अर्थव्यवस्था से संबंधित सूचना, जून 2019

हिन्दोस्तान की अर्थव्यवस्था काफी लम्बे अरसे से, मंदी के दौर से गुजर रही है। सभी बिजनस अख़बार कुछ समय से ऐसा कह रहे हैं। इससे पूरे पूंजीपति वर्ग के मुनाफ़ों को नुकसान हुआ है। पूंजीपति वर्ग के प्रतिनिधि यह मांग कर रहे हैं कि नरेन्द्र मोदी की सरकार, जो लोक सभा चुनावों में पहले से ज्यादा बहुमत के साथ जीत कर आयी है, पूंजीपतियों की इन समस्याओं को हल करने के लिए फ़ौरी कदम ले।

Graf-1_16Jun19देश के अन्दर वस्तुओं का उपभोग, वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात, ढांचागत क्षेत्र में सरकारी निवेश और नयी परियोजनाओं में निजी पूंजीपतियों द्वारा निवेश - इन सभी कारकों का सम्पूर्ण आर्थिक संवर्धन में योगदान होता है। अर्थव्यवस्था में मंदी का मज़दूर वर्ग के लिए बहुत गंभीर परिणाम होता है क्योंकि इससे बेरोज़गारी बढ़ती है।

हिन्दोस्तान की मौलिक अर्थव्यवस्था में, 2018-19 में 4.3 प्रतिशत वृद्धि हुयी, जो कि पिछले पांच सालों में धीमी गति के संवर्धन का दूसरा दौर है। 2014-15 में अर्थव्यवस्था में 4.9 प्रतिशत वृद्धि हुयी थी। यह 8 मौलिक उद्योगों - कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, तेल शोधन, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली - के हाल के आंकड़ों से पता चलता है (बिजनस टुडे, 8 मई, 2019)।

इन 8 मौलिक उद्योगों में, कच्चा तेल, उर्वरक और प्राकृतिक गैस में 2018-19 में बहुत कम या नकारात्मक वृद्धि हुयी थी। जबकि कच्चा तेल में 4.1 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि हुयी (बीते पांच सालों में सबसे कम), तो प्राकृतिक गैस में मात्र 0.8 प्रतिशत की वृद्धि हुयी और उर्वरक में उससे भी कम, 0.3 प्रतिशत।

औद्योगिक गतिविधि भी धीरे चल रही है। औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि का सूचकांक (आई.आई.पी.) दिसंबर 2018 की अंतिम तिमाही में 3.69 प्रतिशत था, जो कि बीती पांच तिमाहियों में सबसे कम है। जनवरी में आई.आई.पी. 1.79 प्रतिशत तक गिर गया। फरवरी का आई.आई.पी. और भी कम हो गया, मात्र 0.1 प्रतिशत, जो कि बीते 20 महीनों में सबसे कम था।

बिजली उत्पादन औद्योगिक गतिविधि का एक और सूचकांक है। 2018-19 में बिजली का उत्पादन 3.56 प्रतिशत बढ़ा, जो कि बीते 5 वर्षों में सबसे कम है। फिनिश्ड इस्पात उत्पादन में वृद्धि बीते 5 वर्षों में नीचे से दूसरे स्थान पर है।

मोटर गाड़ी, टू व्हीलर और ट्रेक्टर की बिक्री में गिरावट आयी है।

मोटर गाड़ी व टू व्हीलर की बिक्री जनवरी 2019 से लेकर, हर महीने में गिरी है। सवारी गाड़ियों की बिक्री जनवरी और मई 2019 के बीच 9 प्रतिशत गिरी, अप्रैल और मई 2019 में 17 प्रतिशत और 20 प्रतिशत क्रमशः गिरी। टू व्हीलर की बिक्री जनवरी और मई 2019 के बीच 11 प्रतिशत से ज्यादा गिरी, अप्रैल और मई 2019 में 17 प्रतिशत और 16 प्रतिशत क्रमशः गिरी।

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जून 2019 के आरम्भ में, 35,000 करोड़ रुपये की क़ीमत के 5 लाख से अधिक सवारी गाड़ी नहीं बिके थे। न बिके टू व्हीलरों की संख्या लगभग 30 लाख है और क़ीमत लगभग 17,000 करोड़ रुपये। देश के 7 सबसे बड़े सवारी गाड़ी निर्माताओं और टू व्हीलर निर्माताओं ने बिक्री में गिरावट के कारण, 4-12 दिन तक फैक्ट्रियां बंद रखीं। इन फैक्ट्रियों में आधे से दो-तिहाई मज़दूर, जो ठेके पर या अस्थायी तौर पर काम करते हैं, इस दौरान अपने वेतन खोये।

ट्रैक्टरों की बिक्री में भी गिरावट आई है, जो देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में घोर संकट को दर्शाता है।

हाल के वर्षों में हिन्दोस्तान के निर्यात भी स्थगित हैं या गिर रहे हैं। जहां 2013-14 में निर्यात 314.88 अरब डालर थे, तो 2015-16 में निर्यात घटकर 262.2 अरब डालर हो गए, फिर 2017-18 में 303.3 अरब डालर हुए, जो कि 2013-14 के आकड़ों के बहुत कम है। चमड़ा उद्योग में निर्यात 2014-15 में 6.2 अरब डालर थे। 2018-19 में ये 5.3 अरब डालर हो गए। रेडीमेड वस्त्रों का निर्यात 2016-17 में 17.4 अरब डालर थे, तो 2018-19 में 16.1 अरब डालर थे। कृषि और उससे संबंधित उत्पादों में वित्त वर्ष 2014 में निर्यात 43 अरब डालर थे, जो वित्त वर्ष 2019 में 38.5 अरब डालर थे। निर्यातों की मंदी के कारण, हजारों लोग नौकरियां खो बैठे हैं।

निजी पूंजीपति निवेश करने से इनकार कर रहे हैं क्योंकि फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं, बाज़ार में सामान भरा पड़ा है, और उन्हें खरीदने के लिए लोगों के पास पैसे नहीं हैं। अनुमान लगाया गया है कि कई क्षेत्रों में लगभग 30 प्रतिशत अतिरिक्त क्षमता है।

2018-19 के लिए नए प्रस्तावित निवेश 9.5 लाख करोड़ रुपये के थे, जो कि 2004-05 के बाद के 14 सालों में सबसे कम है। 2006-07 से 2010-2011 की अवधि के 25 लाख करोड़ रुपए के औसतन निवेश से यह बहुत कम है।

अर्थव्यवस्था में यह मंदी सामाजीकृत उत्पादन और उत्पादन के साधनों की निजी मालिकी के बीच मौलिक अंतर्विरोध को दर्शाती है। अधिकतम मुनाफ़ों की लालच में, पूंजीपतियों ने मज़दूरों के शोषण और किसानों की लूट को इस हद तक बढ़ा दिया है कि मज़दूर, किसान और दूसरे मेहनतकश लोग बाज़ार में पड़े सामानों को खरीद नहीं पा रहे हैं। विश्व बाज़ार की मंदी के कारण, निर्यातों के ज़रिये विश्व बाज़ार के और बड़े हिस्से पर कब्ज़ा करने की संभावना भी बहुत कम हो गयी है। अनेक पूंजीपतियों ने उत्पादन घटा दिया है, अनेकों ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया है, जबकि कुछ और पूंजीपति अधिग्रहण व विलयन के ज़रिये खूब बड़े हो रहे हैं। लम्बे दौर की मंदी के कारण, सरकार हाइवे निर्माण जैसी ढांचागत परियोजनाओं में निवेश कर रही है, ताकि अर्थव्यवस्था को धक्का दिया जाये और बड़े इजारेदार पूंजीपतियों के लिए बाज़ार पैदा हो। पूंजीपति वर्ग यह मांग कर रहा है कि केंद्र सरकार इस रास्ते पर और तेज़ गति से आगे बढे़।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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