हिंदोस्तान ग़दर पार्टी की स्थापना की 106वीं वर्षगांठ मनाई गई

21 अप्रैल को हिंदोस्तान ग़दर पार्टी की स्थापना का 106वीं वर्षगांठ थी। इसको मनाने के लिए देश भगत यादगार कमेटी ने जलंधर के देश भगत यादगार हाल में एक सार्वजानिक सभा का आयोजन किया था। 

हिंदोस्तान ग़दर पार्टी हिन्दोस्तानी लोगों द्वारा स्थापित की जाने वाली पहली ऐसी राजनीतिक पार्टी थी जिसने बस्तीवादी राज्य को क्रांति द्वारा उखाड़ फेंककर हिन्दोस्तान की सम्पूर्ण मुक्ति के लिए लड़ाई लड़ी थी। समारोह का आरंभ कमेटी सदस्य कॉमरेड चिरंजी लाल कंगनीवाल द्वारा ग़दर पार्टी के ध्वज को फहराकर किया गया। 

Hindustan Ghadar Party Celebrated

मंच पर देश भगत यादगार कमेटी के अध्यक्ष, कॉमरेड गुरमीत सिंह धाडा, महासचिव, कॉमरेड गुरमीत सिंह, कमेटी सदस्य, चिरंजी लाल कंगनीवाल तथा समारोह के मुख्य वक्ता, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के इतिहास के विभागाध्यक्ष डा. जोगिन्दर सिंह, अमृतसर के भाई वीर सिंह सदन के निर्देशक, तथा नामधारी चेयर के भूतपूर्व चेयरमैन आसीन थे।  

सभी वक्ताओं ने आज हिन्दोस्तानी समाज की ज्वलंत समस्याओं के सन्दर्भ में ग़दरियों द्वारा अपनाये गए मार्ग की उपयुक्तता पर ज़ोर दिया।

कॉमरेड गुरमीत सिंह ने हिंदोस्तान ग़दर पार्टी के उद्देश्य तथा कार्यक्रम के बारे में बात की। उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार की शताब्दी के विषय पर भी बात की और सभी शहीदों को श्रद्धांजलि पेश की। उन्होंने ऐलान किया कि जलियांवाला बाग नरसंहार की शताब्दी से संबंधित समारोहों का अंत मेला ग़दरी बाबिआं दा में 1 नवम्बर, 2019 को होगा।

कॉमरेड चिरंजी लाल कंगनीवाल ने ग़दरी ध्वज का अनुमोदन करने तथा ग़दरियों के मार्ग को अपनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने खास तौर से ग़दरी आंदोलन में महिलाओं के योगदान और बलिदान की तरफ ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि हम ग़दरी ध्वज के रंग को फीका न होने दें। उन्होंने ग़दरियों के लक्ष्य को विस्तार से प्रस्तुत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिससे उनके सपने हक़ीक़त में बदले जा सकें।

डा. जोगिन्दर सिंह ने कहा कि जलियांवाला बाग नरसंहार लोगों की एकता, एकजुटता तथा संयुक्त संघर्ष का ऐतिहासिक प्रतीक है। यह नरसंहार साम्राज्यवाद तथा उसके पिट्ठुओं के खि़लाफ़ संघर्ष के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि उस समय कुछ बर्तानवी-हितैशी और संकुचित सोच वाले संगठनों ने जलियांवाला बाग नरसंहार की निन्दा नहीं की थी, इसके बजाय उन्होंने लोगों को बर्तानवी सरकार का समर्थन करने को कहा था। उन्होंने यह भी कहा कि जलियांवाला बाग नरसंहार को जितना ऐतिहासिक महत्व मिलना चाहिए वह नहीं दिया जा रहा है। मुस्लिम समुदाय के जिन क्रांतिकारी नेताओं, लेखकों और अन्य लोगों ने बलिदान किया तथा बस्तीवादी राज्य से मुक्ति पाने के लिए लड़ाई लड़ी थी, उन्हें भी देश के इतिहास में सम्मानजनक जगह नहीं दी जा रही है। हमें इसके खि़लाफ़ आवाज़ उठाने की ज़रूरत है। इसके बाद मज़दूर एकता लहर टीम ने “गदरियां दी पुकार - इंक़लाब” फिल्म दिखाई। यह फिल्म ग़दर पार्टी के इतिहास और ग़दरियों द्वारा उजागर किये गए विचार संग्रह को पेश करती है और ग़दरियों के सपनों के समाज का निर्माण करने का आह्वान करती है। इस फिल्म का निर्माण हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कॉमरेड लाल सिंह के मार्गदर्शन में किया गया है।      

मीटिंग का समापन करते हुए कमिटी अध्यक्ष कॉमरेड गुरमीत सिंह धाडा ने कहा: “आज की पीढ़ी को ग़दरियों के उत्कृष्ट उद्देश्यों, बलिदान तथा निःस्वार्थ भाव से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है तथा उनके सपनों को पूरा करने के लिए आगे आने की ज़रूरत है।”

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हिंदोस्तान ग़दर पार्टी    106वीं वर्षगांठ    Apr 16-30 2019    Struggle for Rights    History    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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