जेट एयरवेज़ बंद : एयरलाइन मज़दूरों और यात्रियों की मुश्किलों के लिए सरकार ज़िम्मेदार है

जेट एयरवेज़ ने 18 अप्रैल, 2019 से संचालन निलंबित किया है। इसकी वजह से  लगभग 22,000 मज़दूर और लाखों यात्री बुरी तरह से प्रभावित हुये हैं। जनवरी माह से मज़दूरों के वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया है। जेट एयरवेज़ के बंद होने के उपरांत, उड़ानों की कमी के कारण अन्य एयरलाइंस किराए में 3 से 4 गुना की वृद्धि करके बहुत मुनाफ़ा अर्जित कर रही हैं। सरकार ने मज़दूरों या एयरलाइन यात्रियों के हितों की रक्षा हेतु कोई भी क़दम नहीं उठाया है।

जेट एयरवेज़ को 9 भारतीय बैंकों सहित 11 बैंकों को लगभग 11,000 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज़ चुकाना है। कुल ऋण की राशि का 27 प्रतिशत हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दिया गया। जेट एयरवेज़ ने पट्टे पर लिए गए हवाई जहाजों का किराया और तेल कंपनियों द्वारा की गई तेल की आपूर्ति का भुगतान भी नहीं किया है।

बाद में मिली रिपोर्टों ने खुलासा किया है कि बैंकों को जेट एयरवेज़ की समस्याओं का पूर्ण ज्ञान था लेकिन बैंकों ने समय पर उचित कार्यवाही नहीं की। बैंक जेट एयरवेज़ को 1500 करोड़ रुपये देने पर सहमत थे बशर्ते गोयल और उनका परिवार कंपनी के डिरेक्टर के पद को त्याग दें। जबकि गोयल और उनके परिवार ने 25 मार्च, 2019 को इस्तीफा दे दिया, तो बैंकों ने वादा किये हुए पैसे नहीं दिये, जिसके कारण जेट एयरवेज़ का संचालन रुक गया। बैंकों की इस निष्क्रियता के कारण हो सकता है कि कर्ज़ के रूप में दिये गये जनता के हजारों करोड़ रुपये राइट-ऑफ करने पड़ेंगे।

बैंकों ने अब जेट एयरवेज़ की बिक्री हेतु बोलियां आमंत्रित की हैं। यह बताया गया है कि जो पूंजीपति जेट को खरीदने में दिलचस्पी रखते हैं, उन्होंने खरीदी को आकर्षक बनाने के लिए बैंकों से 80 प्रतिशत कर्जे़ को माफ करने की मांग की है।

यह सब सरकार की पूर्ण जानकारी और समर्थन से हुआ है। भाजपा व कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली दोनों सरकारों ने समय-समय पर गोयल की नाजायज़ सहायता की थी। नागरिक उड्डयन नीति और नियमों में जेट एयरवेज़ को लाभ देने के लिये, समय-समय पर बदलाव भी किये गए हैं। 2001 की राजग सरकार में मंत्री, अरुण शौरी ने इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि गोयल के धन के स्रोतों पर गंभीर सवाल हैं। इस रिपोर्ट को प्रमुख भाजपा नेताओं के सक्रिय समर्थन से दबा दिया गया था। इसके पश्चात आने वाली हर सरकार ने इसके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की। गोयल की कंपनी, टेल विंड्स, जो जेट एयरवेज़ के शेयरों की मालिक है, एक प्रसिद्ध टैक्स-हेवेन देश, आइल ऑफ मैन में आधारित है। गोयल खुद एक अनिवासी भारतीय हैं और इंग्लैंड में रहते हैं।

जेट एयरवेज़ और गोयल के मामले से यह बात एक बार फिर सामने आयी है कि चाहे कांग्रेस पार्टी की सरकार हो या भाजपा की, दोनों ने बड़े पूंजीपतियों को अधिकाधिक मुनाफ़ा कमाने के लिए जनता का धन लूटने की खुली आज़ादी दी है। पूंजीपतियों को यह भी मालूम है कि उनके खि़लाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।

जेट के मज़दूरों को अंदेशा है कि 2012 में माल्या की किंगफिशर के मज़दूरों के साथ जो बीती थी, वही उनके साथ भी होने वाला है। कोई स्पष्टता नहीं है कि नए खरीदार का चयन, यदि हुआ तो, कब होगा या कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया जायेगा और उसे दिवालियापन-संहिता की प्रक्रिया के माध्यम से निबटाया जाएगा।

केंद्र सरकार अपने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के माध्यम से एयरलाइन परिवहन के सभी पहलुओं को देश में नियमित करती है। एयरलाइन मज़दूरों की नौकरियों को बचाने और अन्य एयरलाइनों द्वारा यात्रियों की लूट को रोकने में नाकाम रही केंद्र सरकार की निंदा की जानी चाहिए।

राज्य बड़े इजारेदार पूंजीपतियों के हितों का बचाव करता है और मज़दूर वर्ग के अति-शोषण तथा इसके साथ-साथ हमारे लोगों के धन और संसाधनों की जबरदस्त लूट में उनकी पूरी तरह से सहायता करता है। चाहे किसी पार्टी की भी सरकार सत्ता में हो, वह इन इजारेदार पूंजीपतियों के हित में ही कार्य करती है।

जेट एयरवेज़ के मज़दूरों तथा अन्य एयरलाइंस द्वारा की जा रही लूट से प्रभावित यात्रियों को हिन्दोस्तानी राज्य को अपने क्रोध का निशाना बनाना चाहिए, जो हमारी मुश्किलों तथा लोगों के धन की बेइंतहा लूट के लिए ज़िम्मेदार है।

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जेट एयरवेज़    एयरलाइन    May 16-31 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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