मुंबई महानगर पालिका की आरोग्य सेविकाओं का आंदोलन

मुंबई महानगर पालिका की 4000 आरोग्य सेविकाओं ने अपनी मांगों के लिए 28 जनवरी, 2019 से काम-बंद आंदोलन शुरू किया।

बुह्नमुंबई महानगर पालिका द्वारा 4 हजार आरोग्य सेविकाओं को 20 सालों से महानगर पालिका का कर्मचारी न मानकर उनका शोषण किया जा रहा है। 25 जनवरी, 1999 से उनकी मांगों पर मुंबई महानगर पालिका प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। 2002 में इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने फैसला दिया था कि आरोग्य सेविकाएं बुह्नमुंबई महानगर पालिका की ही कर्मचारी हैं। उसके विरोध में बुह्नमुंबई महानगर पालिका प्रशासन ने उच्च अदालत में अपील की। महानगर पालिका की उस अपील को उच्च अदालत ने ख़ारिज़ कर दिया। उसके बाद भी महानगर पालिका ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया।

जब अगस्त 2018 में आरोग्य सेविकाओं ने हड़ताल की तब मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि मुंबई महानगर पालिका कमिश्नर को निर्देश देकर उनकी मांगों पर चर्चा करके उनके सवालों को हल करने को कहा जायेगा। तभी आरोग्य सेविकाओं ने हड़ताल ख़त्म की पल्स पेलियो अभियान में हिस्सा लेने के लिए मान गए।

न्यूनतम वेतन नियम, गर्भावस्था नियम, प्राविडेंट फंड और दूसरे सामाजिक सुविधाओं के नियमों, आदि को लागू करवाने के लिये 28 जनवरी से मुंबई महानगर पालिका की 4000 आरोग्य सेविकाओं ने काम बंद करके पुनः आंदोलन शुरू किया है। उन्होंने 29 जनवरी को आज़ाद मैदान में धरना भी किया। कामगार भवन पर भी आंदोलन किया और कामगार आयुक्त से बातचीत हुई। उसमें केवल प्रसुति अवकाश तथा पी.एफ. की मांगें मान ली गईं लेकिन अभी भी शेष मांगों का हल नहीं हुआ है। इसलिये महानगर पालिका आरोग्य सेवा कर्मचारी संघठना ने ऐलान किया है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

मजदूर एकता लहर आरोग्य सेविकाओं की बिल्कुल जायज़ मांगों का समर्थन करती है।

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Mar 16-31 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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