रेल चालकों ने अपनी मांगों के लिये हड़ताल की घोषणा की

29 मई, 2019 को आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) की अगुवाई में भारतीय रेल के चालकों ने पूरे देश के सभी 16 मंडलों के प्रत्येक डिपो पर धरना प्रदर्शन किया। ये धरना प्रदर्शन बिना किसी फार्मूले के घोषित किये गये माईलेज़ भत्ते के विरोध में किये गये। उन्होंने अपनी कई वर्षों से लंबित मांगों को पूरा करने की मांग को भी उठाया।

रेल चालकों ने घोषणा की है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 18 जुलाई को हड़ताल पर जायेेंगे। इससे पहले वे 16-17 जुलाई को भूख हड़ताल करेंगे।

AILRS Dharna

ए.आई.एल.आर.एस.ए. के केन्द्रीय उपाध्यक्ष कामरेड रामसरन ने बताया कि हम पिछले कई वषों से अपनी मांगें उठाते रहे हैं। हमने अपनी मांगों के समर्थन में कई भूख हड़तालें कीं, कई बार धरने प्रदर्शन किये, कई बार सरकार को और रेलवे बोर्ड को अपनी मांगों के ज्ञापन भी सौंपे। हमारे केन्द्रीय नेतृत्व ने इस विषय को लेकर रेल मंत्री पीयूश गोयल से मुलाकात भी की। इसके बावजूद हमारी मांगों पर न तो रेलवे बोर्ड ने और न ही सरकार ने ध्यान दिया है। इसलिये मजबूर होकर हमें यह कदम उठाना पड़ रहा है।

रेल चालकों की मुख्य मांगें हैं :

  • में एफ.डी.आई. बंद किया जाये।
  • स्टाफ का माइलेज भत्ता आर.ए.सी. 1980 के फार्मूले के अनुसार निर्धारित करते हुये 1 जनवरी, 2016 से एरियर सहित भुगतान किया जाये।
  • से पूर्व सेवानिवृत्त रनिंग कर्मचारियों के पेंशन निर्धारण में आर.बी.ई. 13/2019 की विसंगतियों में सुधार किया जाये।
  • .पी.एस. को तुरंत समाप्त करके पुरानी पेंशन व्यवस्था सबके लिये बहाल की जाये।
  • रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट को अविलंब लागू किया जाये।
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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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