संपादक को पत्र - नए समाज के संघर्ष में महिलाएं सबसे आगे!

प्रिय संपादक महोदय,

महिला दिवस के अवसर पर लेख “नए समाज के संघर्ष में महिलाएं सबसे आगे!” को पढ़कर समझ में आया कि महिलाओं का असली दुश्मन पुरुष नहीं है बल्कि यह अर्थव्यवस्था है - जिसकी दिशा अमानवीय और पूंजी-केंद्रित है। यह व्यवस्था महिला समेत सभी मेहनतकश श्रमजीवियों का दुश्मन है क्योंकि इसका सार ही जन-विरोधी है।

इस लेख ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ऐसा बिलकुल नहीं है कि महिलाएं केवल अपने लिए ही संघर्ष करती हैं। हमारे देश का इतिहास भी गवाह है कि महिलाएं देश की आज़ादी के संघर्ष में भी आगे रही हैं। महिलाओं ने हमेशा से समाज के सभी दबे-कुचले वर्गों के संघर्ष में साथ दिया है और आज भी दे रही हैं, क्योंकि वे जानती हैं कि हम सब की लड़ाई एक ही है। वे जानती हैं कि इस अर्थव्यवस्था को उखाड़कर बदल देने से ही आज़ादी सुनिश्चित की जा सकती है। सभी को महिलाओं के साथ मिलकर लड़ना होगा।

प्रेरणा कुमारी,
उत्तर प्रदेश

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Mar 1-15 2019    Letters to Editor    Popular Movements     Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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