महिलाओं का संघर्ष हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के लिए

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 1 मार्च, 2019

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हिन्दोस्तान और सारी दुनिया में, अपने अधिकारों के लिए और एक नए समाज के लिए संघर्ष कर रही लाखों-लाखों महिलाओं को सलाम करती है।

दुनिया के सभी देशों में महिलाएं अपने अधिकारों की मांग कर रही हैं, महिला बतौर तथा मानव बतौर। महिलाएं मेहनतकश पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर, पूंजीवादी शोषण, साम्राज्यवादी हमले और जंग को ख़त्म करने की मांग कर रही हैं।

हिन्दोस्तान की महिलाओं ने बलात्कार और यौन उत्पीड़न के खिलाफ़ चुप्पी तोड़ने की हिम्मत की है। अपने मज़दूर भाइयों के साथ-साथ, हमारी मज़दूर बहनें रोज़गार की सुरक्षा और श्रम अधिकारों के लिए संघर्ष में आगे हैं। किसानों की रोज़ी-रोटी के अधिकार और भूमि की मालिकी की सुरक्षा के संघर्ष में महिलाएं आगे हैं। देश के अनेक इलाकों में, सैनिक शासन के चलते, नौजवानों की बेरहम हत्या और उत्पीड़न के विरोध में, महिलाएं आगे हैं।

2018 में, दुनियाभर में और अपने देश में भी, महिलाओं ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की थी। महिलाएं अब इस हालत को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं कि उन पर यौन उत्पीड़न होता रहे, कि वे चुपचाप उसे सहती रहें, फिर उसके लिए पीड़ित महिला को ही दोषी बताया जाए और असली अपराधी बच के निकल जायें। 22 फरवरी, 2019 को यौन हमलों से पीड़ित 5000 से अधिक महिलाओं ने सम्मान से जीने के अधिकार की मांग करते हुए, एक विशाल जन-प्रदर्शन किया।

सम्मान के लिए जन-प्रदर्शन में एक अगुवा भागीदार भंवरी देवी थी। 25 वर्ष पहले, बाल विवाह रोकने के सरकारी कार्यक्रम को लागू करने के दौरान, उनका बलात्कार किया गया था। उस भयानक काण्ड के अपराधियों को आज तक सज़ा नहीं मिली है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर के एक अनाथ आश्रम में, अनाथ महिलाओं और बालिकाओं पर उन्हीं अफ़सरों ने बार-बार बलात्कार किया, जिन्हें उनकी रक्षा की ज़िम्मेदारी दी गयी थी। इन गुनहगारों को सज़ा देने, इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया जाता है। सरकार कमीशन बिठाने, पुलिस बंदोबस्त बढ़ाने, महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू करने, जैसे घिसे-पिटे, परखे हुए क़दमों का सहारा लेती है। इन क़दमों का उद्देश्य है महिलाओं के लिए इन्साफ और महिलाओं पर शोषण-दमन को ख़त्म करने की मांग करने वालों के गुस्से को ठंडा करना।

हमारे हुक्मरान वर्ग को हिन्दोस्तान के “आर्थिक संवर्धन” पर बहुत गर्व है। परन्तु अपने देश में पूंजीवादी विकास के साथ-साथ, पुराने, पिछड़े रीति-रिवाज़ ख़त्म नहीं हुए हैं, जाति और लिंग के आधार पर शोषण-दमन ख़त्म नहीं हुआ है। बढ़ती संख्या में महिलाएं नौकरी करने निकल पड़ी हैं, परन्तु आज तक उन्हें समान काम के लिए समान वेतन नहीं मिलता है।

पूंजीवाद के विकास से पितृसत्ता का अंत नहीं हुआ है। बल्कि, पूंजीवादी विकास के चलते, समाज में महिलाओं का स्थान और नीचे गिर गया है। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को लगातार यौन हिंसा और बलात्कार के ख़तरों का सामना करना पड़ता है। ऐसी घटनाएं कोई अपवाद नहीं बल्कि स्वाभाविक हैं। महिलाओं पर अत्याचार और महिलाओं का असम्मान वर्तमान आर्थिक व्यवस्था तथा इसकी हिफ़ाज़त करने वाली राजनीतिक व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा है।

हिन्दोस्तान के संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में लिखा गया है कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिलेंगे, कि महिलाओं को शोषण-दमन से मुक्त किया जाएगा। परन्तु ये नीतिगत उद्देश्य मात्र हैं, जिन्हें शायद भविष्य में कभी पूरा किया जाए। इन्हें न मिलने पर कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती।

हमारा संविधान राज्य को पूरा अधिकार देता है कि कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर, लोगों के “बुनियादी अधिकारों” को भी छीना जाये। महिलाओं के अधिकारों की कोई गारंटी नहीं है। हक़ीक़त में तो हर दिन और हर पल, महिलाओं के अधिकारों का हनन होता है। छोटे से छोटे अधिकार के लिए भी महिलाओं को सड़कों पर आकर अपनी आवाज़ उठानी पड़ती है।

संविधान के अनुसार, फैसले लेने का अधिकार मंत्रीमंडल की हाथों में संकेंद्रित होता है। मंत्रीमंडल उस पार्टी के सदस्यों से बनता है जिसे संसद में बहुमत मिलता है। यह मंत्रीमंडल इजारेदार पूंजीवादी घरानों की अगुवाई में पूंजीपति वर्ग के हित में कानून बनाता है और नीतियां अपनाता है। विपक्ष की पार्टियां सरकार के क़दमों के खिलाफ़ खूब चिल्लाती हैं और सत्तापक्ष में आने की अपनी बारी का इंतजार करती हैं।

पूरी राजनीतिक व्यवस्था इजारेदार पूंजीवादी घरानों की अगुवाई में पूंजीपति वर्ग की मनमर्ज़ी को लागू करने के लिए बनायी गयी है। राजनीतिक ताक़त इन मुट्ठीभर शोषकों के हाथों में है और वे ही पूरे समाज की दिशा को तय करते हैं। जब लोगों का गुस्सा ज्यादा बढ़ जाता है, तब हुक्मरान वर्ग चुनाव आयोजित करके, अपने प्रबंधक दल को बदल देता है। एक पार्टी की जगह पर दूसरी आ जाती है परन्तु अर्थव्यवस्था और सरकार की नीति की दिशा नहीं बदलती। हर नव-निर्वाचित सरकार उदारीकरण और निजीकरण के उसी पुराने कार्यक्रम को नए-नए तौर-तरीकों से चलाती है।

चुनाव अभियानों का मक़सद है लोगों को पूंजीपति वर्ग की इस या उस पार्टी या गठबंधन के पीछे लामबंध करना। इन पार्टियों के आपस में गला-काट स्पर्धा चलती है और धर्म व जाति के आधार पर लोगों को बांटा जाता है। ‘बांटो और राज करो’, यह हुक्मरान पूंजीपति वर्ग का पसंदीदा तरीका है।

भाजपा कांग्रेस पार्टी को समाज की सारी बुराइयों के लिए दोषी बताती है। कांग्रेस पार्टी और उसके मित्रदल भाजपा को इन बुराइयों के लिए ज़िम्मेदार बताते हैं और “लोकतंत्र बचाओ” का नारा दे रहे हैं। परन्तु वर्तमान लोकतंत्र की व्यवस्था को बचाने से हमें कोई फायदा नहीं है, क्योंकि यह इजारेदार पूंजीवादी घरानों की अगुवाई में पूंजीपति वर्ग की डिक्टेटरशिप के सिवाय कुछ और नहीं है।

मेहनतकश महिलाओं और पुरुषों को एकजुट होकर, पूंजीपति वर्ग की वर्तमान सत्ता की जगह पर, एक नयी राजनीतिक सत्ता स्थापित करने के लिए संघर्ष करना होगा। उस नयी राजनीतिक सत्ता में अर्थव्यवस्था लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने की दिशा में चलाई जायेगी, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने की दिशा में। वह मज़दूर-मेहनतकश बहुसंख्या की हुकूमत होगी, जो इंसान द्वारा इंसान के हर प्रकार के शोषण से मुक्त समाज की रचना करेगी। वह एक नए गणराज्य का निर्माण करेगी, जिसका एक नया संविधान होगा, जो संप्रभुता लोगों के हाथ में दिलाएगा और महिलाओं के अधिकारों व सभी मानव अधिकारों को अल्लंघनीय मानेंगे।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी देश की महिलाओं से आह्वान करती है कि हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के लिए संघर्ष में आगे आयें। हम एक ऐसी व्यवस्था की रचना करें जिसमें समाज के उत्पादनकर्ता बतौर तथा नयी पीढ़ी की जन्मदाता व पालनकर्ता बतौर, महिलाओं की भूमिका को सम्मान और आदर सुनिश्चित हो।

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Mar 1-15 2019    Statements    History    Popular Movements     Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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