न्यूजीलैण्ड में 50 मुसलमान श्रद्धालुओं की नस्लवादी हत्या

15 मार्च, 2019 को ब्रेंटों टर्रांट नाम के एक 28 वर्षीय व्यक्ति ने न्यूजीलैण्ड की दो मस्जिदों में इकट्ठा हुए मुसलमान श्रद्धालुओं पर मशीनगन से हमला किया। इस हमले में 49 श्रद्धालु मारे गए और 34 श्रद्धालुओं को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया। इनमें से कई बेहद गंभीर हालत में थे। ये श्रद्धालु दुनियाभर के कई देशों से आये हैं इसमें शामिल हैं हिन्दोस्तान, पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, सोमालिया और तुर्की। इस हमले का सबसे नन्हा शिकार एक 3 वर्षीय लड़का है जो कि एक सोमालियाई शरणार्थी की संतान है।

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टर्रांट को गिरफ़्तार कर लिया गया है और उस पर हत्या का आरोप लगाया गया है। अपने इस गुनाह के दो दिन पहले इस व्यक्ति ने न्यूजीलैण्ड के प्रधानमंत्री और अन्य सरकारी अधिकारियों को एक 74 पन्नों का नफ़रत-भरा ऐलाननामा भेजा था। इस ऐलाननामे में उसने आप्रवासियों को “हमलावर” करार देते हुए ऐलान किया था कि उसका मक़सद “यूरोप में आने वाले आप्रवासियों की दर को कम करना है”। उसने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तारीफ़ करते हुए लिखा कि “वह हमारी नयी श्वेत पहचान और सांझे लक्ष्य का प्रतीक है”। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि टर्रांट कोर्ट में अपनी पैरवी खुद करेगा और तमाम एशियाई देशों से आये मुस्लिम आप्रवासियों के खि़लाफ़ नस्लवादी नफ़रत उगलते हुए अपने गुनाह को सही ठहराएगा।

यह कोई अचानक हुई एक घटना नहीं है। उत्तरी अमरीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में अप्रवासी लोगों और ख़ास तौर से मुसलमान लोगों के खि़लाफ़ इस तरह के नफ़रत भरे गुनाह बार-बार बढ़ती तादाद में हो रहे हैं।

न्यूजीलैण्ड के सिख लोगों ने असीम सहानुभूति का परिचय दिया

क्राइस्टचर्च में हादसे के तुरंत बाद “गुरु नानक फ्री किचन, ऑकलैंड” और यंग सिख प्रोफेशनल्स नेटवर्क न्यूजीलैण्ड ने मुस्लिम समुदाय की सहायता करने की पहल की। जिस जगह हादसा हुआ उस स्थानों पर आने वाले लोगों को खाना खिलाने के लिए लंगर आयोजित करने के अलावा सिख समुदाय के लोगों ने मृतकों के शरीर को धोकर साफ़ करने और उनको दफनाने के लिए तैयार करने का जिम्मा उठाया। 

सिख समुदाय के प्रवक्ता ने ऐलान किया कि “पूरा सिख समुदाय अपने मुसलमान भाइयों के साथ मजबूती के साथ खड़ा है, क्योंकि आतंकवाद की यह घटना एक इबादत के ठिकाने पर हुई है और हम सभी उनकी सहायता करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।” न्यूजीलैण्ड के सभी इलाकों के गुरुद्वारों को मुस्लिम समुदाय की सहायता करने की अपील करते हुए यंग सिख प्रोफेशनल्स ने एक बयान जारी किया जिसमें यह कहा गया कि “हमारे देश में इस तरह की हिंसा और उससे फैलने वाली नफ़रत के लिए कोई जगह नहीं है और यह हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि हम एक साथ उठकर ऐलान करें कि - नहीं, हम ऐसे नहीं हैं! क्राइस्टचर्च में हुई इस घटना से हम सबको पिट्सबर्ग, ओक क्रीक और चाल्र्सटन में हुई घटना की यादें ताजा हो जाती हैं। ये सारी घटनाएं इसी तरह की नस्ल, धर्म और जाति के आधार पर नफ़रत से प्रेरित हैं और हम पूरे समुदाय और खास तौर से अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से अपील करते हैं कि वे इस हमले की कठोर शब्दों में निंदा करें।”

न्यूजीलैण्ड के सिख समुदाय ने एक नया इतिहास रचा जब उन्होंने मुसलमान समुदाय को नमाज पढ़ने के लिए अपने गुरुद्वारों में जगह दी।

2001 में जब अमरीका में 11 सितंबर का आतंकी हमला हुआ, उसी समय से अमरीका और दुनियाभर के अन्य साम्राज्यवादी राज्य मुसलमानों को आतंकवादी करार देने और उनके बारे में शक और नफ़रत फैलाने की लगातार कोशिश करते आ रहे हैं। मुसलमानों को बर्बर, अमानवीय, असहनशील और हिंसक करार देने के लिए साम्राज्यवादियों ने हर तरह के प्रचार का इस्तेमाल किया है। अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी जी रहा एक मुसलमान इंसान जानलेवा हिंसा का शिकार बन सकता है। मुसलमान पुरुष, महिला, नौजवान और यहां तक कि बच्चों पर मॉल, विश्वविद्यालयों, बाज़ारों और सड़कों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम हमले किये गए हैं। पुलिस की आंखों के सामने मस्जिदों और नमाज की जगहों पर आगजनी और बम धमाके किये जाते हैं। मुसलमान लोगों के खि़लाफ़ नफ़रत फैलाने के लिए कार्टून और विडियो का इस्तेमाल किया जाता है। हिन्दोस्तान के लोगों ने भी देशभर में मुसलमानों को भीड़ द्वारा मारे जाने और उन पर हमलों की घटनायें अपनी आंखों से देखी हैं। कई मामलों में सरकारी अधिकारी और सत्ता में बैठे लोग नफ़रत भरा प्रचार शुरू करते हैं। जो लोग इस तरह के हमले आयोजित करते हैं उनको कोई सज़ा नहीं होती है।

इन आप्रवासियों का अत्याधिक शोषण करने, उनको बांटने और उनको गुमराह करने के लिए ये ताक़तें नस्लवाद, सांप्रदायिकता और नफ़रत का इस्तेमाल करती हैं, ताकि लोग अपने असली दुश्मन को न पहचान पाएं।

जो लोग सत्ता में बैठे हैं उनको लोगों की ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त करने के लिए जवाबदेह ठहराना होगा। उनको इस्लामोफोबिया (मुसलमानों को ख़तरनाक करार देना) और तमाम अन्य तरह के पूर्वाग्रहों और नफ़रत को फैलने से रोकने के लिए जवाबदेह ठहराना होगा।

लोग हर तरह के नस्लवाद और साम्प्रदायिकता को ठुकरा रहे हैं। लोग धर्म, रंग और राष्ट्रीय पहचान के आधार पर किये जा रहे हर प्रकार के हमलों को ख़त्म करना चाहते हैं।

लोगों का यह जज्बा सभी जन प्रदर्शनों में साफ झलकता है, जो कि मुसलमान श्रद्धालुओं पर हाल ही में हुए हमलों के जवाब में न केवल न्यूजीलैण्ड में बल्कि दुनियाभर में आयोजित किये गए हैं।

क्राइस्टचर्च के हाई स्कूल के सैकड़ों बच्चे हेगले पार्क में अल नूर मस्जिद के सामने इकट्ठा हुए, जहां पर पहला और सबसे कातिलाना हमला हुआ था। अलग-अलग राष्ट्रीयताओं और धर्म के छात्रों ने एकजुट होकर एक रैली आयोजित की। इन हमलों में मारे गए लोगों की याद में उन्होंने मोमबत्तियां जलाईं। उन्होंने गीत गाए और माओरी लोगों का पारंपरिक नृत्य किया। पार्क में अपनी श्रद्धांजलि देने आये सैकड़ों लोग भी उनके साथ रैली में शामिल हो गए।

लोगों को सभी तबकों के लोगों के मानव अधिकारों की हिफ़ाज़त में और हर प्रकार के नस्लवाद, साम्प्रदायिकता और नफ़रत के खि़लाफ़ अपनी एकता को और मजबूत करना होगा। लोगों को इस झूठे प्रचार में भटकने से बचाना होगा कि समस्या किसी की धार्मिक आस्था या रिवाज़ों की वजह से है।

 

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