दिल्ली में मई दिवस 2019 मनाया गया : कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने मई दिवस पर पदयात्रा आयोजित की

1 मई के दिन सुबह, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ओखला फेज 2 में स्थित झुग्गी-बस्ती, संजय कालोनी की गलियों में पदयात्रा आयोजित की।

संजय कालोनी में स्थापित कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यालय को लाल झंडों से सजाया गया था। झंडों पर “मई दिवस ज़िंदाबाद!”, “कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी जिंदाबाद!”, जैसे नारे लिखे हुए थे। दीवारों और दरवाजे़ को लाल झंडों और फूलों से सजाया गया था। क्रांतिकारी गीतों से वातावरण में जोश भर गया - “आओ उठें मेरे देशवासियों .... जुल्म और सितम को मिल कर हम चूर कर दें ....नूतन प्रभात को मिलकर हम ले आयें ...”

Mayday on CGPI office Delhi_2019
Mayday Delhi_2019
Mayday Delhi_2019

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता कामरेड प्रकाश राव ने शुरू में, पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता और संजय कालोनी के निवासी, कामरेड बिरजू नायक को लोक सभा चुनाव के लिए दक्षिण दिल्ली से पार्टी के उम्मीदवार बतौर घोषित किया। उन्होंने फूलमाला के साथ बिरजू नायक का स्वागत किया और बिरजू को कुछ शब्द रखने के लिए आमंत्रित किया।

कामरेड बिरजू नायक ने इस सम्मान के लिए पार्टी को आभार व्यक्त किया। उन्होंने इलाके के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि “आप सब ने जो मुझ पर भरोसा करके, मुझे अपना उम्मीदवार बतौर खड़ा किया है, इसके लिए में आप सबका आभारी हूँ। मैं आपके लिए काम करने को वचनबद्ध हूँ”। बिरजू नायक ने समझाया की हालांकि मज़दूर-मेहनतकश समाज में बहुसंख्या में हैं, परन्तु हम जिन-जिन को चुनकर संसद में हमारी नुमायन्दगी करने को भेजते हैं, वे हमारी तमाम समस्याओं - पानी की सप्लाई, शौच व्यवस्था, सीवर, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और अन्य बुनियादी ज़रूरतों - को कभी भी संसद में नहीं उठाते हैं। जो भी सरकार आती है, वह टाटा, बिरला, अम्बानी और दूसरे देशी-विदेशी बड़े इजारेदार पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ाने का ही काम करती है। चुनाव के दिन वोट डालने के बाद, लोगों के हाथ में कोई ताक़त नहीं होती। पूंजीपतियों की एक या दूसरी पार्टी को बारी-बारी से सत्ता में लाने से हमारी कोई भी समस्या हल नहीं होगी। “इसीलिये मैं इन चुनावों में खड़ा हो रहा हूं, ताकि मेहनतकशों की आवाज़ को मैं संसद में उठा सकूं। मैं आप सब से आह्वान करता हूं कि मेरे प्रचार अभियान में जुड़िये और भारी बहुमत से मुझे जिताइये ताकि हमारी आवाज़ संसद में गूंजे”।

बिरजू नायक का चुनाव चिन्ह है पानी का टैंक, जो पार्टी कार्यालय पर प्रदर्शित था।

सैकड़ों बच्चों, नौजवानों, महिलाओं और पुरुषों ने, लाल झंडे लेकर, बिरजू नायक और कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अन्य नेताओं की अगुवाई में, बस्ती की गलियों में पदयात्रा की। ढोल की आवाज़ के साथ-साथ जोशीले नारे - “मई दिवस ज़िंदाबाद!”, “दुनिया के मज़दूरों, एक हो!”, “शासन-सत्ता अपने हाथ, जुल्म-अन्याय करें समाप्त!”, “इन्क़लाब जिं़दाबाद!” - दूर-दूर तक सुनायी दे रहे थे। कार्यकर्ताओं ने सभी निवासियों से आह्वान किया कि “संसद में मेहनतकशों की आवाज़ को बुलंद करने के लिए, बिरजू नायक, चुनाव चिन्ह पानी का टैंक, को वोट देकर जितायें”। बिरजू नायक की तरफ से मतदाताओं को सन्देश एक पर्चे के रूप में छापा गया था, जिसकी दसों-हजारों प्रतियां लोगों में बांटी गयीं। कालोनी के निवासी बिरजू नायक को बचपन से जानते हैं और उनकी जुझारू भावनाओं का आदर करते हैं। उन्होंने बिरजू नायक का पूरा-पूरा समर्थन करने का वचन दिया।

ट्रेड यूनियनों ने अपनी मांगों को लेकर मार्च और रैली की

दिल्ली में ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त मार्च और रैली की। मार्च रामलीला मैदान से शुरू हुआ और चांदनी चैक के टाउन हाल पर पहुंचकर एक जनसभा में बदल गया। अपने-अपने संगठनों के बैनरों और लाल झंडों के साथ, अपनी मांगों के नारे बुलंद करते हुए, मज़दूरों ने भीड़-भाड़ वाली सड़कों पर मार्च किया।

टाउन हॉल पर जनसभा की अध्यक्षता सहभागी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने की। सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने मज़दूरों के संघर्षों के गीत प्रस्तुत किये। ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने सभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने मई दिवस पर मज़दूरों का अभिवादन किया। उन्होंने सभी सरकारों द्वारा लागू किये जा रहे उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम, मज़दूरों के बढ़ते शोषण, ठेका मज़दूरी के बढ़ते प्रयोग, सरकार द्वारा मज़दूरों को न्यूनतम वेतन देने से इनकार करना, श्रम कानूनों के हनन, सभी क्षेत्रों में “फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट”, अधिकारों के हनन, आदि की कड़ी निंदा की। उन्होंने नफ़रत और अराजकता के माहौल और धार्मिक विचारों व रिवाज़ों, भाषा, जाति, संप्रदाय, इलाका, लिंग, आदि के आधार पर लोगों पर किये जा रहे हमलों की सख़्त खि़लाफ़त की।

मज़दूर एकता कमेटी की ओर से बिरजू नायक ने मई दिवस की जनसभा को संबोधित किया। उन्हें लोक सभा चुनावों के लिए, दक्षिण दिल्ली से कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का उम्मीदवार नामांकित किया गया है।

मई दिवस पर मज़दूरों को संबोधित करते हुए, कामरेड बिरजू नायक ने लोक सभा चुनावों के बारे में यह समझाया कि मज़दूर वर्ग को कोई फर्क नहीं पड़ता, चाहे कांग्रेस पार्टी की सरकार बने या भाजपा की। “दोनों ने टाटा, बिरला, अम्बानी और दूसरे देशी-विदेशी इजारेदार पूंजीपतियों के हित में, निजीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम को लागू किया है। दोनों ने लोगों की एकता को तोड़ने के लिए भयानक सांप्रदायिक जनसंहार आयोजित किये हैं। दोनों में से किसी ने भी न्यूनतम वेतन की हमारी लम्बे समय से उठाई जा रही मांग को पूरा नहीं किया। पूंजीपति वर्ग की एक या दूसरी पार्टी को सत्ता में लाने से हमारा शोषण-दमन ख़त्म नहीं होगा। हम मज़दूर चुनावी मैदान को पूंजीपति वर्ग की इन पार्टियों के लिए खुला नहीं छोड़ सकते। हम मज़दूरों को अपना कार्यक्रम लेकर चुनाव के मैदान में उतरना होगा”।

“दिल्ली के मज़दूरों ने उम्मीद की थी कि आम आदमी पार्टी हमारी मांगों को सुनेगी, परन्तु ये उम्मीदें झूठी निकलीं। आम आदमी पार्टी, जो कांग्रेस पार्टी के “भ्रष्टाचार के खि़लाफ़ महान योद्धा” बतौर सत्ता में आयी थी, अब उसी कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन बनाना चाहती है”, बिरजू नायक ने समझाया।

बिरजू नायक ने उन सभी की कड़ी आलोचना की, जो “सांप्रदायिक” भाजपा को हराने के नाम से, मज़दूरों को कांग्रेस पार्टी और अन्य तथाकथित “धर्मनिरपेक्ष” पार्टियों के पीछे लामबंध कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि “धर्मनिरपेक्ष” कांग्रेस पार्टी और “सांप्रदायिक” भाजपा, दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। “हम मज़दूरों को पूंजीपति वर्ग की इस या उस पार्टी को सत्ता में लाने के रास्ते को खारिज करना होगा। हमें मज़दूर वर्ग की सत्ता स्थापित करनी होगी”, उन्होंने ऐलान किया।

“कम्युनिज़्म का लाल झंडा उन अनगनित कम्युनिस्टों की कुर्बानियों का प्रतीक है, जो लडे और मरे थे, पूंजीपतियों की बेरहम हुकूमत को बरकरार रखने के लिए नहीं, बल्कि मज़दूरों का राज स्थापित करने के लिए। मज़दूर वर्ग, मेहनतकश किसान और तमाम मेहनतकश लोग इस देश की दौलत को पैदा करते हैं, न कि मुट्ठीभर पूंजीवादी शोषक। हम कम्युनिस्टों को मज़दूर वर्ग का राज स्थापित करने के संघर्ष को आगे बढ़ाना होगा। मैं इसी महान लक्ष्य के लिए खुद को समर्पित करता हूं”, उन्होंने कहा। उनकी बातों का जोरदार तालियों से स्वागत किया गया।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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