घर के हक़ के लिए कपड़ा मिल मज़दूरों का आंदोलन

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28 फरवरी को मकान तथा पुर्नवास के सवाल को लेकर मुंबई के कपड़ा मिल मज़दूरों तथा उनके वारिसों का विशाल मोर्चा मुंबई मे संपन्न हुआ। मोर्चे में करीब 4 हजार मज़दूर शामिल हुए। महाराष्ट्र सरकार के निर्णय के अनुसार 1 लाख, 71 हजार मिल मज़दूरों और उनके वारिसों में से केवल 17 हजार मिल मज़दूरों तथा उनके वारिसों को ही मकान मिल सकते हैं। बाकी के 90 प्रतिशत मिल मज़दूरों तथा उनके वारिसों को कब और कौन सी जगह पर मकान मिलेंगे यह बहुत बड़ा सवाल मज़दूरों को परेशान कर रहा है। भाजपा-शिवसेना सरकार जब से सत्ता में आई हैं तब से एक भी नया मकान बनाने का काम नहीं हुआ है। सरकार घरों की लॉटरी निकालने की फंसाने वाली स्कीम चलाने की कोशिश कर रही है। उससे तो मकान के लिये सालों-साल इंतज़ार करना पड़ेगा। इसलिये मज़दूर मांग कर रहे हैं कि या तो उनको तथा उनके वारिसों को मकान का हक़ पत्र दो नहीं तो मकान के लिये ज़मीन दो। 25 हजार मज़दूरों ने एक साथ आकर गृह निर्माण सहकार संस्था की स्थापना करके मुख्यमंत्री से मकान के लिये ज़मीन देने की मांग की है।

मिलों को बंद करके मिल मालिकों ने दो लाख से भी ज्यादा मज़दूरों को बेरोज़गार कर दिया है और मिल चलाने के लिए किराये पर दी गई ज़मीन को हड़प लिया है। इस ज़मीन का छोटा सा भाग सरकार को सार्वजनिक कार्य के लिए मिला है। इस ज़मीन का इस्तेमाल सरकार को मिलों के बंद होने की वजह से बेघर हुए मज़दूरों के लिए घर बनाने के लिए करना चाहिए। कुछ समय पहले सरकार ने नमक की खेती के एरिया की हजारों एकड़ ज़मीन मकान बनाने के लिये खोल दी है। यह ज़मीन बिल्डरों को इनाम के तौर पर बांटने के बजाय यदि सरकार उसमें से 300 एकड़ जमीन भी मकान बनाने के लिये देती है तो मिल मज़दूरों तथा उनके वारिसों के घरों का सवाल हल हो जायेगा। इसलिये सरकार पर दबाव डालने के लिये मुंबई के अलग-अलग कपड़ा मिलों के मज़दूर तथा उनके वारिस महाराष्ट्र के गांव-गांव से मोर्चे में सम्मलित हुए।

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Mar 16-31 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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