मज़दूर एकता लहर के जून 16-30 के अंक में प्रकाशित पार्टी की केन्द्रीय समिति की परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति की प्रतिक्रिया में पाठकों से प्राप्त पत्र

संपादक महोदय,

पार्टी की केंद्रीय समिति की परिपूर्ण सभा में हाल के संपन्न हुए चुनाव और उसमें पार्टी की भूमिका का विश्लेषण, जो कि केंद्रीय समिति की विज्ञप्ति के रूप में मज़दूर एकता लहर में प्रकाशित किया गया। यह पूंजीवादी व्यवस्था के तहत चुनाव में कम्युनिस्टों द्वारा हिस्सा लेने और उसका वर्ग दृष्टिकोण के आधार पर विश्लेषण किये जाने का एक बेहतरीन उदाहरण है। चुनाव के दौरान पार्टी की भूमिका कम्युनिस्ट राजनीतिक कार्य और कार्यनीति का एक बेहतरीन उदाहरण है। जबकि देश और दुनियाभर के सरमायदार हिन्दोस्तान और दुनियाभर में अपने वर्ग का राज बरकरार रखने के हर तरह के झूठ, नफ़रत, आतंक और वहशी हमलों के द्वारा अपने असली मकसद और कार्यक्रम से लोगों का ध्यान भटकाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने उनकी इस योजना और कार्यक्रम का पर्दाफाश करते हुए हिन्दोस्तान के नव-निर्माण का कार्यक्रम पेश किया है। नव-निर्माण का यह कार्यक्रम सरमायदारों के उदारीकरण और निजीकरण के रास्ते भूमंडलीकरण के कार्यक्रम को चुनौती देता है, जिसे तमाम सरमायदारी पार्टियां अलग-अलग रूपों में पेश करती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कार्यक्रम किसी दस्तावेज़ और गोष्ठियों तक सीमित नहीं रखा गया है बल्कि इसे राजनीतिक अखाड़े में, चुनाव के अखाड़े में उतारा गया है ताकि, समस्त मज़दूर वर्ग, मेहनतकश और विशेष तौर से देश की राजधानी का मज़दूर वर्ग इससे अवगत हो और इसे देश के मज़दूर वर्ग के कार्यक्रम बतौर अपनाये और उसे अमल में लाने के लिए संघर्ष करे। इस कार्यक्रम में देश के हर उस तबके की आवाज़ शामिल है जो वर्तमान व्यवस्था से पीड़ित है और परिवर्तन की आस रखता है।

मुझे इस चुनाव अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने का मौका मिला और मैं यह यकीन के साथ कहा सकता हूं कि मज़दूर वर्ग ने न केवल इस नव-निर्माण के कार्यक्रम को अपनाया है बल्कि उसके प्रसार-प्रचार में बढ़-चढ़कर योगदान दिया है। सैकड़ों नौजवान मज़दूरों ने समय निकालकर योजनाबद्ध तरीके से इस अभियान में हिस्सा लिया। मोहल्ला-दर-मोहल्ला, गली-गली, घर-घर जाकर नव-निर्माण के कार्यक्रम की प्रतियां बांटी गयीं और नौजवानों, मज़दूरों और महिलाओं के बीच चर्चा की गयी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव के बाद यह काम रुका नहीं है। चुनाव ख़त्म होते ही, जबकि सभी सरमायदारी पार्टियां और उनके कार्यकर्ता अपने-अपने बिलों में वापस चले गए हैं और अगले चुनाव का इंतज़ार कर रहे हैं, जब वे अपने बिलों से बाहर निकलकर लोगों को भटकाने का प्रयास करेंगे, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के नौजवान मज़दूर कार्यकर्ता हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के कार्यक्रम का प्रचार लगातार जारी रखे हुए हैं। वे लगातार गली मोहल्लों में, आम सभाओं में, कम्युनिस्ट और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा कर रहे हैं और सभी मेहनतकश लोगों की राजनीतिक एकता और कम्युनिस्ट एकता बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।

केंद्रीय समिति की यह विज्ञप्ति हमारे कार्य को बल देगी।

आपका

नंदकुमार गायकवाड, पुणे


संपादक महोदय,

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति की 9वीं परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति में देश और दुनिया में चल रही राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में और हाल ही में हुए आम चुनावों का स्पष्ट और ठीक समय पर विश्लेषण पेश किया गया है।

ऐसे समय में जब दुनियाभर में, हिन्दोस्तान के चुनाव की दुनिया में सबसे बड़ी जनतांत्रिक व्यवस्था के रूप में तारीफ की जा रही है, जब यह बताया जा रहा है कि इस चुनाव में हिन्दोस्तान के लोगों ने मोदी सरकार को बड़े बहुमत के साथ वापस सत्ता पर बैठाया है, ऐसे समय में यह विश्लेषण इस झूठे और भ्रामक प्रचार का पर्दाफाश करता है। यह विश्लेषण हमें एक बार फिर याद दिलाता है कि एक वर्ग-विभाजित समाज में, जैसे कि हमारा समाज है, जहां बड़े सरमायदारों का सत्ता के सारे तंत्रों पर कब्ज़ा है, ऐसे समाज में चुनाव कभी भी “लोगों की इच्छा” जाहिर नहीं कर सकते। बड़े सरमायदार अपने सारे तंत्र और संसाधन का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए करते हैं, कि चुनाव प्रक्रिया के ज़रिये वे अपने सबसे वफादार प्रतिनिधियों को सरकार में बैठायें। अपना मनपसंद नतीजा हासिल करने के लिए बड़े सरमायदार बहुत बड़े पैमाने पर धनबल का, सबसे बड़े मीडिया घरानों का, पुलिस और सशस्त्र बलों का, कोर्ट, चुनाव आयोग, नौकरशाही और तमाम अन्य सरकारी तंत्रों का इस्तेमाल करते हैं। इस समय हुक्मरान वर्ग मोदी की अगुवाई में भाजपा पर विष्वास कर रहा है कि भाजपा उनके हितों में काम करेगी और जन-विरोधी उदारीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगी।

इस विज्ञप्ति में हिन्दोस्तान में हुए चुनाव में एंग्लो-अमरीकी साम्राज्यवाद की भूमिका पर भी गौर किया गया है जिन्होंने चुनाव के द्वारा एक ऐसी सरकार बनाने के लिए चुनाव को प्रभावित किया, जो उनके हितों के अनुसार चलेगी। हमारे देश के राजनेताओं, अधिकारियों, मीडिया, इत्यादि के विदेशी साम्राज्यवादियों के साथ हजारों तार जुड़े हुए हैं और जो चुनाव सहित हमारे जीवन के हर एक पहलू में साम्राज्यवादियों द्वारा हस्तक्षेप करने का ज़रिया है। मौजूदा समय में अमरीकी साम्राज्यवाद हिन्दोस्तान पर लगातार दबाव डाल रहा है कि हिन्दोस्तान दुनिया पर अपना दबदबा जमाने की अमरीका की वैश्विक रणनीति का हिस्सा बने। यह हमारे देश और दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा ख़तरा है। 

इसके साथ परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि कम्युनिस्ट चुनाव में इस लक्ष्य के साथ हिस्सा लेते हैं, कि हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के लिए लोगों को लामबंध करने के काम का और अधिक प्रसार हो। इस काम के महत्व को इस बात से आंका जाना चाहिए कि हम अपनी पार्टी की लाइन और कार्यक्रम को सैकड़ों हजारों लोगों तक ले गए और उस पर चर्चा की और साथ ही पार्टी के साथियों ने पूरे जोश और स्पष्ट समझ के साथ पार्टी की लाइन और कार्यक्रम को पेश किया।

जैसा कि विज्ञप्ति में बताया गया है कि देशी और विदेशी साम्राज्यवादी सरमायदार अपने खुदगर्ज़ एजेंडे को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और इसकी क़ीमत हिन्दोस्तानी लोगों से वसूली जा रही है। यह कम्युनिस्टों की ज़िम्मेदारी है कि वे इस संकट का सामना करने के लिए हिन्दोस्तान के मज़दूर वर्ग को लामबंध करने और लोगों की एकता बनाने का काम और अधिक तेज़ी के साथ करें, ताकि राज सत्ता मज़दूर वर्ग के हाथों में आ सके।

आपका

एस. राजन

चेन्नई


संपादक महोदय,

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 9वीं परिपूर्ण सभा ने पिछले लोकसभा चुनावों के परिणामों का बिलकुल सही विश्लेषण किया है। मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था में चुनाव देश के सत्ताधारी वर्ग, हिन्दोस्तानी इजारेदार पूंजीपतियों के हाथों में लोगों को बुद्धू बनाने का एक हथियार है। यह धारणा बनाकर कि लोग अपने वोट के द्वारा पार्टी चुनते हैं। पूंजीपतियों द्वारा अपनी पसंदीदा पार्टी को सत्ता में बिठाने का चुनाव एक साधन है। चुनाव के बाद विजयी पार्टी दावा करती है कि उसे लोगों का जनादेश प्राप्त हुआ है। जबकि सत्ताधारी वर्ग, जिसने तय किया कि अगले पांच वर्षों में उनका एजेंडा लागू करने के लिए किस पार्टी को सत्ता में बिठाया जाएगा।

यही कारण है कि चाहे भाजपा हो या कांग्रेस पार्टी या अन्य पार्टियों का गठबंधन, कोई भी सत्ता में आए लोगों के लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। सत्ता में बैठी सभी पार्टियां वही नीतियां अपनाती हैं, जो पहले से चल रही हैं। केवल उनके लागू करने के तौर-तरीके बदल जाते हैं। कुछ खुल्लम-खुल्ला, विभाजनात्मक तथा सांप्रदायिक होती हैं और अन्य वही काम छिपकर करती हैं। वे सभी पूंजीपति-हितैशी नीतियां लागू करते हुए अपने-अपने तरीके से लोक हितैशी होने का दिखावा करती हैं।

एक वर्ग विभाजित समाज में एक वर्ग का दूसरे वर्ग पर राज होने के अलावा और कुछ नहीं हो सकता। आर्थिक रूप से हावी वर्ग राजनीतिक रूप से भी हावी हो जाता है। अधिकांश राजनीतिक पार्टियां अपने देश के एक या दूसरे पूंजीपति गुट का प्रतिनिधित्व करती हैं। चुनाव तय करते हैं कि अगले पांच वर्षों में उनका प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी के माध्यम से किन इजारेदार पूंजीपतियों के गुट का बोल-बाला रहेगा।

विज्ञप्ति ने सही दर्शाया है कि चुनाव विभिन्न इजारेदार गुटों के बीच झगड़ों को “शांतिपूर्ण“ तरीके से सुलझाने का भी माध्यम है। वर्तमान व्यवस्था में लोकतंत्र केवल पूंजीपति वर्ग के लिए है। मज़दूरों और किसानों के पास पांच साल में एक बार वोट डालने के अलावा और कोई अधिकार नहीं हैं।

पूरी चुनावी व्यवस्था सत्ताधारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियों के पक्ष में धांधली से काम करती है। मज़दूरों व किसानों के हितों के लिए संघर्ष करने वाले उम्मीदवारों के लिए चुनकर आने की कोई संभावना नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव के परिणामों ने एक बार फिर दिखा दिया कि मेहनतकश लोगों के अधिकारों तथा कल्याण के लिए अथक रूप से काम करने वाले देशभर में हजारों उम्मीदवार जो मज़दूरों और किसानों की आवाज़ लोकसभा तक पहुंचाना चाहते थे परन्तु इस चुनावी व्यवस्था में उनके चुनकर आने की कोई उम्मीद नहीं है।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 9वीं परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति ने एक और महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान दिलाया। वह है पिछले लोकसभा चुनाव में विदेशी इजारेदारों तथा साम्राज्यवादी शक्तियों और खास तौर से अमरीका की भूमिका। अमरीकी साम्राज्यवाद अपने भू-राजनीतिक उद्देश्यों को पाने के लिए हिन्दोस्तान को अपने खेमे में खीचने का भरपूर प्रयास कर रहा है। वह सत्ता में ऐसी पार्टी चाहता था जिसका अमरीका की तरफ ज्यादा झुकाव हो। अमरीकी इजारेदारियों की सहायता से अमरीका ने लोकसभा चुनाव को बहुत प्रभावित किया है। जैसा कि विज्ञप्ति ने कहा है कि अमरीका का बढ़ता हुआ प्रभाव और हिन्दोस्तान के साथ बढ़ती मित्रता अपने देश के लोगों के लिए अत्यंत ख़तरनाक है।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने वर्तमान चुनावी व्यवस्था का पर्दाफाश किया है। पार्टी ने चुनाव में भाग लिया ताकि लोगों को मूर्ख बनाने के लिए जानबूझकर पैदा किए गए मिथकों को उजागर किया जा सके और लोगों को संगठित करके एक नई राजनीतिक और आर्थिक प्रणाली का निर्माण किया जा सके, अर्थात हिन्दोस्तान का नव-निर्माण।

आपका पाठक,

रमेश विश्वकर्मा, बनारस

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Aug 1-15 2019    Letters to Editor    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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