मज़दूर एकता लहर के जून 16-30 के अंक में प्रकाशित पार्टी की केन्द्रीय समिति की परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति की प्रतिक्रिया में पाठकों से प्राप्त पत्र

संपादक महोदय

मज़दूर एकता लहर के 16-31 जून के अंक में प्रकाशित कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति की 9वीं परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति मौजूदा राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय हालातों का सटीक विश्लेषण पेश करती है। हाल ही में संपन्न चुनाव के नतीजों को भी हमें इन्हीं हालातों के संदर्भ में समझना होगा।

मैं इस पत्र में इन चुनावों में एंग्लो- अमरीकी एजेंसियों की प्रमुख भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा, जिसपर परिपूर्ण सभा में भी गौर किया गया है।

इस बात को सभी जानते हैं कि पिछले 5 वर्षों में व्हाट्स एप्प ने भाजपा के साथ बहुत करीबी से काम किया है। वर्ष 2012 में व्हाट्स एप्प को फेसबुक ने खरीद लिया था। इन चुनावों में मोदी को अप्रत्याशित बहुमत दिलाने के लिए मोबाइल फोन के द्वारा करोड़ों लोगों को तमाम तरह के नफ़रत भरे प्रचार और झूठी खबरों का शिकार बनाया गया। धर्म, जाति, राजनीतिक झुकाव, व्हाट्स एप्प और इन्टरनेट पर उनकी अन्य गतिविधियों के आधार पर उनपर प्रचार की बमबारी करने के लिए उनकी इज़ाज़त के बगैर व्यक्तिगत जानकारी को हासिल किया गया।

जैसे कि परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति में बताया गया है, अमरीका अपने हुक्म के तले एक-ध्रुवीय दुनिया कायम करने के लिए हमलावर तरीके से काम कर रहा है। हाल ही में अमरीका के विदेश मंत्री पोम्पो का हिन्दोस्तान दौरा फिर एक बार इस बात की पुष्टि करता है। अमरीका हिन्दोस्तान के साथ अपनी रणनैतिक-सैनिकी साझेदारी को मजबूत करना चाहता है। वह चाहता है कि हिन्दोस्तान हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में उसका एक वफादार साझेदार बने जिससे चीन और रूस को टक्कर दी जा सके और ईरान को अलग-थलग किया जा सके। हिन्दोस्तान को अमरीकी हितों की दिशा में मोड़ने के लिए अमरीका भा.ज.पा. सरकार पर विश्वास कर रही है, जिसके पास सम्पूर्ण बहुमत है।

जैसे कि परिपूर्ण सभा के निष्कर्ष में कहा गया है, भाजपा को इतनी बड़ी जीत दिलाने के पीछे निसंदेश वाशिंगटन (अमरीका) का हाथ है। यह हिन्दोस्तान के लोगों का जनमत नहीं है। इसके ठीक विपरीत, हमारे देश के लोगों को इस बारें में सचेत होना होगा कि अमरीकी साम्राज्यवाद के साथ निकट गठबंधन हमारे देश की संप्रभुता और इस इलाके में शांति और सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

चित्रा बी., नई दिल्ली


संपादक महोदय

1-2 जून 2019 को हुई कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति की परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति में चुनाव और उसके नतीजों का सही और स्पष्ट चित्र पेश किया गया है। ठोस विश्लेषण के आधार पर यह आगे का रास्ता दिखाता है और कार्य भी साफ तौर पर तय करता है।

“भाजपा को लोगों ने सत्ता पर नहीं बैठाया। हिन्दोस्तान के सबसे रसूखदार इजारेदार पूंजीपतियों ने एंग्लो-अमरीकियों के साथ सांठ-गांठ में यह नतीजा पैदा किया है”। केंद्रीय समिति का यह विश्लेषण बिलकुल सटीक है।

हमारे देश को एक बहुत ही ख़तरनाक रास्ते पर घसीटा जा रहा है। जैसे कि परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति में कहा गया है, “हमारे देश के हुक्मरान पूंजीपति वर्ग पर देश की संप्रभुता की रक्षा करने या इस इलाके में शांति के लिए काम करने के लिए, बिल्कुल भी विश्वास नहीं किया जा सकता। आज समय की मांग है कि हम तमाम मेहनतकश लोगों का एक व्यापक मोर्चा विकल्प बतौर खड़ा करें जो हमारे हुक्मरानों को देश को इस खतरनाक रास्ते पर ले जाने से रोक सकता है। असूल के आधार पर एक ऐसा एकजुट विकल्प, केवल कम्युनिस्ट अगुवाई में ही खड़ा किया जा सकता है। यह विकल्प न तो कांग्रेस और न ही किसी अन्य सरमायदारी पार्टी की अगुवाई में बनाया जा सकता है।

न्यूज मीडिया और सोशल मीडिया सभी लोगों पर यह दबाव डाल रहे हैं कि वे पूंजीपति वर्ग की पार्टियों में से किसी एक को चुनें। हुक्मरान वर्ग यह चाहता है कि लोग भाजपा या कांग्रेस के बीच किसी एक पार्टी को चुने। जैसे की परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति में कहा गया है, पूंजीपति वर्ग की इस चाल को परास्त करने का एक ही रास्ता है। वह रास्ता है कि हम सभी कम्युनिस्ट मिलकर एक क्रांतिकारी विकल्प पेश करें और मज़दूरों और किसानों की हुकूमत के लिए लड़ें। हमें हिन्दोस्तान के नवनिर्माण के लिए लड़ना होगा।

राम कुमार, वाराणसी


संपादक महोदय

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति की 9वीं परिपूर्ण सभा ने हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा के चुनावों का समग्र विश्लेषण किया।

परिपूर्ण सभा ने इस बात पर गौर किया कि इस चुनाव में बहुत बड़े पैमाने पर धन बल का इस्तेमाल किया गया है और यह दुनियाभर में अभी तक का सबसे महंगा चुनाव है, जहां सबसे अधिक धन भाजपा के प्रचार अभियान में खर्च किया गया है।

हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसमें यह बताया गया है कि इस चुनाव में करीब 60000 करोड़ रूपये खर्च किये गये हैं, जिसमें से 45 प्रतिशत भाजपा ने किया तो कांग्रेस ने 20 प्रतिशत किया है। इन दो पार्टियों ने मिलकर सबसे अधिक धन खर्च किया है।

ऐसा अनुमान है कि प्रत्येक वोटर पर 700 रुपये खर्च किये गए हैं। इसका मतलब है कि हर एक संसदीय क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये खर्च किये गए हैं। ऐसा अनुमान है कि 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये मतदाताओं को सीधे तौर पर बांटे गए, जबकि 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये प्रचार पर खर्च किये गए और 5000 करोड़ रुपये लोजिस्टिक्स पर खर्च हुए।

यह सारा धन उम्मीदवारों के जेब से तो नहीं आ सकता। बड़ी सरमायदारी पार्टियों के चुनाव अभियान के लिए देशी और विदेश इजारेदार कंपनियों और एजेंसियों ने ढे़र सारा धन दिया है। यह सारा धन चुनावी बांड, सीधे योगदान, मीडिया पर समय, लोजिस्टिक्स सहायता और अन्य कामों पर खर्चे को अंडर-राइट करके किया गया।

भाजपा जो सत्ता में आई है, वह जनमत के बल पर नहीं है। वह तो धनबल और सबसे बड़े इजारेदार कंपनियों की प्रचार शक्ति है, जिसके बल पर भाजपा, फिर एक बार सरकार बनाने में कामयाब हुई है।

यह सारा अनुभव फिर एक बार मज़दूरों और किसानों को सत्ता को तुरंत अपने हाथों में लेने के लिए आह्वान करता है। लोगों के हाथों में संप्रभुता सौंपने के लिए राजनीतिक व्यवस्था का पुनर्गठन करते हुए हिन्दोस्तान का नवनिर्माण करने के लिए प्रेरित करता है।

एन कंडास्वामी,

मदुरई

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Jul 1-15 2019    Letters to Editor    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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