दुनियाभर में मई दिवस के उपलक्ष्य में शानदार समारोह आयोजित किए गए

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस को मनाने के लिए, दुनियाभर में कई स्थानों पर करोड़ों लोग सड़कों पर उतरे। हांगकांग में बस ड्राइवरों और घरेलू मज़दूरों ने 44 घंटे प्रति सप्ताह काम करने की मांग रखी। बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग से जुड़े मज़दूरों ने मज़दूरी के साथ मातृत्व अवकाश की मांग की। फिलीपींस में मज़दूरों ने न्यूनतम मज़दूरी को बढ़ाने के लिए प्रदर्शन में भाग लिया। फ्रांस, तुर्की, रूस, इंडोनशिया, फिलीपींस व कई अन्य देशों में मज़दूरों को मई दिवस की रैली में भाग लेने से रोकने के लिए पुलिस ने क्रूर दमन का प्रयोग किया। यह स्पष्ट दिखाता है कि पूंजीवादी देशों में मज़दूरों के ख़िलाफ़ राज्य का कितना जुल्मी रुख़ है।

Ankara Turkey Canada_Calgary
Philippines Russia_Moscow
Spain Turin_Italy
Turkey_Istanbul Uganda
Uruguay_Montevideo US_Raleigh

अमरीका के कई शहरों में, जिसमें सैन-फ्रांसिस्को, लास एंजेल्स, सियेटल, न्यूयार्क, पोर्टलैंड शामिल हैं। सभी मज़दूरों ने मिलकर दुनियाभर के मज़दूरों के साथ एकता के नारे साथ मई दिवस की रैलियों में उत्साह के साथ भाग लिया। मज़दूरों ने कई ज्वलंत मुद्दों पर लेागों का ध्यान आकर्षित किया जैसे कि - मज़दूरों को संगठित क्षेत्र में नौकरी की ज़रूरत (यूनियन बनाने के अधिकार के साथ नौकरियां), नौकरियों में सभी को बराबर का दर्ज़ा और वेतन, “आप्रवासियों, शरणार्थियों, मज़दूरों और राजकीय हिंसा के शिकार” लोगों के लिए सार्वजनिक शिक्षा और सुरक्षा के समर्थन में, आदि। विरोध प्रदर्शन के एक संयोजक ने ऐलान किया कि “मज़दूर दिवस दुनियाभर में आर्थिक और सामाजिक असमानताओं के विरोध संघर्ष का ऐतिहासिक दिन है”।

पिछले कई महीनों से फ्रांस के मज़दूर देश में बढ़ती असमानताओं, मज़दूर कानूनों और पेंशन संबंधी नियमों में प्रस्तावित मज़दूर-विरोधी संशोंधनों के खि़लाफ़ संघर्ष करते आए हैं। मई दिवस के अवसर पर उन्होंने अपनी सभी मांगों को दोहराया और उनको पूरा करने के लिए ज़ोरदार प्रदर्शन किया।

मई दिवस के अवसर पर जर्मनी के सभी मज़दूरों ने मज़दूरों के अधिकारों के समर्थन में एक जुझारू प्रदर्षन में भाग लिया। सभी यूनियनों ने मिलकर पूरे यूरोप में एक न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की मांग और मज़दूरों के सामूहिक वार्तालाप के द्वारा अधिकारों की पूर्ति के समर्थन में मांगें रखीं।

सेंट पीटर्सबर्ग में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले मज़दूरों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

देशभर में रेल, जल यातायात से जुड़े मज़दूरों और यातायात सेवाओं के मज़दूरों ने मई दिवस के अवसर पर जुझारू रैलियां निकालीं जिससे ये सभी सेवायें ठप्प हो गईं।

तुर्की में मज़दूर संगठनों और यूनियनों के विरोध संघर्षों पर वर्तमान सरकार

द्वारा लगातार दमन के खि़लाफ़ मज़दूरों ने अपना गुस्सा प्रकट किया।

सरकार ने जब मज़दूरों को, इस्तानबुल शहर के टकसिम चौक पर मई दिवस की रैली आयोजित करने की अनुमति नहीं दी, तब मज़दूरों ने शहर के बाज़ार में एक सार्वजनिक रैली आयोजित की। टकसिम चैक तुर्की के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह वही जगह है जहां 1977 में मई दिवस के रैली के दौरान पास की इमारत से लोगों पर की गई गोलीबारी से 34 लोगों की मौत हो गई थी। इन शहीदों की याद में मज़दूर हर मई दिवस पर इस चैक पर एक रैली का आयोजन करते हैं।

देश की राजधानी अल्जीरिर्स में, मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन में सरकार के खि़लाफ़ नारे लगाए। पिछले कई महीनों से देश के शिक्षक, खान मज़दूर और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े मज़दूर देश में बढ़ती ग़रीबी और बेरोज़गारी के खि़लाफ़ संघर्ष कर रहे हैं।

दक्षिण कोरिया में, देश की राजधानी सोल में, हजारों मज़दूरों ने मई दिवस के अवसर पर एक जुलूस निकाला और सरकार से मज़दूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए, देश में अंतर्राष्ट्रीय कायदे कानूनों को लागू करने की मांग रखी।

27,000 से अधिक लोगों ने राजधानी के सोल प्लाजा में आयोजित सभा में भाग लिया। देश के और 13 शहरों में आयोजित विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में 57,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

मज़दूरों के समर्थन में नारों के हेडबेंडस सिर पर बांधकर और हाथ उठाकर मज़दूरों की बदतर होती हालतों के खि़लाफ़ और सभी मज़दूरों, चाहे संगठित या असंगठित या ठेका मज़दूर हों को बराबर वेतन की मांगों को लेकर एक ज़ोरदार लड़ाकू विरोध प्रदर्शन में हजारों लोगों ने भाग लिया।

मज़दूरों ने अपनी मांगों, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और मिल मालिकों को मज़दूरों के साथ हुए अनुबंध को लागू करने की ज़रूरत के समर्थन में प्रदर्शन में भाग लिया।

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सैंकड़ों मज़दूर और मज़दूर संगठनों से जुड़े सदस्यों ने मई दिवस के अवसर पर रैलियां निकालीं और अपनी मांगों जैसे कि काम के स्थानों पर बेहतर सुविधाएं और वेतन में बढ़ोतरी के समर्थन में नारे लगाए।

महिला मज़दूरों की मांगों में था काम करने के स्थानों पर लैंगिक शोषण और हिंसा ख़त्म करना तथा मातृत्व आवकाश (कम से कम छः महीनों का) दिया जाना भी शामिल है।

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दुनियाभर में मई दिवस    May 16-31 2019    Struggle for Rights    History    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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