आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के कर्मचारियों का निजीकरण के ख़िलाफ़ हड़ताल का आह्वान

देशभर की आयुध निर्माण (ऑर्डनन्स) फैक्ट्रियों के कर्मचारियों ने रक्षा उत्पादन क्षेत्र के निजीकरण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए 20 अगस्त से एक महीने की हड़ताल का आह्वान किया है। देशभर में अलग-अलग तरह से विरोध प्रदर्शन करने के अलावा, आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के कर्मचारियों ने 20 अगस्त को संसद के सामने भूख हड़ताल करने का आह्वान भी किया है।

आल इंडिया डिफेन्स एम्प्लाइज फेडरेशन, इंडियन नेशनल डिफेन्स वर्कर्स फेडरेशन और भारतीय प्रतिरक्षा मज़दूर संघ जो देशभर के 41 आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के मज़दूरों का प्रतिनिधित्व करती है, इन सभी यूनियनों ने मिलकर इस हड़ताल का आह्वान किया है। यह यूनियन ऑर्डनेन्स फक्टोर्ट बोर्ड (ओ.एफ.बी.) और डायरेक्टरेट ऑफ़ क्वालिटी अशोरंस (डी.जी.क्यू.ए.) के सभी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है। 30 जुलाई को किये गए जनमत संग्रह में 75 प्रतिशत मज़दूरों ने हड़ताल के समर्थन में अपना मत दिया था।

विरोध प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी सरकार की उस योजना का विरोध कर रहे हैं जिसके तहत ऑर्डनेन्स फैक्ट्री बोर्ड को एक निगम में बदल दिया जायेगा और आगे चलकर पूरे रक्षा उत्पादन को निजी कंपनियों को सौंप दिया जायेगा। इसके पीछे सरकार का यह इरादा है कि यह निगम दुनियाभर की विशाल कंपनियों जैसे लॉकहीड मार्टिन और बी.ए.ई. सिस्टम्स की तरह काम करे।

Ordnance factory

रक्षा मंत्रालय को भेजे गए कई ज्ञापनों में आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के कर्मचारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि रक्षा उत्पाद देश के लिए रणनैतिक तौर पर महत्वपूर्ण हैं और इसको निजी कंपनियों के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए। गृह मंत्रालय को लिखे गए एक पत्र में आयुध निर्माण फैक्ट्रियों की ट्रेड यूनियनों ने ऐलान किया है कि सरकार जो क़दम उठा रही है वह “रक्षा मंत्रालय द्वारा तीन मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों को किये गए वादों के ख़िलाफ़ है”। उन्होंने सरकार से अपील की है कि आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के निगमीकरण की ओर बढ़ते क़दमों को “तुरंत रोका जाये”।

इस वर्ष में निजीकरण के ख़िलाफ़ आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के मज़दूरों की यह दूसरी हड़ताल है। इससे पहले, 23 जनवरी को देशभर के करीब 4 लाख आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के मज़दूरों ने महाराष्ट्र में अंबरनाथ और कांदिवली, नौसेना बंदरगाह और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज और अन्य ऑर्डनेन्स प्लांट और संस्थाओं में आयोजित हड़ताल और विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।

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Aug 16-31 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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