गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों को “सार्वजनिक सेवा” का दर्ज़ा

हाल के महीनों में ऑटो स्पेयर पाट्र्स सप्लायर्स, जैसे कि प्रिकोल, असाहि, चैल, एम.एस.आई. और डोंगसन में मजदूरों ने बार-बार अपने अधिकारों के लिये विरोध प्रदर्शन और हड़तालें कीं। इन प्रदर्शनों और हड़तालों के मद्देनज़र तमिलनाडु सरकार ने ऑटो के कलपुर्जें बनाने वाली कंपनियों को ‘सार्वजनिक सेवा’ का दर्ज़ा देने वाली अधिसूचना जारी की। औद्योगिक विवाद अधिनियम में इस संशोधन के चलते, तमिलनाडु में ऑटो स्पेयर पाट्र्स के सप्लायरों को वही दर्जा हासिल हो गया है जो पानी, बिजली और सार्वजनिक परिवहन, इत्यादि जैसी मूलभूत सेवाओं पर लागू होता है।

इस अधिसूचना के लागू होने से, इन कंपनियों के मज़दूर लंबी अवधि के नोटिस के बिना हड़ताल नहीं कर पाएंगे। मज़दूरों को औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत सुलह प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से स्वीकार करना होगा, जिसके बिना हड़ताल को गैरकानूनी माना जायेगा।

इससे पहले हुंडई, रीनॉल्ट, निसान, फोर्ड और अन्य गाड़ी निर्माताओं को इसी तरह का दर्ज़ा दिया गया था। विशेष आर्थिक क्षेत्र (एस.ई.जेड.) में स्थित कारखानों को भी इस तरह का दर्ज़ा हासिल है।

इस प्रतिगामी कदम का उन सभी लोगों को विरोध करना चाहिए जो मज़दूरों के हड़ताल करने के अधिकार को उनका बुनियादी अधिकार मानते हैं और उसका समर्थन करते हैं।

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कलपुर्जे    सार्वजनिक सेवा    Jul 16-31 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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