रेलवे अपने प्रिंटिंग प्रेस बंद करेगी

4 जून, 2019 को जारी एक परिपत्र द्वारा रेलवे बोर्ड ने घोषणा की कि उसके 5 प्रिंटिंग प्रेस मार्च, 2020 तक बंद कर दिए जाएंगे। यह 5 प्रिंटिंग प्रेस हैं बायकुला/ मुंबई (मध्य रेलवे), हावड़ा (पूर्व रेलवे), शकूरबस्ती/दिल्ली (उत्तर रेलवे), रायपुरम/चेन्नई (दक्षिणी रेलवे) और सिकंदराबाद (दक्षिण मध्य रेलवे)।

ये प्रिंटिंग प्रेस 100 वर्ष से अधिक पुराने हैं और टिकट, समय सारिणी, नक्शे, रेलवे दस्तावेज़ और किताबें आदि मुद्रण करने का कार्य करते हैं। पिछले कई वर्षों से इन प्रिंटिंग प्रेसों के मज़दूरों की संख्या में लगातार कमी आई है। उदाहरण स्वरुप, बाइकुला प्रिंटिंग प्रेस में 1000 मज़दूर थे, अब केवल 350 ही रह गए हैं। कम्प्यूटरीकृत टिकटिंग प्रणाली के आगमन से, कार्ड टिकट के मुद्रण की संख्या में लगातार कमी आ रही है। रेलवे प्रेसों में मुद्रण की अधिक कीमत का बहाना देते हुए छपाई के पूरे शेष कार्य को निजी प्रेसों को ठेके पर देना चाहता है। पेपरलेस टिकटिंग प्रणाली को प्रचलित करने की रेलवे की योजना है, भले ही हमारे देश की बड़ी जनता पेपरलेस टिकटिंग में शामिल तकनीक को इस्तेमाल में सक्षम नहीं है।

अधिकारियों द्वारा भारतीय रेलवे के निजीकरण की समग्र योजना के कार्यान्वयन की दिशा में यह एक कदम है, जिसके तहत गैर-मूलभूत गतिविधियों को ठेके पर देना है। यह बिबेक देबरॉय समिति की 2015 में दी गयी सिफारिशों के अनुरूप भी है। हाल ही में संपन्न संसदीय चुनावों के फलस्वरूप सत्ता में लौटने के बाद, नरेंद्र मोदी सरकार अपनी मज़दूर विरोधी और पूंजीवादी नीतियों को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हो रही है। 4 जून को 5 प्रिंटिंग प्रेसों को बंद करने की घोषणा आम चुनावों के परिणाम के तुरंत बाद भारतीय रेलवे के मज़दूरों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सभी मज़दूरों पर तेज़ होते हमलों की तरफ संकेत है।

मज़दूर एकता लहर भारतीय रेलवे के श्रमिकों को एकजुट होने और रेलवे के निजीकरण का विरोध करने का आह्वान करती है।

Tag:   

Share Everywhere

प्रिंटिंग प्रेस    बंद    Jul 1-15 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

thumb

 

पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)