा मेहनतकश लोगों के लिए रोज़गार मानव जैसे जीने की हालत मुहैया नहीं कर सकती। यह अर्थव्यवस्था केवल मुट्ठीभर इजारेदार पूंजीपतियों के दावों को पूरा करने के लिए बनायी गयी है। इस संदर्भ में राज्य का बजट मेहनतकश लोगों के हितों की सेवा का तंत्र नहीं है। इसलिए किसी एक तबके के मेहनतकश लोगों की मांगों को किसी अन्य तबके के मेहनतकश लोगों के मांगों के खि़लाफ़ खड़ा किया जाता है, ताकि वे आपस में लड़ते रहें और उनकी मांगों को बदनाम किया जा सके।

बेहतर जीवन जीने और काम की बेहतर हालत के लिए देशभर के शिक्षकों का संघर्ष तेज़ होता जा रहा है। सभी शिक्षकों और मेहनतकश लोगों के बीच की एकता से ही उनकी इस मांग को हासिल किया जा सकता है।

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Feb 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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