डाइकिन के राजस्थान प्लांट में मज़दूरों का संघर्ष

एयर कंडीशनर की उत्पादक कंपनी डाइकिन के मज़दूर, राजस्थान के अलवर इलाके में पिछले 170 दिनों से निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। 8 अगस्त को किए गए विरोध प्रदर्शन में मज़दूर कलेक्टर कार्यालय गए और जनवरी में आयोजित हड़ताल के दौरान गिरफ्तार किये गए 18 मज़दूरों की रिहाई और कंपनी के कर्मचारियों पर लगाए गये झूठे केस वापस लेने की मांग रखी।

8 और 9 जनवरी, 2019 को अलवर में डाइकिन कारखाने के 2000 से भी ज्यादा मज़दूरों ने देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा हिस्सा लिया था और देशभर के लाखों मज़दूरों का साथ देते हुए सड़कों पर उतरे थे और कारखाना मालिकों की दमनकारी नीतियों का विरोध किया था। जब मज़दूर कंपनी के मुख्य गेट के सामने से जुलूस निकाल रहे थे, उस समय पुलिस ने उन पर बर्बर तरीके से हमला किया, जिसमें कई मज़दूर घायल हुए थे। भीड़ को भगाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल भी किया।

इसके बाद, पुलिस ने 18 कर्मचारियों पर झूठे केस दर्ज़ किये और 70 कर्मचारियों पर ’हत्या करने का प्रयास’ जैसे संगीन आरोप लगाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत एफ.आई.आर. दर्ज़ की। इस कठोर धारा के तहत आसानी से जमानत नहीं मिलती है। इसके अलावा, राजस्थान पुलिस ने 600 अनजान व्यक्तियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज़ किया है। साथ ही 10 अन्य मज़दूरों को देश के अलग-अलग शहरों में भेज दिया गया है और इसकी कोई वजह नहीं बताई गयी है।

मज़दूरों के एक प्रतिनिधि ने बताया कि, “राज्य सरकार मज़दूरों को निशाना बनाने का खुल्लम-खुल्ला प्रयास कर रही है। हमने राज्य सरकार से इस केस में एक निष्पक्ष जांच की अपील की थी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। हमने राज्य सरकार के सामने अपना मांगपत्र भी पेश किया लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं हो रहा है।”

मज़दूर जनवरी के महीने से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस द्वारा डराने-धमकाने की कार्यवाही को ख़त्म करने की मांग को लेकर मार्च के महीने में धरना प्रदर्शन आयोजित किये गए। ये मज़दूर नीमराना मज़दूर संघ और मज़दूर संघर्ष समिति के झंडे तले अपना संघर्ष चला रहे हैं। इससे पहले, मज़दूरों को अपनी यूनियन को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष करना पड़ा था। वह संघर्ष वर्ष 2012 में शुरू हुआ था, और आखिरकार अगस्त 2018 में मज़दूरों के लगातार संघर्षों की वजह से उनकी यूनियन को औपचारिक तौर से मान्यता दी गई। कंपनी के अंदर उनके साथ किए जाने वाले अमानवीय बर्ताव के ख़िलाफ़ मज़दूर लगातार आवाज़ उठा रहे हैं। यहां तक कि मज़दूरों को बाथरूम जाने के लिए समय नहीं दिया जाता है। काम की जगह पर खाने और पानी तक की सुविधा नहीं है, जो कि इंसान की बुनियादी ज़रूरत है। बेहद दबाव के माहौल में उनसे काम कराया जाता है।

फ़िलहाल स्थानीय कलेक्टर के साथ बातचीत की जा रही है। लेकिन मज़दूरों ने अपने संघर्ष को और भी अधिक तेज़ करने का फैसला किया है।

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Aug 16-31 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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