रेलवे में स्थायी पदों की प्रतिवर्ष कटौती

उत्तर रेलवे लखनऊ के मंडल रेल प्रबंधक (डी.आर.एम.) ने 30 मई 2019 को जारी एक परिपत्र में, लखनऊ मंडल के सभी विभागों को ग्रुप सी और ग्रुप डी में अपने 1 प्रतिशत निर्धारित/स्थायी पदों का कटौती करने का लक्ष्य दिया है। इसलिए लखनऊ डिवीजन में इन 2 श्रेणियों में आने वाले 26260 मज़दूरों में से, चालू वित्त वर्ष 2019-2020 में 262 पदों को कम करने का लक्ष्य है।

लखनऊ मंडल उत्तर रेलवे के 5 मंडलों में से एक है, अन्य 4 हैं अंबाला, दिल्ली, फिरोजपुर और मुरादाबाद। इसी तरह, उत्तर रेलवे, भारतीय रेलवे के 17 रेलवे जोनों में से एक है। ग्रुप सी और ग्रुप डी के मज़दूर भारतीय रेलवे के कुल कार्यबल का 98.8 प्रतिशत हैं। यह रेलवे बोर्ड की नीति है कि सभी भारतीय रेलवे के 17 जोनों में, 1 प्रतिशत कटौती के लक्ष्य को लागू किया जाना चाहिए और उत्तर रेलवे के डी.आर.एम. का उपरोक्त परिपत्र केवल उसी नीति का एक उदाहरण है जिसे पूरे हिन्दोस्तान में लागू किया जा रहा है।

इसलिए भारतीय रेलवे को अपने लगभग 13 लाख कुल कर्मचारियों में से, प्रतिवर्ष 13,000 पदों की कटौती करना होगा। अगर हम, हर साल सेवानिवृत्त होने वाले 3 प्रतिशत मज़दूरों की संख्या को शामिल कर लें तो भारतीय रेलवे में प्रतिवर्ष कुल 52000 मज़दूरों की कटौती होगी।

तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने 2009 में संसद के समक्ष पेश किए गए अपने 2020-अवलोकन (विजन) दस्तावेज में प्रतिवर्ष मज़दूरों की संख्या में 1 प्रतिशत कटौती की नीति की खुलेआम घोषणा की थी। इस नीति को उनके पश्चात आने वाले सभी रेल मंत्रियों द्वारा लागू किया गया है, चाहे वो कांग्रेस या भाजपा के रहे हों।

भारतीय रेलवे के मज़दूरों की संख्या में प्रतिवर्ष कमी का मतलब है कि अतिरिक्त कार्य को गैर-सरकारी ठेकेदारों को ठेके पर देना क्योंकि भारतीय रेलवे के माल और यात्री परिवहन में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। यह भारतीय रेलवे के निजीकरण के समग्र उद्देश्य का एक भाग है जिसे निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

भारतीय रेलवे के स्थायी मज़दूरों की संख्या में कमी का उद्देश्य मज़दूरों को हतोत्साही कर उनकी संघर्ष करने की क्षमता को कमजोर करना है। भारतीय रेल मज़दूरों की संगठित क्षमता के कमजोर होने का मतलब है भारतीय मज़दूर वर्ग की ताक़त का कमजोर होना क्योंकि रेलकर्मी हिन्दोस्तान के मज़दूर वर्ग के हितों की रक्षा में अग्रणी रहे हैं।

मज़दूर एकता लहर भारतीय रेलवे के मज़दूरों को एकजुट हो कर रेलवे के निजीकरण और उसके श्रमबल में कटौती का विरोध करने का आह्वान करती है।

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स्थायी पदों. प्रतिवर्ष कटौती    Jul 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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